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6 सालों में सबसे महंगा हुआ सोना, निवेश कर होंगे मालामाल, 5 प्वाइंट्स में समझें खेल

2019 में अब तक सोना के भाव में 20 फीसदी का उछाल आया है. आने वाले दिनों में यह और महंगा होने वाला है.

6 सालों में सबसे महंगा हुआ सोना, निवेश कर होंगे मालामाल, 5 प्वाइंट्स में समझें खेल
फाइल फोटो.

नई दिल्ली: सोने-चांदी का भाव आसमान छू रहा है. मंगलवार को दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना 50 रुपए चमक कर 38470 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ. ट्रेड वार की वजह से सोने की तरफ निवेशकों रुझान बढ़ा है. इसलिए, कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं. एक अगस्त को 10 ग्राम सोने की कीमत 35710 रुपये थी. पिछले दो हफ्ते में कीमत में करीब 2700 रुपये का उछाल आया है. 31 दिसंबर 2018 को 10 ग्राम सोने की कीमत दिल्ली में 32680 रुपये थी. इस तरह इस साल में अब तक रेट में करीब 20 फीसदी का उछाल आया है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, मंगलवार को सोने की कीमत 6 सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई. आने वाले दिनों में इसमें तेजी की संभावना बनी हुई है. इसलिए, वर्तमान में सोने में निवेश करना हर लिहाज से फायदेमंद होगा. इससे संबंधित कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने की कोशिश करते हैं.

1. भारत सोने का बहुत बड़ा आयातक है. यह अपनी जरूरत का ज्यादा हिस्सा आयात करता है. लेकिन, बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इंपोर्ट टैक्स 10 फीसदी से बढ़ा कर 12.5 फीसदी कर दिया. इसकी वजह से रेट पर सीधा असर दिखाई दिया.

2. अगर किसी देश का सेंट्रल बैंक रेट कट करता है तो सोने की कीमत में उछाल आता है. भारतीय रिजर्व बैंक इस साल में अब तक चार बार रेट कट कर चुका है. आने वाले दिनों में और रेट कट की संभावना है. इसलिए, सोने की कीमत में उछाल आएगा. बता दें, डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर हो रहा है. रुपया जितना कमजोर होगा, भारत में सोना उतना महंगा होगा.

3. बजट में सुपर रीच लोगों पर सरचार्ज बढ़ाने, जिसमें FPI भी शामिल होते हैं, का नकारात्मक असर दिखाई दिया. FPI ने हजारों करोड़ मार्केट से निकाल लिया. बजट से ठीक पहले यानी 4 जुलाई को सेंसेक्स 39908 अंकों पर था. लेकिन, आज सुबह (9.25 बजे) यह 37430 पर ट्रेड कर रहा है. मतलब, पिछले 6 हफ्तों में सेंसेक्स में करीब 2480 अंकों की गिरावट आई है. निवेशकों के लाखों करोड़ डूब चुके हैं. इसलिए, वित्त मंत्रालय की तरफ से कहा गया कि सुपर रीच लोगों पर बढ़ाये गए सरचार्ज को वापस लिया जाएगा. निवेशक शेयर मार्केट से पैसा निकाल कर गोल्ड में इंवेस्ट कर रहे हैं क्योंकि यह सुरक्षित निवेश माना जाता है.

4. अमेरिकी और चीन के बीच जारी ट्रेड वार को लेकर आने वाले दिनों में भी सकारात्मक बातचीत की संभावना नहीं लग रही है. ट्रंप के हालिया बयान से सितंबर में आयोजित ट्रेड टॉक के भी टलने की संभावना है. उन्होंने तो चीन से आयातित सामान पर और ज्यादा टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. मतलब, विश्व की अर्थव्यवस्था में मदी बनी रहेगी. मंदी का असर ये है कि चीन का ग्रोथ रेट घटा है. अमेरिकी फेडरल ने रेपो रेट घटाया है. आने वाले दिनों में और घटाने का दबाव भी है. इसके अलावा विश्व के अन्य देशों के सेंट्रल बैंक भी रेट कट कर रहे हैं. ऐसे में जितना रेट कट होगा, सोने की कीमत बढ़ती जाएगी.

5. इस तरह निवेशकों को यह लग रहा है कि विश्वभर की अर्थव्यवस्था में मंदी छाई है. अमेरिका-चीन के बीच जारी ट्रेड वार अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव (जो 2020 के अंत में प्रस्तावित है) तक बना रहेगा. ब्रेग्जिट की वजह से इंग्लैंड का ग्रोथ रेट भी कम हुआ है. कई और यूरोपियन इकोनॉमी मंदी की चपेट में हैं. इसलिए, सुरक्षित निवेश ( जैसा कि गोल्ड) जरूरी है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, कई देश के सेंट्रल बैंक भी गोल्ड खरीद रहे हैं. मांग जैसे-जैसे बढ़ रही है, कीमत बढ़ती जा रही है.