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सरकारी कंपनियों ने दलितों के साथ की वादाखिलाफी, वादा करके नहीं खरीदे सामान

समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार 2017-18 में सेंट्रल पीएसयू ने एससी और एसटी उद्यमों से 543.86 करोड़ रुपये का सामान एवं सेवाएं खरीदीं, जबकि उनकी कुल खरीद 1,16,837 करोड़ रुपये थी.

सरकारी कंपनियों ने दलितों के साथ की वादाखिलाफी, वादा करके नहीं खरीदे सामान
प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली: दलित उद्योगपतियों के लिए सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का कोई खास नतीजा निकलता नहीं दिख रहा है. सरकार की योजना थी कि सेंट्रल पीएसयू दलितों द्वारा शुरू किए गए उद्यमों से कम से कम चार प्रतिशत खरीदारी करें, लेकिन पिछले छह वर्षों में इसमें कोई खास कामयाबी नहीं मिल सकी है. 

समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार 2017-18 में सेंट्रल पीएसयू ने एससी और एसटी उद्यमों से 543.86 करोड़ रुपये का सामान एवं सेवाएं खरीदीं, जबकि उनकी कुल खरीद 1,16,837 करोड़ रुपये थी. इस तरह कुल खरीद में दलित उद्यमों की हिस्सेदारी महज 0.46 प्रतिशत थी. पांच साल पहले 2012-13 में दलित उद्यमों ने 419.93 करोड़ की बिक्री सरकारी उद्यमों को की थी. 

यूपीए सरकार ने 2012 में 'लघु एवं सूक्ष्म उद्यमों के लिए सार्वजनिक खरीद आर्डर' जारी किया था, जिसके अनुसार सेंट्रल पीएसयू के लिए 20 प्रतिशत खरीद छोटे और लघु उद्योगों के करनी जरूरी थी. इससे तहत ही ये प्रावधान किया गया था कि चार प्रतिशत खरीददारी दलित उद्यमों से करनी होगी. सरकार ने 2015 में 20 प्रतिशत खरीद के इस प्रावधान को अनिवार्य कर दिया था. यदि कोई पीएसयू ऐसा नहीं कर पाता है तो उसे रिब्यू कमेटी के समाने बताना पड़ता था कि आखिर वो ऐसा क्यों नहीं कर सकी. 
 
सूक्ष्म, लघु और मध्यम एंटरप्राइज के विकास आयुक्त के कार्यालय से आरटीआई के जरिए मिली जानकारी के अनुसार एनडीए सरकार के पहले साल यानी 2014-15 में दलिता उद्यमों द्वारा की जाने वाली खरीद में तेजी से गिरावट आई. हालांकि इसके बाद इसमें तेजी देखने को मिली. सेंट्रल पीएसयू कंपनियां एमएसएमई से कुल 23 प्रतिशत खरीद करती हैं, जबकि इसमें एससी और एसटी एमएसएमई की हिस्सेदारी 0.5 प्रतिशत है. 

एमएसएमई मंत्रालय द्वारा मिली जानकारी के अनुसार 2017-18 में 330 पीएसयू में से सिर्फ एक तिहाई ने ही अपनी खरीद के आंकड़ों को सार्वजनिक किया. सरकार की खरीद नीति से 2017-18 में कुल 86,671 एमएसएमई को फायदा मिला. इनमें से सिर्फ 2,235 ही वंचित समुदायों से हैं. एससी और एसटी उद्यमों से खरीदारी करने वाली कंपनियों में बीईएल, भेल, बीपीसीएल और एचपीसीएल प्रमुख हैं.