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रिजर्व बैंक गवर्नर के अधिकारों में कटौती से पीछे हटी मोदी सरकार

रिजर्व बैंक के गवर्नर के नीतिगत ब्याज दर पर वीटो अधिकारों में कटौती का दांव उलटा पड़ने के बाद आज सरकार ने कहा कि अभी केंद्रीय बैंक के गवर्नर के अधिकार में कटौती पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। वित्तीय क्षेत्र विधायी सुधार आयोग (एफएसएलआरसी) ने कहा है कि केंद्रीय बैंक के गवर्नर के अधिकारों में कटौती का मसौदा उसका नहीं है। इसके बाद वित्त सचिव राजीव महर्षि ने जल्दबाजी में बुलाए गए संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह मसौदा न तो वित्तीय क्षेत्र विधायी सुधार आयोग का है और न ही सरकार का, बल्कि देश के लोग इस मसौदा रिपोर्ट के मालिक हैं।

रिजर्व बैंक गवर्नर के अधिकारों में कटौती से पीछे हटी मोदी सरकार

नयी दिल्ली : रिजर्व बैंक के गवर्नर के नीतिगत ब्याज दर पर वीटो अधिकारों में कटौती का दांव उलटा पड़ने के बाद आज सरकार ने कहा कि अभी केंद्रीय बैंक के गवर्नर के अधिकार में कटौती पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। वित्तीय क्षेत्र विधायी सुधार आयोग (एफएसएलआरसी) ने कहा है कि केंद्रीय बैंक के गवर्नर के अधिकारों में कटौती का मसौदा उसका नहीं है। इसके बाद वित्त सचिव राजीव महर्षि ने जल्दबाजी में बुलाए गए संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह मसौदा न तो वित्तीय क्षेत्र विधायी सुधार आयोग का है और न ही सरकार का, बल्कि देश के लोग इस मसौदा रिपोर्ट के मालिक हैं।

महर्षि के यह कह कर कि यह एफएसएलआरसी का प्रस्ताव नहीं है, मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) के दावे का खंडन किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह सरकार की ओर से उठाया गया कदम भी नहीं है। संशोधित मसौदे में इस प्रस्ताव का कुछ अर्थशास्त्रियों के अलावा मूडीज एनालिटिक्स ने यह कहते हुए हमला बोला था कि यह मौद्रिक नीति की आजादी के लिए खतरा है। उन्होंने इस विवाद को समाप्त करने का प्रयास करते हुए कहा कि भारत के लोग इस रिपोर्ट के मसौदे के मालिक हैं। भारतीय वित्तीय संहिता (आईएफसी) के संशोधित मसौदे में नीतिगत ब्याज दर तय करने के लिए रिजर्व बैंक के गवर्नर के वीटो के अधिकार को वापस लेने का प्रस्ताव है जिसको लेकर बहस छिड़ गयी है।

महर्षि ने कहा कि सरकार ने अभी तक आईएफसी के मसौदे पर अपना विचार नहीं बनाया हैं उन्होंने कहा कि सरकार इस पर टिप्पणियां ले रही है जो इस बात का संकेत है कि यह अभी विचार विमर्श के चरण में है। उन्होंने कहा, यह अभी सरकार के लिए एक परिचर्चा पत्र मात्र है। इसलिए इससे यह निष्कर्ष निकालना गलत होगा कि सरकार ने आरबीआई के अधिकार में कुछ कटौती कर दी गयी है या ऐसा करने का फैसला कर लिया है।’ महर्षि इसी महीने सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और रिजर्व बैंक में मौद्रिक नीति समिति :एमपीसी: पर सहमति बन गई और इसका खुलासा संसद में किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि हमारी इस बारे में रिजर्व बैंक गवर्नर से बातचीत चल रही है। यह पूछे जाने पर क्या सरकार ने एमपीसी में 4:3 अनुपात में सरकार के पक्ष में सदस्यों पर अपने विचारों को अंतिम रूप दे दिया है, उन्होंने कहा कि सरकार ने अभी यह तय नहीं किया है कि अंतिम रूप से यह कैसा होगा। मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणियन ने इससे पहले कहा था कि आईएफसी का संशोधित मसौदा वित्तीय क्षेत्र विधायी सुधार आयोग (एफएसएलआरसी) की रिपोर्ट पर आधारित है। आयोग के सदस्य रहे एक गोविंद राव सुब्रमणियन के इस बयान का खंडन कर चुके है।

महर्षि ने नए विधेयक के मसौदे को आईएफसी 1.1 कहा। उन्होंने कहा कि संशोधित विधेयक वित्त मंत्रालय की वेबसाइट पर डाला गया है और इसमें यह नहीं कहा गया है कि इसके लिए वित्तीय क्षेत्र विधायी सुधार आयोग (एफएसएलआरसी) ने सिफारिश की है। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति श्रीकृष्ण की अगुवाई वाली समिति के गठन के साथ सबसे कुछ सार्वजनिक है। इसलिए यह कहना उचित नहीं है कि यह किसकी सिफारिश है। सब सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है।

महर्षि ने कहा, यदि आप वेबसाइट देखें, तो इसमें साफ कहा गया है कि कुछ बदलाव किए गए है। इसमें यह नहीं कहा गया है कि इसके लिए एफएसएलआरसी ने सिफारिश की है। भारत के लोग इस विधेयक के मालिक हैं क्योंकि यह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। भारतीय वित्तीय संहिता (आईएफसी) के संशोधित मसौदे में कहा गया है कि किसी प्रकार का मौद्रिक फैसला सात सदस्यीय समिति द्वारा बहुमत के आधार पर किया जाएगा और इसमें गवर्नर को वीटो अधिकार नहीं होगा। इसको लेकर काफी बहस छिड़ी है और इसे केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता में कटौती के कदम के रूप में देखा जा रहा है।