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इस तरीके से सरकार ने बचाए 1.1 लाख करोड़, UBI के लिए डेटा बेहद अहम

सरकार ने करीब 8 करोड़ फर्जी लाभार्थियों को सूची से हटाया है.

सरकार हर साल करीब 20 हजार करोड़ रुपये की बचत कर रही है. (फाइल)
सरकार हर साल करीब 20 हजार करोड़ रुपये की बचत कर रही है. (फाइल)

नई दिल्ली: मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) में बड़ा बदलाव किया है. पहले किसानों, गरीबों और अन्य लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं का लाभ सब्सिडी के तौर पर मिलता था. लेकिन, आरोप लगते रहे कि इसके तहत लाभार्थियों को योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाता है.  लेकिन, मोदी सरकार ने PDS सिस्टम में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) का फैसला किया. सभी लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ उनके बैंक अकाउंट में मिलने लगे. इससे भ्रष्टाचार कम हो गया और सरकार का भी फायदा हुआ.

एक रिपोर्ट के मुताबिक,  31 दिसंबर 2018 तक DBT की वजह से सरकार का करीब 1.1 लाख करोड़ रुपये बचा है. इस दौरान सरकार ने करीब 8 करोड़ फर्जी लाभार्थियों को सूची से हटाया. बता दें, वर्तमान में सभी सरकारी योजनाओं का लाभ आपके बैंक अकाउंट में डायरेक्ट ट्रांसफर के जरिए मिलता है. हर योजना का लाभ पाने के लिए इसे आधार से जोड़ा गया है. Aadhaar की मदद से फर्जी लाभार्थियों की पहचान हुई और उन्हें लिस्ट से हटाया गया.

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इस रिपोर्ट से एकबात साफ होती है कि वर्तमान में सरकार के पास जो डेटा है वह अपडेटेड है. इसमें फर्जीवाड़े की बहुत कम गुंजाइश रह गई है. दूसरी तरफ सरकार यूनिवर्सल बेसिक इनकम (UBI) को लागू करने के बारे में सोच रही है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर इसे लागू किया जाता है तो इसका लाभ DBT के जरिए लाभार्थियों के अकाउंट में भेजे जाएंगे.

पुराने रिकॉर्ड को खंगालने से पता चलता है कि 31 मार्च 2018 तक DBT के चलते सरकार के 90 हजार करोड़ रुपये बचे थे.  इस तरह सरकार हर साल करीब 20 हजार करोड़ रुपये की बचत कर रही है.

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