GDP पर बोले अरुण जेटली, खत्म हो रहा है नोटबंदी-जीएसटी का असर

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान विनिर्माण क्षेत्र में मंदी के कारण जीडीपी की दर गिरकर 5.7 फीसदी पर आ गई थी, जो नरेंद्र मोदी सरकार के अंतर्गत जीडीपी की सबसे कम वृद्धि दर थी.

GDP पर बोले अरुण जेटली, खत्म हो रहा है नोटबंदी-जीएसटी का असर
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: जीडीपी में बढ़ोतरी पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार (30 नवंबर) को कहा कि नोटबंदी, जीएसटी का प्रभाव अब समाप्ति पर है. इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाली तिमाहियों में वृद्धि दर में और तेजी होगी. जेटली ने कहा कि दूसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत पर पहुंचने के साथ ही पांच तिमाहियों से इसमें जारी गिरावट का रुख बदला है. उल्लेखनीय है कि जुलाई से सितंबर में GDP ग्रोथ बढ़कर 6.3 फीसदी हुई. पिछले साल के 5.7 फीसदी के मुकाबले इस साल दूसरी तिमाही में विकास दर 6.3 फीसदी है. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान विनिर्माण क्षेत्र में मंदी के कारण जीडीपी की दर गिरकर 5.7 फीसदी पर आ गई थी, जो नरेंद्र मोदी सरकार के अंतर्गत जीडीपी की सबसे कम वृद्धि दर थी. इससे पहले साल 2014 में जनवरी-मार्च के दौरान यह गिरकर 4.6 फीसदी पर आ गई थी.

वहीं दूसरी ओर कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने गुरुवार (30 नवंबर) को दूसरी तिमाही की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर बढ़ने का स्वागत किया और साथ ही यह भी कहा कि गिरावट वाले रुख पर विराम लगा है किंतु किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले अगली तीन-चार तिमाही के आंकड़ों का इंतजार किया जाना चाहिए. चिदंबरम ने ट्वीट कर कहा, ‘‘प्रसन्न हूं कि जुलाई-सितंबर तिमाही में 6.3 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की गयी है. यह पिछली पांच तिमाहियों से आ रहे गिरावट के रुख पर विराम है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘ किंतु अभी हम यह नहीं कह सकते हैं कि यह विकास दर में बढ़ने के रूख को दर्शाता है. हमें अगली तीन-चार तिमाहियों की प्रतीक्षा करनी चाहिए, उसके बाद ही हम किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंच सकते हैं.’’ चिदंबरम की यह टिप्पणी ऐसे समय में आयी है जबकि भारत ने वर्तमान वित्त वर्ष की जुलाई- सितंबर तिमाही में 6.3 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है. पूर्व वित्त मंत्री ने यह भी कहा, ‘‘6.3 प्रतिशत मोदी सरकार के वादे से बहुत कम है तथा सुव्यवस्थित भारतीय अर्थव्यवस्था की संभावना से काफी नीचे है.’’ 

(इनपुट एजेंसी से भी)