किसानों को राहत दे सकती है मोदी सरकार, चीनी मिलों को भी मिलेगा बड़ा फायदा

गन्ना किसानों को राहत देने के लिए सरकार प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड का इस्तेमाल कर सकती है. इसके लिए कंज्यूमर ऑफेयर मंत्रालय ने प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड कमेटी को प्रस्ताव भेजा है.

किसानों को राहत दे सकती है मोदी सरकार, चीनी मिलों को भी मिलेगा बड़ा फायदा
सरकार ने इस बीच चीनी क्षेत्र को बड़ी राहत दी है. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: गन्ना किसानों को राहत देने के लिए सरकार प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड का इस्तेमाल कर सकती है. इसके लिए कंज्यूमर ऑफेयर मंत्रालय ने प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड कमेटी को प्रस्ताव भेजा है. मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, चीनी के रिकार्ड उत्पादन के चलते चीनी मिलों का किसानों पर बकाया 14,000 करोड़ रुपये पहुंच गया है. जिसके तहत राज्यों को चीनी पर मिलने वाली सब्सिडी बढ़ सकती है और ज्यादा खरीदे जाने पर राज्य राशन में चीनी बांट सकते हैं.

बढ़ सकती है किसानों की बकाये की रकम
बता दें कि चीनी के रिकार्ड उत्पादन से इसकी कीमतें गिरी हैं. जनवरी तक चीनी मिलों का किसानों पर 14,000 करोड़ रुपए बकाया था जो मार्च तक बढ़कर 20 हजार करोड़ रुपए हो सकता है. ऐसे में सरकार एक ही झटके में दोहरा फायदा पहुंचाने की कोशिश कर रही है.

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शुगर सेक्टर को भी फायदा
सरकार ने इस बीच चीनी क्षेत्र को बड़ी राहत दी है. सरकार ने चीनी के एक्सपोर्ट पर लगने वाली 20 फीसदी की एक्सपोर्ट ड्यूटी खत्म कर दी है. इस संबंध में एक नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है. सरकार ने कहा कि ड्यूटी खत्म होने से सरकार को मौजूदा एक्सपोर्ट वॉल्यूम पर सालाना 75 करोड़ रुपए का नुकसान होगा.

सेक्टर ने की थी मांग
शुगर सेक्टर ने घरेलू सप्लाई को थामने और इस सीजन रिकॉर्ड आउटपुट को देखते हुए कीमतों को सही लेवल पर बनाए रखने में मदद करने के लिए ड्यूटी हटाने की मांग की थी. चीनी पर एक्सपोर्ट ड्यूटी को हटाने की मांग को लेकर खाद्य मंत्रालय ने दो बार अपनी सिफारिश वित्त मंत्रालय को भेजी थी.

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चीनी मिलों ने भी की थी मांग
चीनी मिलों के ऑर्गनाइजेशन ने भी सरकार से एक्सपोर्ट ड्यूटी हटाने का अनुरोध किया था. केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने कुछ दिन पहले कहा था कि रिकॉर्ड प्रोडक्शन को देखते हुए उन्होंने फरवरी में चीनी का निर्यात शुल्क घटाने की अपनी सिफारिश वित्त मंत्रालय को भेजी है.

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किसानों का बकाया हुआ 20 हजार करोड़ रु
इस्मा ने कहा कि चीनी का स्टॉक बढ़ने से घरेलू बाजार में इसकी कीमत घटकर काफी कम हो गई है जिससे मिलों का घाटा लगातार बढ़ रहा है। इस्मा के मुताबिक, जनवरी तक गन्ने की बकाया राशि बढ़कर 14,000 करोड़ रुपए थी जो इस महीने के अंत तक बढ़कर 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक हो सकती है।