GDP में बढ़ोतरी के बावजूद सियासी तकरार, कांग्रेस बता रही आंकड़ों की बाजीगरी

जीडीपी (GDP) के नए आंकड़ों पर कांग्रेस ने सियासी वार किया है. कांग्रेस का आरोप है कि जो आंकड़े जारी किए गए हैं उनमें केवल बाजीगरी (Juggle) की गई है जबकि सच्चाई ये है कि कम विकास और बढ़ती महंगाई (Inflation) से जनता दोहरी मार झेल रही है.  

GDP में बढ़ोतरी के बावजूद सियासी तकरार, कांग्रेस बता रही आंकड़ों की बाजीगरी
जीडीपी के नए आंकड़ों पर कांग्रेस का हमला

दिल्ली: चालू वित्त वर्ष (Curremt Finnacial Year) की तीसरी तिमाही अक्टूबर-दिसंबर में अर्थव्यवस्था में 0.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. इससे साफ जाहिर होता है कि धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट रही है लेकिन कांग्रेस को इस पर ऐतबार नहीं है. कांग्रेस ने जीडीपी (Gross Domestic Production) के नए आंकड़ों को महज बाजीगरी (Juggle) करार दिया है.

कांग्रेस का बड़ा आरोप

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला (Randeep Surjewala) ने कहा है कि मोदी सरकार की गलत नीतियों की वजह से आम जनता बेहद परेशान है. बढ़ती महंगाई और कम विकास होने से जनता को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. सुरजेवाला ने ये भी कहा कि जीडीपी के जो नए आंकड़े सामने आए हैं वो केवल आंकड़ों की बाजीगरी है. सुरजेवाला ने तर्क दिया कि केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) ने 2020-21 के लिए जीडीपी दर को अब माइनस 8 फीसदी कर दिया है जबकि पहले माइनस 7.7 प्रतिशत का अनुमान लगाय गया था. सुरजेवाला ने ये दावा भी किया कि CSO ने जो अनुमान लगाया है, अर्थव्यवस्था उससे भी बदतर प्रदर्शन करेगी और इसका असर ये होगा कि कम निवेश, कम रोजगार का सृजन होगा.

'पहले भी बदला था अनुमान'

सुरजेवाला ने 2020-21 की पहली तिमाही का जिक्र भी किया. सुरजेवाला ने कहा कि पहली तिमाही की GDP के आंकड़ों को भी संशोधित कर माइनस 24.4 प्रतिशत कर दिया गया है जो कि पहले माइनस 23.9 फीसदी था. सुरजेवाला ने ये भी कहा कि मोदी सरकार की गलत योजना और बिना तैयारी के लॉकडाउन लगाने से अर्थव्यवस्था और डूब गई जो कि पहले ही नोटबंदी और जीएसटी की वजह से दिक्कतें झेल रही थी.

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'मोदी सरकार ने नहीं पूरे किए वादे'

बढ़ती महंगाई पर भी सुरजेवाला ने मोदी सरकार को निशाने पर लिया. सुरजेवाला ने कहा कि देश में महामारी के कारण कीमतें आसमान छू रही हैं. महंगाई दर में लगातार इजाफा हो रहा है. इससे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) पर ब्याज दर बढ़ाने का दबाव बनेगा और मांग घटने से अर्थव्यवस्था और नुकसान में रहेगी. सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि दावे के विपरीत केंद्र सरकार ने अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए बहुत कम खर्च किया. आंकड़ों के लिहाज से निजी उपभोग खर्च 21.2 लाख करोड़ रुपये है जो कि वर्ष दर वर्ष के आधार पर 2.4 फीसदी कम है.

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