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Yes Bank डूबने की दर्दनाक कहानी, सुनिए शेयर बाजार की जुबानी

आरबीआई के हस्तक्षेप का सबसे बड़ा कारण यही रहा. 

Yes Bank डूबने की दर्दनाक कहानी, सुनिए शेयर बाजार की जुबानी
फाइल फोटो

नई दिल्ली: आपके मन से एक सवाल पिछले 24 घंटे से चल रहा होगा. आखिर आज ही रिजर्व बैंक(RBI) ने क्यों यस बैंक (Yes Bank) के कामकाज पर रोक लगाई? अगर आप आर्थिक खबरों की थोड़ी भी जानकारी रखते हैं तो यस बैंक बंद होने की सुगबुगाहट पिछले कई महीनों से चल रही है. अब सवाल वहीं खड़ा है कि आखिर ऐसा क्या हुआ पिछले दिनों कि रिजर्व बैंक को आनन फानन में यस बैंक पर गाज गिरानी पड़ी. हमसे जानिए बेहद आसान भाषा में बैंक पर रोक की मुख्य वजह...

शेयर बाजार सबसे आखिरी वजह
जानकारों का कहना है कि यस बैंक शुरुआती दिनों में काफी तेजी से बाजार में उभरा. लेकिन बैंक में ताला लगने की संभावना शेयर बाजार में स्टॉक गिरने से शुरू हुआ. 2008 में यस बैंक शेयर बाजार में काफी मजबूती के साथ खड़ा था. यस बैंक के लिए दो साल पहले 10 अगस्त, 2018 काफी अहम है. ये वही दिन है जब बैंक के एक शेयर की कीमत 393 रुपये की ऊंचाई तक पहुंची. लेकिन ठीक इसके बाद शेयर लुढ़कने शुरू हुए. और बैंक की माली हालत इतनी कमजोर हो गई कि निवेशकों ने बैंक के शेयर बेचने शुरू कर दिए. 5 मार्च, 2020 को यस बैंक के एक शेयर का दाम 2008 के मुकाबले 95 प्रतिशत गिरकर 20 रुपये से भी कम रह गया. जानकार बता रहे हैं कि आरबीआई के हस्तक्षेप का सबसे बड़ा कारण यही रहा. 

बीएसई का सवाल पूछना दूसरा कारण
एक अन्य जानकार बताते हैं कि गुरुवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) ने ने यस बैंक से पांच मार्च 2020 को स्पष्टीकरण मांगा था कि सरकार ने एसबीआई की यस बैंक की हिस्सेदारी खरीदने की योजना को मंजूरी दी है या नहीं? इस खबर के बाद यस बैंक के बचे हुए निवेशकों ने भी अपने स्टॉक बेचना शुरू कर दिया. सरकार को डर था कि कहीं बिकवाली की वजह से यस बैंक को बंद नहीं करना पड़ जाए. सरकार के हस्तक्षेप की एक वजह यह भी बताई जा रही है.

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RBI ने क्यों लगाई पाबंदी?
आसान शब्दों मे कहें तो सरकार किसी भी हालत में येस बैंक को डुबने से बचाना चाहती है. इसके लिए सरकार ने बैंक पर ये पाबंदियां लगाई है. आरबीआई ने कहा कि सार्वजनिक हित और बैंक के जर्माकर्ताओं के हित को ध्यान में रखते हुए बैंकिग नियम कानून 1949 की धारा 45 के तहत पाबंदियां लगाई गई है. इसके अलावा हमारे पास कोई और विकल्प नहीं था. बयान में कहा गया कि बैंक के प्रबंधन ने इस बात का संकेत दिया था कि वह विभिन्न निवेशकों से बात हो रही है और इसमें सफलता मिलने की उम्मीद है, लेकिन विभिन्न वजहों से उन्होंने बैंक में कोई पूंजी नहीं डाली. 

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