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Jet Airways की उम्मीदें खत्म? उबरने में ये आ रही हैं परेशानियां

टॉप मैनेजमेंट के इस्तीफे के पीछे ये मतलब निकाला जा रहा है कि अब एयरलाइन को पटरी पर लाने की आस खत्म हो रही है. 

Jet Airways की उम्मीदें खत्म? उबरने में ये आ रही हैं परेशानियां
इससे पहले जेट एयरवेज के बोर्ड मेंबर और प्रोमोटर नरेश गोयल के करीबी समझे जाने वाले गौरांग शेट्टी ने भी इस्तीफा दिया था. (फाइल)

नई दिल्ली: जेट एयरवेज के टॉप मैनेजमेंट को ही एयरलाइन के रिवाइवल की उम्मीदें खत्म होती दिख रही हैं. मंगलवार को जेट एयरवेज के CEO विनय दुबे और कंपनी सेक्रेटरी कुलदीप शर्मा ने इस्तीफा दे दिया. इससे पहले कंपनी के डिप्टी CEO और CFO अमित अग्रवाल ने सोमवार को अपना इस्तीफा सौंप दिया था. टॉप मैनेजमेंट के इस्तीफे के पीछे ये मतलब निकाला जा रहा है कि अब एयरलाइन को पटरी पर लाने की आस खत्म हो रही है. एयर इंडिया के पूर्व ED और एविएशन एक्सपर्ट जितेंद्र भार्गव मानते हैं कि “ टॉप मैनेजमेंट के इस तरह बीच में छोड़कर जाने  का मेसेज ये है कि अब रिवाइल की उम्मीद खत्म हो चुकी है. ये  बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है.  अब निवेशकों को कंपनी के बारे में जानकारी देने वाला  कोई नहीं बचेगा”. भार्गव टॉप मैनेजमेंट के इस तरह छोड़कर जाने को भी नैतिक तौर पर ठीक नहीं मानते हैं. इससे पहले जेट एयरवेज के बोर्ड मेंबर और प्रोमोटर नरेश गोयल के करीबी समझे जाने वाले गौरांग शेट्टी ने भी इस्तीफा दिया था.  

बोलियों के लिए निवेशकों का रिस्पॉन्स ठंडा
दरअसल जेट एयरवेज के लिए बैंकों की ओर से इनवेस्टमेंट बैंक SBI कैप्स ने जो बोलियां मंगाई थीं. उसे लेकर निवेशकों का रिस्पॉन्स ठंडा रहा. जेट एयरवेज की साझीदार रही एतिहाद की ही अकेली योग्य बोली आई. जिसमें एतिहाद ने शर्तें ऐसी रखीं जो बैंकों को रास नहीं आईं. एतिहाद ने जेट का सारा कर्ज़ माफ करने की शर्त रखी. एयरलाइन चलाने के लिए साझीदार खोजने का जिम्मा भी बैंकों पर डाल दिया. सबसे कठिन शर्त ये रखी कि सेबी के ओपन ऑफर नियमों से छूट दी जाए. सेबी की ओर से पहले ही ये संकेत दिया जा चुका था कि ऐसी रियायत मिलना कठिन है.

स्पाइसजेट जैसी राहत चाहता है एतिहाद एयरवेज
सेबी का टेकओवर नियम कहता  है कि किसी लिस्टेड कंपनी में जैसे ही हिस्सेदारी 25 फीसदी या उससे ऊपर जाएगी. हिस्सेदारी खरीदने वाली कंपनी को कम से कम 26 फीसदी और हिस्सा खरीदने के लिए ओपन ऑफर लाना पड़ेगा. एतिहाद इस नियम को पूरा करने के बजाय इसमें रियायत चाहता है. सरकार की सिफारिश पर स्पाइसजेट के मामले में सेबी की ओर से एक बार ऐसी राहत मिल चुकी है. एतिहाद भी जेट के केस में अपने लिए ऐसी राहत चाहता है. 

कई कंपनियों ने बोली लगाई है
जेट के लिए बोली में एतिहाद के अलावा NIIF, इंडिगो पार्टनर्स और TPG कैपिटल ने भी शुरू में दिलचस्पी दिखाई थी. कैनेडा एयरवेज ने बोली में हिस्सा लेने के संकेत दिए थे. लेकिन शुरुआती बोली की प्रक्रिया में ही हिस्सा नहीं लिया. बैंकों को उम्मीद थी कि अंतिम बोली में बढ़िया रिस्पॉन्स मिलेगा. लेकिन एतिहाद के अलावा किसी और की योग्य बोली नहीं आई. हालांकि 3 सीधी बोलियां स्टेट बैंक को मिली हैं. ये उनकी बोलियां हैं जिन्होंने शुरुआती चरण में हिस्सा नहीं लिया था. बैंक इन बोलियों को भेजने वाले निवेशकों से और जानकारी मांग कर उसका आंकलन कर सकते हैं. बैंक इस हफ्ते इस मामले पर बैठक करने पर विचार कर रहे हैं. 

 8000 करोड़ से ज्यादा का कर्ज
जेट को लेकर बैंक भी अब पसोपेश में हैं. क्योंकि 8000 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम डूबने के कगार पर है. ऐसे में मुमकिन है कि वो नए सिरे से बोलियां भी मंगाएं. क्योंकि देश के सबसे बड़े बैंक SBI के चेयरमैन रजनीश कुमार साफ कर चुके हैं कि वो जेट एयरवेज का मामला NCLT के रास्ते सुलझाने के पक्ष में नहीं हैं. रजनीश कुमार के मुताबिक ” सर्विस सेक्टर की कंपनियों के NCLT में जाने  पर वैल्युएशन काफी कम हो होती है, क्योंकि मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों की तरह प्लांट या मशीनरी जैसी संपत्तियां नहीं होतीं”   

एतिहाद ओपन ऑफर नहीं लाना चाहता
दरअसल नवंबर से ही बैंक जेट एयरवेज को मुश्किलों से उबारने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन कहीं न कहीं मामला फंसता रहा. जनवरी में एतिहाद ने शर्त रख दी कि नरेश गोयल को बोर्ड से हटाया जाए. साथ ही 150 रु प्रति शेयर पर हिस्सेदारी बढ़ाने दी जाए. तब भी एतिहाद  ओपन ऑफर नहीं लाना चाहता था. दबाव में  मार्च अंत में नरेश गोयल, अनीता गोयल और एतिहाद के एक प्रतिनिधि ने बोर्ड से इस्तीफा दे दिया.  

दरअसल फरवरी में बैंकों की अगुवाई में एक रिजोल्यूशन प्लान तैयार किया गया था. जिसके तहत बैंकों का जेट एयरवेज के कर्ज़ को हिस्सेदारी में बदलने का प्रस्ताव था. जेट के 11.4 करोड़ शेयर शेयर बैंकों को जारी होने थे. जिससे एतिहाद की हिस्सेदारी घटकर 24 से 12 फीसदी और प्रोमोटर गोयल परिवार की हिस्सेदारी 51 से घटकर करीब 25 फीसदी रह जाती. लेकिन रिज़र्व बैंक के जिस 12 फरवरी 2018 के सर्कुलर के तहत कर्ज़ों को हिस्सेदारी में बदलने की योजना बनी थी. उस सर्कुलर को ही सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल में खारिज़ कर दिया. बैंकों की सारी योजना धरी की धरी रह गई.   

रिजर्व बैंक के सर्कुलर से प्लान पर पानी फिरा
मार्च में बैंकों की ओर से जेट एयरवेज के लिए एक और प्लान तैयार था. जिसमें प्लान में 3800 करोड़ रुपए नए निवेशकों से आना था. जबकि 5135 करोड़ रुपए की रकम राइट्स इश्यू से लाई जानी थी. जबकि करीब 1500 करोड़ रुपए की रकम बैंकों को डालना था. लेकिन रिज़र्व बैंक का सर्कुलर रद्द होने और बैंकों के बीच आपसी सहमति न बन पाने से एयरलाइन में ज़रूरत के मुताबिक नई पूंजी नहीं आई. किराए पर लिए गए जेट के जहाज़ एक एक कर वापस ले लिए गए. बीते साल जनवरी तक 123 जहाज़ों वाली एयरलाइन को अप्रैल आते आते 5 जहाज तक सिमटना पड़ा. आखिरकार एयरलाइन को पैसों के अभाव में 17 अप्रैल को सारा कामकाज सस्पेंड करना पड़ा. एयरलाइन के हिस्से के रूट और दूसरे अधिकार फिलहाल अन्य एयरलाइंस के पास हैं. 

कर्मचारियों ने बैंक को दोषी माना
जेट एयरवेज के लिए कानूनी दिक्कतें भी बढ़ रही हैं. पायलटों के संगठन NAG ने सुप्रीम कोर्ट में SBI को घसीटा है. जबकि एयरलाइन में धांधलियों की पुरानी शिकायतों पर कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय ने SFIO से जांच शुरु करने को कहा है. एनफोर्समेंट डायरेक्ट्रेट भी जेट की सहयोगी कंपनी जेट प्रिविलेज में FEMA नियमों के उल्लंघन की जांच कर रही है. सैलरी और दूसरे बकायों को लेकर कर्मचारियों ने भी श्रम मंत्रालय में शिकायत की है. जेट के बंद होने से प्रत्य़क्ष तौर पर 14500 कर्मचारियों की नौकरी खतरे में है. जबकि एयरलाइन से जुड़ी करीब 6000 अप्रत्यक्ष नौकरियों पर भी मार पड़ेगी.   

किराये में आया उछाल
जेट एयरवेज के बंद होने का खामियाजा कंज्यूमर्स को भी भुगतना पड़ रहा है. छुट्टियों के पीक सीज़न में हवाई किराए से लेकर रेल किराये तक बढ़े हुए हैं. जबकि हज़ारों करोड़ रुपए के टिकट कैंसिलेशन के रीफंड बाकी हैं.