2जी मामला: कोर्ट ने ईडी को दी मंत्रालय की फाइलों के इस्तेमाल की अनुमति

टूजी-घोटाले से जुड़े धनशोधन के मामले में एक गवाह से पूछताछ के लिए एक विशेष अदालत ने ईडी को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की दो फाइलें इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी है। इस मामले में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा और अन्य मुकदमे का सामना कर रहे हैं।

नई दिल्ली : टूजी-घोटाले से जुड़े धनशोधन के मामले में एक गवाह से पूछताछ के लिए एक विशेष अदालत ने ईडी को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की दो फाइलें इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी है। इस मामले में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा और अन्य मुकदमे का सामना कर रहे हैं।

विशेष सीबीआई जज ओपी सैनी ने ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि मामले में न्यायपूर्ण फैसला देने के लिए, गवाह नवील कपूर (सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अवर सचिव) से पूछताछ के लिए इन दो फाइलों का इस्तेमाल जरूरी है। न्यायाधीश ने कहा कि मेरा मानना है कि चूंकि फाइलें पहले ही अदालत के संरक्षण में हैं, ऐसे में इस मामले में न्यायपूर्ण फैसला सुनाने के लिए नवील कपूर से पूछताछ में दो फाइलों का इस्तेमाल जरूरी है। उन्होंने आगे कहा कि इसलिए, इस मामले में और गवाह के रूप में नवील कपूर से पूछताछ के लिए दो फाइलों के इस्तेमाल की अनुमति दी जाती है।

अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि दो फाइलों की प्रतियां पहले ही आरोपियों को भेजी जा चुकी हैं और उन्हें गवाह से जिरह करने का अवसर मिलेगा। याचिका पर बहस के दौरान विशेष सरकारी वकील आनंद ग्रोवर ने कहा कि फाइलें पेश किया जाना जरूरी है क्योंकि उनमें द्रमुक की सांसद कनिमोई के कलैगनार टीवी (प्राइवेट) लिमिटेड में निदेशक के रूप में कार्यकाल से जुड़ी जानकारी है। इसके अलावा कपूर से पूछताछ के लिए भी यह जरूरी है।

ग्रोवर ने यह भी तर्क दिया कि जिस सूचना के लिए अनुमति मांगी जा रही है, वह मामले के निपटान के लिए आवश्यक है क्योंकि इन दस्तावेजों का संबंध उन तथ्यों से है, जो ईडी की शिकायत में वर्णित हैं। और यह (मामले की) रिक्तियों को भरने वाले नहीं हैं और आरोपी के बारे में कोई पूर्वाग्रह पैदा नहीं करते। ईडी की याचिका का विरोध करते हुए कलैगनार टीवी (प्राइवेट) लिमिटेड के वकील ने दावा किया कि एजेंसी (मामले में) मौजूद रिक्तियों को भरने की कोशिश कर रही है और वह मांगे जा रहे दस्तावेजों एवं साक्ष्यों की प्रासंगिकता को स्थापित करने में विफल रही है। बचाव पक्ष के वकील ने यह भी तर्क दिया कि इन फाइलों को इस चरण में पेश किए जाने से आरोपी के बारे में पूर्वाग्रह पैदा हो सकते हैं।