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GST के इस नियम से व्यापारी परेशान, वित्त मंत्री से की तुरंत हटाने की मांग

कारोबारियों के लिए नए साल से एक नया नियम सरकार लागू करने जा रही है, जिससे फर्जी बिलों पर अंकुश लगाया जा सके. हालांकि कैट ने पत्र लिखकर वित्तमंत्री से इस नियम को स्थगित करने के लिए कहा है. 

GST के इस नियम से व्यापारी परेशान, वित्त मंत्री से की तुरंत हटाने की मांग
फाइल फोटो: निर्मला सीतारमण

नई दिल्लीः कारोबारियों व व्यापारियों के संगठन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने वित्तमंत्री को पत्र लिखकर गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) में नियम 86 B को लागू करने को स्थगित करने की मांग की है. यह नियम उन कारोबारियों पर लागू होगा जिनका मासिक टर्नओवर 50 लाख से ज्यादा होगा. ऐसे कारोबारियों को एक फीसदी GST देनदारी कैश में अदा करनी होगी. 

सीबीआईसी ने कही थी ये बात
वित्त मंत्रालय ने कहा है कि 50 लाख रुपये से अधिक के मासिक कारोबार वाली इकाइयों को अनिवार्य रूप से एक प्रतिशत माल एवं सेवा कर (जीएसटी) देनदारी का भुगतान नकद में करना होगा. यह कदम जाली बिल (इन्वॉयस) के जरिये कर चोरी रोकने के लिए उठाया गया है. केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने जीएसटी नियमों में नियम 86 बी पेश किया है. यह नियम इनपुट कर क्रेडिट (आईटीसी) का अधिकतम 99 प्रतिशत तक ही इस्तेमाल जीएसटी देनदारी निपटाने की अनुमति देता है.

सीबीआईसी ने बुधवार को कहा था कि, ‘किसी महीने में टैक्स आपूर्ति का मूल्य 50 लाख रुपये से अधिक होने पर कोई भी पंजीकृत व्यक्ति इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर में उपलब्ध राशि का इस्तेमाल 99 फीसदी से अधिक टैक्स लायबिलिटी को पूरा करने के लिए नहीं कर सकता है.’

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इन पर नहीं लागू होगा ये नियम
कारोबार की सीमा की गणना करते समय जीएसटी छूट वाले उत्पादों या शून्य दरों वाली आपूर्ति को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा. कंपनी के प्रबंध निदेशक या किसी भागीदार ने यदि एक लाख रुपये से अधिक का इनकम टैक्स दिया है अथवा रजिस्टर्ड व्यक्ति को इससे पिछले वित्त वर्ष के दौरान इस्तेमाल न हुए इनपुट टैक्स क्रेडिट पर एक लाख रुपये से अधिक का रिफंड मिला है, तो यह नियम लागू नहीं होगा.

इस वजह से लिखा पत्र
कैट ने इस प्रावधान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र भेजकर मांग की है कि इस नियम को तुरंत स्थगित किया जाए और व्यापारियों से सलाह कर ही इसे लागू किया जाए. कैट ने यह भी मांग की है कि जीएसटी एवं आयकर में ऑडिट रिटर्न भरने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर, 2020 को भी तीन महीने के लिए आगे बढ़ाया जाए. कैट के महासचिव प्रवीन खंडेलवाल ने सीतारमण को भेजे पत्र में यह भी कहा कि अब समय आ गया है जब एक बार सरकार को व्यापारियों के साथ बैठकर जीएसटी कर प्रणाली की संपूर्ण समीक्षा करनी चाहिए तथा टैक्स प्रणाली को और सरलीकृत करना चाहिए. कैट ने इस मुद्दे पर सीतारमण से मिलने का समय मांगा है.

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