सावधान! सरकारी बैंकों का ATM यूज करते हैं तो यह खबर जरूर पढ़ लें

अगर आपका अकाउंट भी किसी सरकारी बैंक और आप अक्सर सरकारी बैंक का एटीएम इस्तेमाल करते हैं तो सावधान रहें. ऐसे लोगों के लिए यह खबर अत्यंत महत्वपूर्ण है.

सावधान! सरकारी बैंकों का ATM यूज करते हैं तो यह खबर जरूर पढ़ लें

नई दिल्ली : अगर आपका अकाउंट भी किसी सरकारी बैंक और आप अक्सर सरकारी बैंक का एटीएम इस्तेमाल करते हैं तो सावधान रहें. ऐसे लोगों के लिए यह खबर अत्यंत महत्वपूर्ण है. सरकार की तरफ से शुक्रवार को संकेत दिया कि सरकारी बैंकों के 74 प्रतिशत एटीएम आसानी से धोखाधड़ी के शिकार हो सकते हैं. ये एटीएम आउटडेटेड सॉफ्टवेयर पर काम कर रहे हैं. यह जानकारी संसद में सरकारी बैंकों से संबंधित पूछे गए एक सवाल के जवाब में सामने आई है.

एटीएम फ्रॉड पर हुई चर्चा
संसद में चर्चा के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में एटीएम फ्रॉड पर चर्चा हुई. सरकार की तरफ से बताया गया कि सिक्यॉरिटी फीचर की कमी के कारण एटीएम धोखाधड़ी की आशंका बढ़ जाती है. बता दें कि सरकार ने प्राइवेट बैंकों द्वारा संचालित ATM के बारे में कोई जवाब नहीं दिया. इससे पहले रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बैंकों से लेटेस्ट सिक्योरिटी फीचर वाला एडवांस ऑपरेटिंग सिस्टम अपडेट करने के लिए कहा है.

सिक्युरिटी फीचर अपडेट करने की जरूरत
आरबीआई ने कहा कि धोखाधड़ी को रोकने के लिए जल्द से जल्द एटीएम में सिक्युरिटी फीचर अपडेट करने की जरूरत है. बैंकों को नया ऑपरेटिंग सिस्टम जून 2019 तक अपग्रेड करने का समय दिया गया है. आपको बता दें कि कई एटीएम मशीनें विंडोज XP पर रन कर रही हैं. एनसीआर कॉर्पोरेशन में इंडिया एंड साउथ एशिया के मैनेजिंग डायरेक्टर नेवरोज दस्तर ने बताया कि अधिकतर एटीएम विंडोज XP पर काम कर रहे हैं, इन एटीएम में एडवांस सिक्योरिटी सिस्टम अपडेट नहीं किया गया है. बैंकों की तरफ से धीमी गति से सिस्टम अपग्रेड किया जा रहा है.

70 फीसदी लेनदेन सरकारी बैंकों से
सरकार ने संसद में स्वीकार किया कि आज के दौर में निजी बैंकों के बढ़ते दखल के बावजूद मौजूदा समय में 70 फीसदी लेनदेन सरकारी बैंकों से होता है. पिछले कुछ महीनों में एटीएम फ्रॉड की शिकायतें आई हैं. इसके बाद आरबीआई की तरफ से बैंकों को नया सिक्योरिटी सिस्टम अपडेट करने के लिए निश्चित समय दिया गया है.

बैंकों का तर्क है कि निर्धारित समय सीमा के अंदर ATM में सॉफ्टवेयर अपडेट करना मुश्किल होगा. सरकार ने संसद में बताया कि जुलाई 2017 से जून 2018 के बीच डेबिट और क्रेडिट कार्ड से जुड़ी 25 हजार शिकायतें मिली हैं. कुल लेनदेन की संख्या 861 करोड़ का हुआ, जिसके मुकाबले शिकायतें काफी कम हैं.