'नोटबंदी के बाद बिटकॉइन की मांग में उछाल, सावधान रहे सरकार'

अश्विनी महाजन ने कहा कि सरकार को कालेधन को भारत से बाहर भेजने में प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के रास्तों पर विचार करना चाहिए था.

'नोटबंदी के बाद बिटकॉइन की मांग में उछाल, सावधान रहे सरकार'
हाल ही में आभासी मुद्रा बिटकॉइन की मांग में जबरदस्त उछाल आया है. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: स्वदेशी जागरण मंच के सह समन्वयक अश्विनी महाजन ने शनिवार (27 जनवरी) को कहा कि सरकार को नोटबंदी के बाद ​आभासी मुद्रा बिटकॉइन की मांग में आए उछाल के प्रति सतर्क रहना चाहिए था. इसके साथ ही महाजन ने देश में कालेधन के आकार व मात्रा को लेकर अब तक कोई अनुमान न लगाए जाने को लेकर भी निराशा व्यक्त की है. वह यहां किताब ‘ऑन द ट्रॉयल ऑफ द ब्लैक’ के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. इस किताब का संपादन प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन बिबेक देबराय व उनके विशेष अधिकारी ओएसडी किशोर देसाई ने किया है. महाजन ने कहा कि एफएसएसएआई जैसे नियामकों सहित विभिन्न संस्थानों में हितों का टकराव बना हुआ है. उन्होंने कहा कि सरकार को कालेधन को भारत से बाहर भेजने में प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के रास्तों पर विचार करना चाहिए था.

कार्यक्रम में गृह मंत्री राजनाथ सिंह व नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत भी मौजूद थे. महाजन ने कहा, आज तक भारत में कालेधन के आकार व मात्रा के बारे मे कोई नहीं जानता. हमें प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करना चाहिए. इसके दुरुपयोग से कालेधन को देश के बाहर भेजा जा रहा है. हमें उसके प्रति सतर्क रहना चाहिए. उन्होंने कहा, हमें इसको लेकर भी सतर्क हो जाना चहिए था कि नोटबंदी के बाद बिटकॉइन की मांग 25 प्रतिशत बढ़ गयी थी. हमें इसे भांप लेना चाहिए था, लेकिन उसे नहीं देख पाए.

नीति आयोग के CEO ने कहा, अमिताभ कांत डीबीटी से 65000 करोड़ रुपए की बचत हुई

वहीं दूसरी ओर नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने यहां एक किताब विमोचन समारोह के दौरान कहा कि सरकार की विभिन्न योजना का लाभ सीधे लाभार्थियों के खाते में हस्तांतरित करने से सरकार को करीब 65 हजार करोड़ रुपए की बचत हुई है. बिबेक देबरॉय और किशोर अरुण देसाई द्वारा संपादित पुस्तक 'ऑन द ट्रेल ऑफ द ब्लैक' के विमोचन के अवसर पर अभिताभ कांत ने कहा, "सरकार की सभी योजनाओं को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) से जोड़ देना चाहिए, अन्यथा भ्रष्टाचार को समाप्त नहीं किया जा सकता है. वर्तमान में करीब 300 स्कीमों में डीबीटी को अमल में लाया गया है. जिससे तकरीबन 41 करोड़ लोग लाभान्वित हुए हैं."

सरकार ने 1200 पुराने कानून को समाप्त किया
देश में कारोबारी सुगमता यानी इज ऑफ डूइंग बिजनेस के मसले पर कांत ने कहा कि सरकार ने लगभग 1,200 पुराने कानून को समाप्त कर दिए हैं, जो प्रासंगिक नहीं थे. उन्होंने कहा कि व्यवसाय की प्रक्रियाओं को और सरलीकृत करने की जरूरत है. मसलन, सरकारी फॉर्मो को कम करके एक पृष्ठ का बनाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, "कोई भी फॉर्म एक पृष्ठ से ज्यादा का नहीं हो और कोई नियम भी दो पृष्ठों से ज्यादा का नहीं हो. साथ ही कोई कानून तीन पृष्ठ से अधिक का नहीं हो."

(इनपुट एजेंसी से भी)

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