जीएसटी प्रशासन में कर रिटर्न दाखिल करने के लिए 8 फॉर्म

प्रस्तावित वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रशासन में एक कारोबारी से दूसरे कारोबारी के बीच विभिन्न श्रेणियों में होने वाले सौदों के बारे में आठ फॉर्म के सेट के जरिये मासिक आधार पर रिटर्न दाखिल करनी पड़ सकती है।

नई दिल्ली : प्रस्तावित वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रशासन में एक कारोबारी से दूसरे कारोबारी के बीच विभिन्न श्रेणियों में होने वाले सौदों के बारे में आठ फॉर्म के सेट के जरिये मासिक आधार पर रिटर्न दाखिल करनी पड़ सकती है।

जीएसटी के लिये व्यवसाय प्रसंस्करण पर गठित संयुक्त समिति ने केन्द्रीय जीएसटी, राज्य जीएसटी और एकीकृत जीएसटी के लिए नियमित ई-रिटर्न दाखिल किये जाने की व्यवस्था का सुझाव दिया है। प्रस्ताव के मुताबिक यह रिटर्न महीने की एक निश्चित तिथि पर दाखिल की जा सकती है। जैसे कि बाहर भेजे गये माल पर अगले महीने की 10 तारीख, आने वाले माल के लिये 15 तारीख और मासिक रिटर्न के लिये 20 तारीख तय की जा सकती है।

समिति ने कहा कि जीएसटी प्रशासन में कर का भुगतान करने वालों को रिटर्न दाखिल करने के लिये आठ फार्म होंगे। इसमें जीएसटीआर-5 फार्म में प्रवासी कर दाताओं द्वारा जीएसटी रिटर्न दाखिल करने का प्रावधान होगा। प्रवासी करदाताओं में टैक्सी सेवा देने वाली कंपनी उबर आदि हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नियत समय पर रिटर्न दाखिल नहीं करने वाले ‘डिफॉल्टर’ की एक सूची बनाई जायेगी और इसका ब्यौरा जीएसटी प्रशासन को जरूरी कार्रवाई के लिये भेज दिया जायेगा।

संयुक्त समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि जीएसटी कानून में रिटर्न दाखिल नहीं करने वालों या फिर देर से दाखिल करने वालों पर स्वत: जुर्माने का प्रावधान होना चाहिये। इसमें कहा गया है कि यदि रिटर्न बिना पूर्ण भुगतान के भरी गई है तो उन्हें अवैध ठहरा दिया जायेगा। जीएसटी रिटर्न में संशोधन का कोई प्रावधान नहीं होगा।

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