गोदामों में अनाज के खराब होने की मात्रा में आई करीब 90% कमी

भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के गोदामों में अनाज के खराब होने की मात्रा में पिछले पांच सालों में खासा कमी दर्ज की गई है. उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्यमंत्री सी आर चौधरी ने शुक्रवार को राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि एफसीआई के गोदामों में खराब होने वाले अनाज की मात्रा वित्तीय वर्ष 2013-14 में 209 टन थी जो 2017-18 में घट कर 22 टन रह गई है.

गोदामों में अनाज के खराब होने की मात्रा में आई करीब 90% कमी
प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली: भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के गोदामों में अनाज के खराब होने की मात्रा में पिछले पांच सालों में खासा कमी दर्ज की गई है. उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्यमंत्री सी आर चौधरी ने शुक्रवार को राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि एफसीआई के गोदामों में खराब होने वाले अनाज की मात्रा वित्तीय वर्ष 2013-14 में 209 टन थी जो 2017-18 में घट कर 22 टन रह गई है.

चौधरी ने बताया कि इस अवधि में खराब हुए अनाज से हुये नुकसान की मात्रा 17.03 लाख रुपये से घटकर साल 2017-18 में 2.33 लाख रुपये रह गई. इस साल एक जून तक गोदामों में रखे अनाज के भीगने से खराब होने का कोई मामला नहीं सामने आया है.

सपा के विशम्भर प्रसाद निषाद और सुखराम सिंह यादव ने पूछा था कि पिछले पांच साल में मानसून के दौरान गोदामों में रखा कितना अनाज खराब हुआ और इसके लिए किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की गई या नहीं.

चौधरी ने पांच साल के आंकड़ों के हवाले से बताया कि एफसीआई के अपने गोदामों और केन्द्रीय तथा राज्य भंडारण निगम से किराये पर लिए गए गोदामों में अनाज की क्षति के लिए पांच राज्यों (बिहार, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और दिल्ली) में 29 अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए इनके खिलाफ कार्रवाई की गई.

उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2014-15 में 14.85 लाख रुपये की अनुमानित लागत का 130 टन, 2015-16 में 13.13 लाख रुपये का 119 टन, 2016-17 में 17.25 लाख रुपये का 138 टन और 2017-18 में 2.33 लाख रुपये का 22 टन अनाज खराब हुआ.

(इनपुट - भाषा)

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