क्लीन एनर्जी की जरूरतों को पूरा करने के लिए इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के साथ करार

विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालक ने इसके लिये अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के साथ एक समझौता ज्ञापन पर 30 अगस्त को हस्ताक्षर किए. 

क्लीन एनर्जी की जरूरतों को पूरा करने के लिए इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के साथ करार

नई दिल्ली: भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों की पूर्ति में स्‍वच्‍छ ऊर्जा के इस्तेमाल में नवाचार को बढ़ाने के लिये अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के साथ समझौता किया है. विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालक ने इसके लिये अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के साथ एक समझौता ज्ञापन पर गुरुवार को हस्ताक्षर किये. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन की मौजूदगी में जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के सचिव डॉ. रेनु स्‍वरूप और आईईए के कार्यकारी निदेशक डॉ. फातिह बीरोल ने समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किये. इसके तहत भारत में स्‍वच्‍छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी के अनुसंधान एवं विकास में तेजी लाने के लिए स्‍वच्‍छ ऊर्जा नवाचार में सहयोग को बढ़ाने पर जोर दिया गया है. इससे नीति निर्माण संबंधी आंकड़े तैयार करने तथा भारत समेत अन्य देशों में नवाचार के लिए कारगर नीति बनाने में मदद मिलेगी.

डॉ. हर्षवर्धन ने इस पहल का स्‍वागत करते हुये कहा कि इससे ऊर्जा और इसके विश्‍लेषण के संबंध में आंकड़ों को साझा करने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का मार्ग प्रशस्त होगा. अंतरराष्‍ट्रीय ऊर्जा मामलों पर प्राधिकार के रूप में आईईए को बधाई देते हुए उन्‍होंने पेरिस समझौते के अनुरुप भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुये समय से पहले इस लक्ष्‍य को हासिल कर लेने का विश्वास व्यक्त किया. उन्‍होंने कहा कि नये विचारों पर आधारित तकनीकी एवं नवाचार चुनौतियों में भारत अग्रणी है.

डॉ. बीरोल ने स्‍वच्‍छ ऊर्जा विकास के मामले में भारत की पहल को स्वागत योग्य बताते हुये कहा कि भारत में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा शुरु किये गये ‘मिशन इनोवेशन’ अभियान ने इस समझौते तक पहुंचने में अहम भूमिका निभाई है. उन्‍होंने कहा कि आईईए इस बात को मान्‍यता देता है कि भारत वैश्विक ऊर्जा के केंद्र में है. ऐसे में भारत की स्वच्छ ऊर्जा संबंधी पहल अन्य देशों के लिये सकारात्मक पहल साबित होगी. 

समझौता ज्ञापन के तहत दोनों पक्ष अनुसंधान एवं विकास पर आपसी सहयोग करेंगे. भारत अपनी डाटा संग्रहण और विश्‍लेषण की श्रेष्‍ठ प्रणाली को आईईए के साथ साझा कर सकेगा. इसमें प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण तथा ऊर्जा नवाचार में तेजी लाने जैसे प्रावधान है, जिसके लिए धनराशि के स्रोत की पहचान की जाएगी. 

इस समझौते को डीबीटी द्वारा स्‍थापित ‘मिशन इनोवेशन’ की भारत इकाई द्वारा विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के लिए समायोजित किया जाएगा. साथ ही यह इकाई आईईए के लिए अंतरराष्‍ट्रीय साझेदार और पहल इकाई यह कार्य करेगी. समझौता ज्ञापन की शुरुआती अवधि तीन साल तय की गयी है. 

(इनपुट-भाषा)