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सरकार कालाधन पर अंकुश लगाने के लिए टैक्स संधियों पर कर रही है फिर से बातचीत

अवैध धन के प्रवाह को रोकने के लिए कई देशों के साथ द्विपक्षीय कर संधियों पर फिर से बातचीत कर रही है ताकि कर छूट का लाभ केवल सही निवेशकों को मिले और भारत से धन को कर चोरों की पनाहगाह माने जाने वाले देशों में पहुंचाने से रोका जा सके।

सरकार कालाधन पर अंकुश लगाने के लिए टैक्स संधियों पर कर रही है फिर से बातचीत

नई दिल्ली : अवैध धन के प्रवाह को रोकने के लिए कई देशों के साथ द्विपक्षीय कर संधियों पर फिर से बातचीत कर रही है ताकि कर छूट का लाभ केवल सही निवेशकों को मिले और भारत से धन को कर चोरों की पनाहगाह माने जाने वाले देशों में पहुंचाने से रोका जा सके।

राजस्व सचिव शक्तिकांत दास ने आज कहा कि सरकार लाभों को सीमित करने के मुद्दे को लेकर कई कर संधियों पर फिर से बातचीत कर रही है। साथ ही उन्होंने कहा देश के अंदर कालाधन विदेशों में जमा देश के कालेधन से कम नहीं है। उन्होंने कहा, क्योंकि अगर कर पनाहगाह है और कर पनाहगाह के जरिए धन आ रहा है तो हमें लाभ सीमित करने की पूरी धारणा पर काम करना होगा। दास ने कहा, मुझे लगता है कि काले धन की मात्रा के बारे में किसी कि पास कोई अनुमान नहीं है। लेकिन मैं कह सकता हूं कि घरेलू काला धन की मात्रा विदेशों में रखे गये काले धन से कम नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है जब उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने एचएसबीसी बैंक की स्विस शाखा में भारतीयों द्वारा करीब 4,479 करोड़ रुपए रखे जाने का पता लगाया है। वहीं देश में बिना हिसाब वाले 14,958 करोड़ रुपए का पता लगाया गया है। एसआईटी ने काले धन की समस्या को रोकने के लिए कई सुझाव दिए हैं। इसमें विभिन्न देशों के साथ भारत की कर संधि पर फिर से बातचीत किए जाने का सुझाव शामिल है।

राजस्व सचिव दास ने कहा, हम पूंजी लाभ के मुद्दे से जुड़ी कई कर संधियों पर फिर से बातचीत कर रहे हैं। हम हानिकारक कर व्यवहार के मुद्दे से निपट रहे हैं और हम बीईपीएस (कराधार का क्षरण और लाभ को अन्यत्र देश में दर्शाना) से भी निपट रहे हैं और ऐसी व्यवस्था करने का लक्ष्य है जिसमें उस करक्षेत्र को समुचित मान्यता मिले जहां आर्थिक गतिविधियां सम्पन्न हुई हों।

उन्होंने कहा, अन्य शब्दों में अगर हम एमएनसी (बहुराष्ट्रीय कंपनियों) से निपट रहे हैं..जो कर पनाहगाह वाले देशों या अमेरिका में स्थित हों और उनका कारोबार भारत, चीन या अन्य कहीं हो तो कर भारत और चीन जैसे देशों में चुकाया जाए जहां उन कंपनियों की आर्थिक गतिविधियां हो रही हैं। उद्योग मंडल सीआईआई के एक कार्यक्रम में दास ने यह भी कहा कि सरकार नरम, नियानुसार, पूर्वग्रह मुक्त तथा निवेशक अनुकूल कर व्यवस्था लाने को प्रतिबद्ध है जो ‘मेक इन इंडिया’ पहल को जमीन पर उतारने में मददगार होगा और देश में कारोबार करने को आसान बनाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड तथा केंद्रीय उत्पाद और सीमा शुल्क बोर्ड ने हाल ही में परिपत्र जारी किया है जो प्रतिकूल नहीं है। साथ ही कर प्रशासन सुधार आयोग (टीएआरसी) की सिफारिशों की व्यवहार्यता का मूल्यांकन करने के लिये समितियां गठित की है।

शक्तिकांत दास ने कहा, राजस्व विभाग अपनी कार्य संस्कृति में बदलाव लाने के लिए पूरी तरह खुला हुआ है। साथ ही विभाग कर प्रशासन को प्रभावी बनाने, औसत दर वाले कर ढांचे के साथ कारोबार करने को आसान बनाने के लिए को पूरी तरह तैयार है। राजस्व सचिव ने कहा कि कर संबंधी कानूनी विवादों को कम करने के लिये विभाग पूर्णकालिक और समर्पित विवाद निपटान आयोग गठित करने का प्रस्ताव किया है जिसकी जिम्मेदारी प्रशिक्षित अधिकारियों के हाथों में होगी। उन्होंने कहा कि मंत्रालय केंद्र सरकार द्वारा दिए जा रहे कर छूटों पर नजर रखने के लिये एक अलग प्रकोष्ठ बनाएगा। राजस्व विभाग एनजीओ और संस्थानों को 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक कर छूट दे रहा है।