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EXCLUSIVE: बैंक अकाउंट पोर्टेबिलिटी योजना अटकी, इस वजह से बैंकों ने किया इनकार

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पिछले साल बैंक अकाउंट पोर्टेबिलिटी को लेकर प्रस्ताव दिया था. RBI के प्रस्ताव के मुताबिक, ग्राहक अपना बिना खाता नंबर बदले अपना बैंक बदल सकते हैं. लेकिन, अब इसमें पेंच फंसता नजर आ रहा है.

EXCLUSIVE: बैंक अकाउंट पोर्टेबिलिटी योजना अटकी, इस वजह से बैंकों ने किया इनकार
केंद्र सरकार आधार से जुड़े बैंक खातों में पोर्टेबिलिटी की सुविधा देने के पक्ष में है.

नई दिल्ली(आलोक प्रियदर्शी): बैंक अकाउंट पोर्टेबिलिटी की योजना फिलहाल ठंडे बस्ते में जा सकती है. हालांकि, सरकार आधार से जुड़े बैंक खातों में यह सुविधा देने के पक्ष में है. लेकिन, फ्रॉड और बढ़ते एनपीए को देखते हुए बैंक इस योजना से हाथ खींच रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, अभी तक किसी बैंक ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई है. वित्त मंत्रालय के साथ हुई बैठक में आरबीआई ने इसकी जानकारी दी. आपको बता दें, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पिछले साल बैंक अकाउंट पोर्टेबिलिटी को लेकर प्रस्ताव दिया था. RBI के प्रस्ताव के मुताबिक, ग्राहक अपना बिना खाता नंबर बदले अपना बैंक बदल सकते हैं. लेकिन, अब इसमें पेंच फंसता नजर आ रहा है.

UIDAI, NPCI तलाश सकते हैं विकल्प
केंद्र सरकार आधार से जुड़े बैंक खातों में पोर्टेबिलिटी की सुविधा देने के पक्ष में है. लेकिन, अभी तक बैंकों की तरफ से इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है. सूत्रों की मानें तो सरकार UIDAI और NPCI को भी इसका विकल्प तलाशने को कह सकती है. 

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बैंकिंग एसोसिशन ने भी किया विरोध
एक तरफ सरकार इस योजना को अमल में लाने की जल्दी दिखा रही है. वहीं, इंडियन बैंकिंग एसोसिएशन और ट्रेड यूनियन्स योजना के विरोध में हैं. वहीं बैंक भी कोर बैंकिंग सिस्टम और हालात का हवाला देकर इससे बचने की कोशिश कर रहे हैं. बैंकर्स का मानना है कि खाताधारकों की बड़ी संख्या और तकनीकी समस्या इस योजना की राह में बड़ा रोड़ा है.

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क्या है पोर्टेबिलिटी योजना?
आरबीआई के डिप्टी गर्वनर एस एस मुन्द्रा ने पिछले साल अकाउंटिग पोर्टेबिलिटी की योजना को लागू करने के लिए बैंकों से कहा था. इससे बैंक ग्राहक बिना अपने अकाउंट नंबर बदले बैंक बदल सकता है. बैंकों में प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों के हितों को देखते हुए इस योजना को बनाया गया था, ताकि बैंक ग्राहकों को सुविधा देने में आनकानी न करें. फिलहाल, इस समय देश में करीब 80 करोड़ के करीब बैंक अकाउंट हैं. प्रधानमंत्री जनधन योजना के बाद 2015 से बैंक अकाउंट में एकाएक भारी बढ़ोत्तरी हुई है.