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क्या आप जानते हैं सेविंग के ये टिप्स, जिसने अपनाया बन गया करोड़पति!

हर किसी की ख्वाहिश होती है जिंदगी में उसकी भी करोड़ों की सेविंग हो. लेकिन इसके लिए जरूरी होता है खर्च और आमदनी का सही अनुपात. पर्सनल फाइनेंस और निवेश की योजनाएं इस बात पर टिकी हैं कि आप बचत कितनी करते हैं. लेकिन बचत करना आसान नहीं है.

क्या आप जानते हैं सेविंग के ये टिप्स, जिसने अपनाया बन गया करोड़पति!

नई दिल्ली : हर किसी की ख्वाहिश होती है जिंदगी में उसकी भी करोड़ों की सेविंग हो. लेकिन इसके लिए जरूरी होता है खर्च और आमदनी का सही अनुपात. पर्सनल फाइनेंस और निवेश की योजनाएं इस बात पर टिकी हैं कि आप बचत कितनी करते हैं. लेकिन बचत करना आसान नहीं है. जाने कहां से खर्च आ जाते हैं और जेब खाली हो जाती है. बचत करने के लिए जांचा परखा तरीका है - 'पे योर सेल्फ फर्स्ट (Pay Yourself First).' ये नियम आपकी कुल बचत और आगे चलकर नेटवर्थ में भारी अंतर ला सकता है. यानी आपकी बचत आपकी बहुत से कहीं बढ़कर होगी.

क्या है 'पे योर सेल्फ फर्स्ट.' का नियम
ये बेहद सरल तरीका है. Pay Yourself First के तहत सबसे जरूरी बात है कि बचत या निवेश की राशि को एक बिल की तरह ट्रीट कीजिए और किसी भी दूसरे बिल से पहले इसका भुगतान कीजिए. डिजिटल बैंकिंग के दौर में ऐसा करना बहुत आसान है. आप एकाउंट की सेटिंग्स में जाकर सिस्टमेटिक मंथली ट्रांसफर का ऑप्शन चुन सकते हैं. इस तरह आपकी बचत अपने आप होने लगेगी. इसके बाद जो पैसे बचें, उससे बाकी खर्च चलाइए. पैसे कम पड़े तो दो तरीके आपके पास हैं - आमदनी बढ़ाइए या खर्च कम कीजिए. लेकिन बचत के लक्ष्य को न बदलिए. इस नियम को Pay Yourself First इसलिए कहते हैं क्योंकि आपने जो बचाया, बस वही आपने कमाया.

ये नियम क्यों काम करता है
Pay yourself first इस बात पर आधारित है कि पैसा पानी की तरह है. अगर आप इसे सही दिशा नहीं देंगे, तो ये कहीं न कहीं बह जाएगा. इस नियम के तहत आप अगर शेयर में पैसे लगाना चाहते हैं तो बैंक एकाउंट की सेटिंग ऐसी कर दीजिए कि हर महीने निश्चित राशि आपके मनपसंद शेयर खरीदने के लिए चली जाए. सुरक्षित निवेश के रूप में आप पीएफ खाते में स्वैच्छिक इनवेस्टमेंट कर सकते हैं या फिर बैंक एकाउंट से एटैच आरडी खुलवा सकते हैं.

बोनस या इंक्रीमेंट का इस्तेमाल
अप्रैल-मई के महीने में कॉरपोरेट कंपनियां अपने कर्मचारियों को बोनस इंसेंटिव और सैलरी हाइक देती है. ये वह राशि है, जिसके बिना आपका काम अभी तक चल रहा था. तो उसे खर्च करने की जगह Pay yourself first के तहत निवेश कर दीजिए. जिनती सैलरी बढ़ी हो, भले वह राशि 500 हो या 50,000 उसे किसी नियमित निवेश प्लान में लगा दीजिए. ऐसा करने से आपके बचत लक्ष्य कभी अधूरे नहीं रहेंगे.