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ITR दाखिल करने वालों के लिए है यह विशेष खबर, जानें फॉर्म में अब क्या बताना होगा जरूरी

आईटीआर दाखिल करने से चूकने वालों के लिए अब आयकर विभाग की ई-फाईलिंग वेबसाइट पर डाउनलोड करने के लिए यही फॉर्म उपलब्ध है.

ITR दाखिल करने वालों के लिए है यह विशेष खबर, जानें फॉर्म में अब क्या बताना होगा जरूरी
प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली: आयकर विभाग ने आयकर रिटर्न यानी ITR में नया प्रावधान किया है. आईटीआर के नए फॉर्म में अब आपको प्रोविडेंट फंड (PF) से रकम निकासी और उस पर टैक्स देनदारी से संबंधित जानकारी भी देनी होगी. अब आयकर विभाग की ई-फाईलिंग वेबसाइट पर डाउनलोड करने के लिए यही फॉर्म उपलब्ध है. जैसा कि आप जानते हैं इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करने की समय-सीमा 31 अगस्त 2018 को खत्म हो चुकी है. अगर आपने अब तक रिटर्न फाइल नहीं किया है तो आपके लिए यह खबर अच्छी नहीं है. 

आईटीआर-2 और आईटीआर-3 फॉर्म में हुए बदलाव
जो लोग छूट गए हैं, जाहिर तौर पर वह अब देरी से आईटीआर फाइल करेंगे. ऐसे में अब उन्हें इसी आईटीआर फॉर्म को भरकर रिटर्न दाखिल करना होगा. विभाग ने खासतौर पर केरल में आई बाढ़ के बाद वहां के लोगों के लिए आईटीआर दाखिल करने की समयसीमा 15 सिंतबर तक कर दी थी. विभाग ने आईटीआर-2 और आईटीआर-3 फॉर्म में ये बदलाव किए हैं. इस बदलाव के बाद इसका यह मतलब हुआ कि अगर आपने वित्तीय वर्ष 2017-18 में पीएफ से रकम निकाली है तो आपको आयकर रिटर्न में इसकी जानकारी देनी होगी कि इस रकम पर कर देनदारी बनती है या नहीं.

जुर्माना के साथ पीएफ की जानकारी देनी होगी
इस बार आयकर विभाग ने आईटीआऱ को लेकर खास सख्ती भी की थी. विभाग बार-बार करदाताओं को समयसीमा में आईटीआर दाखिल करने का संदेश मोबाइल मैसेज और अन्य माद्यमों से देता रहा. संदेश में यह भी बताया गया था कि समयसीमा की तारीख तक आईटीआर न दाखिल करने पर 5,000 रुपए का जु्र्माना देना होगा. ऐसे में अगर आप चूक गए हैं तो आपको आईटीआर में जुर्माने की रकम के साथ PF से जुड़ी जानकारी भी देनी है.

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एक्सपर्ट का है यह कहना
इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुकाबिक, टैक्समैन.कॉम के डीजीएम नवीन वाधवा कहते हैं कि आयकर कानून के हिसाब से अगर आपने नौकरी पांच साल पूरा होने से पहले ही पीएफ की रकम निकाली है तो आपको इस पर आयकर चुकाना पड़ता है. इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपने कितने नियोक्ताओं से राशि हासिल की है. 

इसी तरह, चार्टर्ड अकाउंटेंट सचिन वसुदेवा का कहना है कि आयकर कानून की धारा-4 के उप नियम-1 के सेक्शन 111 और नियम 9 के हिसाब से पांच साल लगातार सेवा के बिना पीएफ की रकम निकालने पर आपको टैक्स चुकाना पड़ सकता है. इसमें टैक्स की रकम की गणना हर साल के हिसाब से की जाएगी. पीएफ में अंशदान वाले हर साल में लागू टैक्स स्लैब के हिसाब से इस रकम और उसके ब्याज पर टैक्स देनदारी की गणना होगी.