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करेंसी नोट और सिक्कों को लेकर FSSAI का अलर्ट, लेन-देन से पहले जरूर ध्यान दें

खाद्य नियामक एफएसएसएआई (FSSAI) ने करेंसी नोट और सिक्कों से बीमारी फैलने की बात मानते हुए स्ट्रीट वैंडर्स के लिए एक एडवाइजरी जारी की है.

करेंसी नोट और सिक्कों को लेकर FSSAI का अलर्ट, लेन-देन से पहले जरूर ध्यान दें
FSSAI का आदेशन नोट या सिक्के लेते वक्त हाथों में दस्ताने जरूर पहने.

नई दिल्ली: खाद्य नियामक एफएसएसएआई (FSSAI) ने करेंसी नोट और सिक्कों से बीमारी फैलने की बात मानते हुए स्ट्रीट वैंडर्स के लिए एक एडवाइजरी जारी की है. उसने कहा है कि खाने के सामान लेते या देते समय नोट सिक्के का लेन देन न करें और करना ही है तो हाथों में दस्ताने जरूर पहने. दरअसल, कुछ समय पहले ही खबर आई थी कि करेंसी नोट और सिक्कों पर बैक्टीरिया और वायरस पाए गए हैं. जिसके चलते इंफेक्शन फैल रहा है. इसी को देखते हुए FSSAI ने स्ट्रीट वेंडर्स को एडवाइजरी भेजी है. .

मिले थे खतरनाक वायरस
कुछ समय पहले नोट पर 70 फीसदी यूकेरियोटा यानी फफूंद और प्रोटोजोआ मिला था. इन नोटों पर 9 फीसदी बैक्टीरिया मिला था. एक फीसदी से कम वह वायरस मिला, जो जीव कोशिकाओं को नष्ट करता है. रिपोर्ट में पाया गया कि नोटों की पतली सतह पर यह वायरस आसानी से सेटल हो जाते हैं. पतली कागज पर चिपककर वह लंबे समय तक इस पर बने रह सकते हैं. जो इन्हें इस्तेमाल करने वालों के लिए खतरनाक है. डॉक्टरी भाषा में कहें तो इससे लोगों को जान तक का खतरा हो सकता है.

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FSSAI ने चलाया अभियान
खाद्य नियामक एफएसएसएआई कुछ समय से सड़क किनारे ठेले पर खाद्य पदार्थ बेचने वालों को स्वच्छता के तौर तरीके और सुरक्षा मानकों में सुधार के मकसद से उन्हें प्रशिक्षित कर रहा है. भारतीय खाद्य पदार्थों को प्रोत्साहित करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय स्ट्रीट वेंडर संघ (एनएएसपीआई) एफएसएसएआई की साझेदारी में यह अभियान चलाया जा रहा है. पिछले साल इसे लेकर FSSAI ने एक फूड फेस्ट का भी आयोजन किया था. 

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स्ट्रीट फूड के लिए हर शहर में सेफ जोन
स्ट्रीट फूड को सेफ बनाने के लिए विदेश की तर्ज पर हर शहर में स्ट्रीट फूड सेफ जोन बनाने की भी तैयारी है. इस जोन में मिलने वाली खाने-पीने की चीजों को फूड रेगुलेटर फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) द्वारा सेफ घोषित किया जाएगा. धीरे-धीरे सभी स्ट्रीट वेंडर्स को इसके दायरे में लाया जाएगा. 

स्ट्रीट फूड को रेगुलेट करने की योजना
हेल्थ मिनिस्ट्री के एक वरिष्‍ठ अधिकारी के मुताबिक, फूड रेगुलेटर इस योजना के लिए के लिए स्टेट फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन, मिनिस्ट्री ऑफ स्किल डेवलपमेंट एंड आंत्रप्रेन्योरशिप और नेशनल एसोसिएशन ऑफ स्ट्रीट वेंडर्स ऑफ इंडिया के साथ मिलकर काम करेगा. उन्होंने बताया कि कुछ दिनों पहले स्ट्रीट फूड को रेगुलेट करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन उस पर काम शुरू नहीं हो पाया. अब योजना के तहत देश के सभी शहरों को कवर किया जाएगा.
 
कैसे काम करेगी यह योजना

  • - शहरों में स्टेट फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के साथ मिलकर हर स्ट्रीट वेंडर पर फोकस किया जाएगा.
  • - मिनिस्ट्री ऑफ स्किल डेवलपमेंट एंड आंत्रप्रेन्योरशिप द्वारा उन्हें ट्रेनिंग दी जाएगी कि वे कैसे अपनी चीजों को हाइजेनिक रख सकते हैं.
  • - इस काम में नेशनल एसोसिएशन ऑफ स्ट्रीट वेंडर्स ऑफ इंडिया की मदद भी ली जाएगी.
  • - शहर में कुछ जगह चुने जाएंगे, जहां सर्टिफाइड वेंडर्स को दुकान लगाने की अनुमति मिलेगी.
  • - सेफ जोन में भी समय-समय पर सेफ्टी व क्वालिटी की जांच की जाएगी.
  • - योजना के अनुसार धीरे-धीरे सेफ जोन बढ़ाकर सभी स्ट्रीट वेंडर्स को इसके दायरे में लाया जाएगा.
  • - योजना की शुरुआत दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, कोलकाता, अहमदाबाद, पटना, लखनऊ, वाराणसी, चेन्नई, बेंगलुरु, त्रिवेंद्रम जैसे शहरों से होनी है.

स्ट्रीट फूड की पॉपुलैरिटी देखकर बनी योजना
इंडिया में स्ट्रीट फूड मसलन चाट, समोसे, गोलगप्पे, चाइनीज फूड, मोमोज आदि को बेहद पसंद किया जाता है. रोड साइड मिलने वाली ये चीजें लोगों को पसंद आती हैं और इनके रेट भी होटल या रेस्टोरेंट के मुकाबले कम होते हैं. लेकिन चिंता वाली बात यह होती है कि बहुत से वेंडर हाइजीन का ध्‍यान नहीं रखते और यह हेल्थ के लिहाज से सेफ नहीं होते हैं. यही परेशानी देखते हुए स्ट्रीट फूड को रेगुलेट करने की योजना तैयार की गई है.
 
विज्ञापनों पर भी होगी नजर
एफएसएसआई अब उन विज्ञापनों पर नजर रखेगी, जिसमें किसी फूड प्रोडक्ट के इनग्रेडिएंट के बारे में दावा किया जाता है. ऐसे दावों की जांच के लिए प्रोडक्ट को लैब में चेक किया जाएगा. अगर दावा गलत पाया तो एडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड काउंसिल ऑफ इंडिया में शिकायत की जाएगी.