इंश्योरेंस पॉलिसी की मदद से कीजिए साइबर हमले का मुकाबला, लेकिन जरा संभल के

साइबर हमले का शिकार बनने की आशंका हमेशा बनी रहती है. इस डर ने छुटकारा पाने का एक तरीका है साइबर इंश्योरेंस पॉलिसी. भारत में एचडीएफसी अर्गो और बजाज एलियांज ऐसी बीमा पॉलिसी की पेशकश कर रही हैं.

इंश्योरेंस पॉलिसी की मदद से कीजिए साइबर हमले का मुकाबला, लेकिन जरा संभल के
2017 में साइबर क्राइम के चलते भारतीय लोगों ने 18.5 अरब डॉलर खोए

नई दिल्ली: फेसबुक के पांच करोड़ एकाउंट हैक होने की खबर आने के बाद से सभी साइबर सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं. तमाम सावधानियां रखने के बाद भी एक आम उपभोक्ता से किसी साइबर एक्सपर्ट की तरह जागरुक होने की उम्मीद करना सही नहीं होगा. हैकर्स नई-नई तरकीब निकाल रहे हैं. ऐसे में साइबर हमले का शिकार बनने की आशंका हमेशा बनी रहती है. इस डर ने छुटकारा पाने का एक तरीका है साइबर इंश्योरेंस पॉलिसी. भारत में एचडीएफसी अर्गो और बजाज एलियांज ऐसी बीमा पॉलिसी की पेशकश कर रही हैं.

साइबर हमले के शिकार 
नॉर्टन साइबर सिक्योरिटी इनसाइट रिपोर्ट के मुताबिक भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले प्रत्येक पांच लोगों में दो लोग किसी न किसी तरह के साइबर क्राइम का शिकार होते हैं. इसके बावजूद भारत में कुल साइबर बीमा कारोबार अमेरिका के मुकाबले सिर्फ 1.6 प्रतिशत है. इसमें से भी ज्यादातर पॉलिसी कंपनियों या संस्थानों द्वारा ली जाती हैं. व्यक्तिगत रूप से ऐसी पॉलिसी लेने वालों की संख्या बहुत कम (सिर्फ एक प्रतिशत) है. हालांकि जागरुकता बढ़ने के साथ ऐसे बीमा खरीदने वालों की संख्या बढ़ रही है.

cyberrisks

कितना हुआ नुकसान?
साइबर इंश्योरेंस पॉलिसी लेने से पहले कुछ जानकारी लेने और थोड़ी सावधानी बरतने की जरूरत है. नॉर्टन की रिपोर्ट के मुताबिक 2017 में साइबर क्राइम में भारतीय लोगों ने 18.5 अरब डॉलर खोए. इस बावजूद सिर्फ देश में सिर्फ बजाज एलियांज और एचडीएफसी अग्रो ही पर्सनल साइबर रिस्क कवर की पेशकश करती हैं. ये पॉलिसी मुख्य रूप से वसूली, फिशिंग, ईमेल स्पूफिंग और अनाधिकृत ऑनलाइन ट्रॉन्जैक्शन से हुए वित्तीय नुकसान की भरपाई दी जाती है. इसके अलावा साइबर क्राइम के चलते तीसरे पक्ष पर मुकदमा करने की स्थिति में कानूनी कार्रवाई की लागत भी दी जाती है.

सावधानी है जरूरी
हालांकि इस कंपनियों के किसी भी प्लान पर ये सभी चीजें कवर नहीं की जाती हैं. साथ ही अगर मान लीजिए किसी पॉलिसी में कानूनी कार्रवाई की लागत को कवर किया गया है, तो आपको ये भी पूछना चाहिए कि कितनी लागत कवर की गई है. हो सकता है कि कुल कागत का 10 प्रतिशत या 30 प्रतिशत ही कवर हो. यानी बाकी पैसा आपको अपने पास से लगाना पड़ेगा. इसलिए पॉलिसी लेने से पहले ध्यान से पता कीजिए कि उसमें क्या कवर किया गया और कितने नुकसान की भरपाई कवर की गई है. तभी आप सही मायने में साइबर क्राइम से निश्चिंत हो पाएंगे.