सब्सिडी राशि समय पर नहीं मिलने से FCI को हजारों करोड़ का नुकसान: CAG

निगम की अनाज खरीद, वितरण और अन्य प्रशासनिक लागत इस दौरान 6,33,788 करोड़ रुपये रही. कैग के प्रधान निदेशक तथा आडिटर आशुतोष शर्मा ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘अगर सरकार उसी वित्त वर्ष में सब्सिडी की पूरी राशि का भुगतान कर देती, बाजार स्रोत से धन लेने की जरूरत नहीं होती तथा अतिरिक्त ब्याज की बचत हो सकती थी.

सब्सिडी राशि समय पर नहीं मिलने से FCI को हजारों करोड़ का नुकसान: CAG
एफसीआई ने 2011-16 के दौरान 4,45,809.59 करोड़ रुपये की सब्सिडी का दावा किया. (FILE PHOTO)

नई दिल्ली: भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को अगर सब्सिडी राशि समय पर दी जाती तो 2011-16 के दौरान 35,701.81 करोड़ रुपये ब्याज की बचत हो सकती थी. यह बात नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने कही है. कैग ने सुझाव दिया है कि निगम को सब्सिडी का पूरा आबंटन किया जाना चाहिए. आडिटर ने यह भी सुझाव दिया कि भारतीय खाद्य निगम को नकद कर्ज सीमा समाप्त होने से पहले अल्पकालीन कर्ज के उपयोग की अनुमति देने के लिये खाद्य मंत्रालय के जरिये समूह से संपर्क करना चाहिए.

कैग ने संसद में पेश ताजा रिपोर्ट में सुझाव दिया है कि एफसीआई को बांड जारी करने के लिये फिर से मंजूरी लेनी चाहिए ताकि उसके पास सस्ते कर्ज की पहुंच हो सके. रिपोर्ट के मुताबिक औसतन सरकार ने पिछले पांच साल में केवल 67 प्रतिशत सब्सिडी दावा जारी किया है. इसके कारण एफसीआई को अन्य महंगे स्रोत से कर्ज लेना पड़ा जिससे 2011-16 के दौरान ब्याज बोझ बढ़कर 35,701.81 करोड़ रुपये हो गया. एफसीआई ने 2011-16 के दौरान 4,45,809.59 करोड़ रुपये की सब्सिडी का दावा किया. इसमें से उसे मंत्रालय से 3,00,675.88 करोड़ रुपये मिले.

हालांकि निगम की अनाज खरीद, वितरण और अन्य प्रशासनिक लागत इस दौरान 6,33,788 करोड़ रुपये रही. कैग के प्रधान निदेशक तथा आडिटर आशुतोष शर्मा ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘अगर सरकार उसी वित्त वर्ष में सब्सिडी की पूरी राशि का भुगतान कर देती, बाजार स्रोत से धन लेने की जरूरत नहीं होती तथा अतिरिक्त ब्याज की बचत हो सकती थी.

(इनपुट एजेंसी से भी)

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