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आम चुनाव के मद्देनजर Facebook राजनीतिक विज्ञापनों के नियम कड़े करेगा

कंपनी ने कहा है कि भारत में फेसबुक एक विज्ञापन लाइब्रेरी शुरू करेगा और आम चुनावों से पहले विज्ञापनों की पुष्टि का नियम लागू करेगा.

आम चुनाव के मद्देनजर Facebook राजनीतिक विज्ञापनों के नियम कड़े करेगा
कंपनी ने एक के बाद एक कई गड़बड़ियां और घोटाले सामने आने के बाद नियमों में सख्ती की बात की है. (फाइल)

नई दिल्ली: फेसबुक ने बुधवार को कहा कि वह भारत जैसे देशों में जहां आम चुनाव होने वाले हैं राजनीतिक विज्ञापनों के लिये नियम कड़े करेगा. कंपनी ने कहा है कि अमेरिका, ब्रिटेन और ब्राजील में राजनीतिक विज्ञापनों में पारदर्शिता लाने के उसके प्रयास पहले से ही चल रहे हैं. भारत में आम चुनाव अगले कुछ महीनों में होंगे. फेसबुक ने इस मामले में एक के बाद एक कई गड़बड़ियां और घोटाले सामने आने के बाद नियमों में सख्ती की बात की है.

सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक ने अपने विज्ञापन पृष्ठ पर डाली गई एक पोस्ट में कहा है, ‘‘इस साल दुनिया भर में कई जगह आम चुनावों की तैयारियां चल रही है. हम बाहरी हस्तक्षेप को रोकने पर लगातार ध्यान दे रहे हैं. हमारे प्लेटफार्म पर जो भी विज्ञापन होगा उसमें लोगों को अधिक सूचना दी जायेगी.’’कंपनी ने कहा है कि भारत में फेसबुक एक विज्ञापन लाइब्रेरी शुरू करेगा और आम चुनावों से पहले विज्ञापनों की पुष्टि का नियम लागू करेगा. चुनाव अप्रैल-मई तक हो सकते हैं. 

कंपनी का कहना है कि अमेरिका, ब्रिटेन और ब्राजील में राजनीतिक विज्ञापन देने वालों को विज्ञापन जारी होने से पहले अपनी पूरी पहचान और स्थान के बारे में पुष्टि अनिवार्य की गई है. इन विज्ञापनों को सात साल के लिए संग्रहित कर दिया जाता है जिसे कोई भी देख सकता है. 

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फेसबुक ने कहा है कि नाइजीरिया और उक्रेन में कोई भी विदेशी चुनावी विज्ञापन स्वीकार नहीं किया जायेगा. यूरोपीय संघ में मई में यूरोपीय संसद के लिये होने वाले चुनावों में कंपनी ‘‘पारदर्शिता उपाय’’ जारी करेगी. कंपनी ने कहा है कि जून के अंत तक इन उपायों को वह दुनियाभर के विज्ञापनदाताओं के लिये उपलब्ध करा देगी. 

फेसबुक ने पिछले साल इस बात को स्वीकार किया था कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिये काम करने वाले राजनीतिक क्षेत्र की कंपनी केंब्रिज एनालिटिका ने उसके लाखों उपयोगकर्ताओं से जुड़ी जानकारी को चुरा लिया था. ब्रिटेन में बेक्जिट मतदान की आलोचना करने वाले लोगों का भी कहना है कि कैंब्रिज एनालिटिका ने चुराये गये इन आंकड़ों को इस्तेमाल ‘‘ईयू को छोड़ने’’ की दिशा में मतदान करवाने के लिये भी किया. 

(इनपुट-भाषा)