Income Tax नहीं भरा तो बचना मुश्किल! ऐसे लोगों पर लगेगा भारी भरकम TDS/TCS, सिस्टम बताएगा नाम

Income Tax TDS and TCS: इनकम टैक्स रिटर्न नहीं भरने वालों के लिए सरकार ने सिस्टम बेहद सख्त कर दिया है. 1 जुलाई से ऐसे लोगों पर ज्यादा TDS और TCS वसूला जाएगा.

Income Tax नहीं भरा तो बचना मुश्किल! ऐसे लोगों पर लगेगा भारी भरकम TDS/TCS, सिस्टम बताएगा नाम

नई दिल्ली: Income Tax TDS and TCS: इनकम टैक्स रिटर्न नहीं भरने वालों के लिए सरकार ने सिस्टम बेहद सख्त कर दिया है. 1 जुलाई से ऐसे लोगों पर ज्यादा TDS और TCS वसूला जाएगा. ऐसे लोगों की पहचान करने के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने एक नई व्यवस्था तैयार की है, जिनसे 1 जुलाई से ऊंचा टैक्स वसूला जाना है. 

रिटर्न फाइल नहीं करने पर लगेगा ज्यादा TDS/TCS

बजट 2021 में एक प्रावधान शामिल किया गया था, जिसके तहत दो वित्त वर्ष तक इनकम टैक्स फाइल नहीं करने वालों से सरकार ज्यादा TDS (Tax Deducted at Source) और TCS (Tax Collected at Source) वसूलेगी, अगर इन दो सालों में डिडक्शन 50,000 रुपये या इससे ज्यादा रहा. 

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CBDT ने जारी किया सर्कुलर 

सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) ने इसे लेकर एक सर्कुलर भी जारी किया है, जिसमें सेक्शन  206AB और 206CCA के तहत रिटर्न दाखिल नहीं करने वालों पर ऊंचा TDS/TCS लगाने की बात कही गई है. IT डिपार्टमेंट ने ट्वीट कर बताया है कि TDS/TCS के कंप्लायंस बोझ को कम करने के लिए धारा 206AB और 206CCA के कंप्लायंस जांच के लिए नई व्यवस्था शुरू की गई है. 

 

नई व्यवस्था से कंप्लायंस का बोझ कम होगा

CBDT ने कहा कि TDS डिडक्टर या TCS कलेक्टर को इस बात का पता करने के लिए कि डिडक्टी या कलेक्टी वही 'specified person' है,  काफी मेहनत करनी पड़ सकती है, इससे उन पर कंप्लायंस का अधिक बोझ पड़ सकता है. इसलिए नई व्यवस्था उन पर इस बोझ को कम कर सकती है.

PAN डालते ही आ जाएगी सारी जानकारी

क्योंकि इस नई व्यवस्था के तहत TDS डिडक्टर या TCS कलेक्टर डिडक्टी या कलेक्टी का PAN नंबर इस नए सिस्टम में डालकर ये देख सकेगा कि डिडक्टी या कलेक्टी वही 'specified person' है या नहीं. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने वित्त वर्ष 2021-22 की शुरुआत में बीते दो सालों 2018-19 और 2019-20 को लेते हुए 'specified persons' की एक लिस्ट तैयार की.

इस लिस्ट में उन टैक्सपेयर्स के नाम हैं जिन्होंने इन दोनों सालों 2019-20 और 2020-21 में इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं किया है. और जिनका TDS, TCS इन बीते दो सालों में अलग अलग 50,0000 रुपये या इससे ज्यादा है. 

TDS क्या होता है

यह आपकी इनकम के स्रोत यानी आपकी सैलरी से कटता है. TDS इनकम टैक्स का ही एक हिस्सा होता है, जिसका भुगतान टैक्सपेयर पहले ही कर चुका होता है. इसका सेटलमेंट इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने के दौरान कर दिया जाता है. जैसे हर सैलरीड क्लास के हाथ में जो सैलरी आती है वो TDS काटने के बाद ही आती है. आपकी कंपनी TDS काटती है, उसे डिडक्टर कहते हैं और आपने TDS कटवाया है, आपको डिडक्टी कहा जाता है. आपकी कंपनी इस TDS अमाउंट को सरकार को देती है. टीडीएस कटौती आपकी सैलरी, निवेश पर मिले ब्याज, प्रोफेशनल फीस, कमीशन और ब्रोकरेज में शामिल है. 

TCS क्या होता है

TCS का भुगतान सेलर, डीलर, वेंडर, दुकानदार की तरफ से किया जाता है. यानी कोई विक्रेता जब कोई सामान बेचता है तो वो खरीदार से टैक्स वसूलता है, इसे TCS कहते हैं, इस TCS को जमा करने की जिम्मेदारी विक्रेता की होती है. कुछ खास तरह की वस्‍तुओं के विक्रेता ही इसे कलेक्‍ट करते हैं. इन वस्‍तुओं में टिंबर वुड, स्‍क्रैप, मिनरल, तेंदु पत्‍ते शामिल हैं. इस तरह का टैक्‍स तभी काटा जाता है जब पेमेंट एक सीमा से ज्‍यादा होता है.

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