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ये हैं 5 महत्वपूर्ण फैक्टर, जिनकी वजह से शेयर बाजार में निवेशकों के डूब गए लाखों करोड़

बजट में वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि लिस्टेड कंपनियों में मिनिमम पब्लिक शेयर होल्डिंग अब 35 फीसदी होगा. पहले यह 25 फीसदी था.

ये हैं 5 महत्वपूर्ण फैक्टर, जिनकी वजह से शेयर बाजार में निवेशकों के डूब गए लाखों करोड़
प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली: इस बजट में वित्तमंत्री ने जो कुछ कहा, लगता है उससे शेयर बाजार खुश नहीं है. यही वजह है कि शेयर बाजार में गिरावट का दौर जारी है. सोमवार को सेंसेक्स में पिछले 11 सालों की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई. आज भी गिरावट के साथ बाजार खुला. अब तक निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये डूब चुके हैं. ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिर बजट में ऐसी क्या घोषणा की गई कि निवेशकों में निराशा है. बाजार के जानकारों के मुताबिक, नीचे दिए गए कुछ फैक्टर हैं जिसकी वजह से शेयर बाजार बुरी तरह प्रभावित हुआ है.

1. वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि लिस्टेड कंपनियों में मिनिमम पब्लिक शेयर होल्डिंग अब 35 फीसदी होगा. पहले यह 25 फीसदी था. इसका मतलब यह हुआ कि जिन कंपनियों के प्रोमोटर के पास ज्यादा शेयर थे और लोगों के पास कम शेयर (अगर 35 फीसदी से कम) थे उन्हें अब शेयर बेचने होंगे. इससे प्रोमोटर का वर्चस्व कम हो सकेगा. इससे पहले 2010 में  मिनिमम पब्लिक शेयर होल्डिंग को 10 और 15 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी कर दिया गया था.

2. शेयर बायबैक को टैक्सेबल कर दिया गया है. शेयर बायबैक का मतलब होता है, जब कंपनी अपना शेयर वापस खरीदती है. यह एक प्रक्रिया है, जिसके तहत कंपनी पहले ऐलान करती है कि वह इस तारीख को शेयर खरीदेगी. उस दिन शेयर जिसके अकाउंट में होगा उसे इसका लाभ मिलेगा. शेयर बायबैक में हमेशा ज्यादा प्राइस ऑफर की जाती है. अब शेयर बायबैक पर 20 फीसदी का टैक्स लगेगा.

3. हाल ही में पंजाब नेशनल बैंक ने कहा कि भूषण स्टील ने बैंक के साथ 3800 करोड़ रुपये का धोखा किया है. इससे निवेशकों में डर कायम हुआ है. नीरव मोदी के बाद पंजाब नेशनल बैंक के साथ यह दूसरा बड़ा फर्जीवाड़ा है. PNB का शेयर सोमवार को इस खबर के बाद 11 फीसदी तक गिर गया था. निवेशकों के मन में यह डर है कि जांच में तेजी आने पर आनेवाले दिनों में कई बैंकों के साथ इस तरह की घटनाओं का खुलासा हो सकता है. इसलिए, बैंकिंग सेक्टर के शेयर में बिकवाली तेज है.

4. इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स जिनकी इनकम करोड़ो में है, सरकार ने सरचार्ज रेट बढ़ा दी है. बाजार जानकारों का मानना है कि इससे भी उनके निवेश करने की शक्ति पर असर पड़ा है. इसका असर म्यूचुअल फंड और शेयर मार्केट पर दिख रहा है.

5. इन सब के अलावा अमेरिका में पिछले सप्ताह जॉब डॉटा मजबूत आने से अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में कटौती की संभावना कम होने से एशिया बाजारों में नकरात्मक रुझान पड़ा है.