खुदरा कारोबार करने वाली बड़ी कंपनियों पर भी नजर रखे सरकार: कैट

दालों के आसमान छूते भाव के बीच व्यापारियों की अखिल भारतीय संस्था ‘कन्फैडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट)’ ने दालों के मौजूदा संकट के लिये बड़ी खुदरा कंपनियों को जिम्मेदार ठहराते हुये सरकार से खुदरा श्रंखला चलाने वाली कंपनियों पर भी नजर रखने का अनुरोध किया है।

नयी दिल्ली : दालों के आसमान छूते भाव के बीच व्यापारियों की अखिल भारतीय संस्था ‘कन्फैडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट)’ ने दालों के मौजूदा संकट के लिये बड़ी खुदरा कंपनियों को जिम्मेदार ठहराते हुये सरकार से खुदरा श्रंखला चलाने वाली कंपनियों पर भी नजर रखने का अनुरोध किया है।

कैट ने कहा है कि दालों की जमाखोरी के मामले में देशभर में व्यापारियों को निशाना बनाया जा रहा है जबकि खुदरा कारोबार करने वाली बड़ी कंपनियों को इस मामले में नजरंदाज किया जा रहा है। ये कंपनियां खुदरा कारोबार करने के साथ साथ दालों की आयातक भी हैं। कैट ने इन कंपनियों की जमाखोरी की भी जांच करने के लिये केन्द्रीय वित्त मंत्री अरण जेटली को पत्र लिखा है।

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भरतिया और राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन खंडेलवाल ने हाल के दिनों में दाल की आसमान छूती कीमतों पर गहरी चिंता व्यक्त की है और इस संबंध में सरकार द्वारा उठाये गये कदमों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि सरकार को खुदरा कारोबार की बड़ी श्रंखलायें चलाने वाली कंपनियों के स्टॉक की भी जांच करनी चाहिये।

कैट ने यह भी कहा है कि स्टॉक सीमा जो लगाई गई है वह शहरों की जनसंख्या और खपत के अनुरूप होनी चाहिये। जैसे कि ए श्रेणी के शहर के लिये 3,500 क्विंटल, बी. श्रेणी के लिये 2,000 क्विंटल, सी श्रेणी के लिये 1,500 क्विंटल और डी. श्रेणी के शहरों के लिये 1,000 क्विंटल होनी चाहिये ताकि हर शहर में दालों की उपयुक्त मात्रा में उपलब्धता बनी रहे।

खंडेलवाल ने कहा कि इस साल देश में दाल की फसल कम होने की वजह से दाम बढ़े हैं। उल्लेखनीय है कि खुदरा बाजार में अरहर दाल के भाव 200 रपये किलो से भी उपर निकल गये थे। भारत अपनी खपत की 40 प्रतिशत पूर्ति के लिये दालों का आयात करता है।