आर्थिक मोर्चे पर मिली बड़ी राहत! कोरोना के बीच पटरी पर लौटी इकोनॉमी
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आर्थिक मोर्चे पर मिली बड़ी राहत! कोरोना के बीच पटरी पर लौटी इकोनॉमी

पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के दौरान भारत की जीडीपी विकास दर में 7.4 फीसदी की गिरावट आई थी. इस बार मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में भी रिकवरी हुई है और मॉनसून सीजन भी बेहतर रहा है, जिसका GDP पर सकारात्मक असर पड़ा है.

आर्थिक मोर्चे पर मिली बड़ी राहत! कोरोना के बीच पटरी पर लौटी इकोनॉमी

नई दिल्ली:  आर्थिक मोर्चे पर देश के लिए अच्छी खबर है. बेहतर मॉनसून सीजन के साथ ही दूसरी तिमाही में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विकास दर में उछाल देखने को मिला है. देश की जीडीपी साल दर साल आधार पर 8.4 फीसदी दर्ज की गई है. केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2021-22 में दूसरी तिमाही के लिए GDP के आंकड़े जारी किए हैं. इस रिकवरी के साथ देश की जीडीपी अब कोरोना काल से पहले वाले लेवल को पार कर गई है.

जीडीपी में सुधार से अच्छे संकेत

जुलाई-सितंबर तिमाही में देश की जीडीपी में सुधार एक अच्छा संकेत कहा जा सकता है. हालांकि विशेषज्ञों की मानें तो एक साल पहले की रिकॉर्ड गिरावट की वजह से कम आधार इसकी प्रमुख वजह रही है. इसके साथ मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में भी रिकवरी हुई है और मॉनसून सीजन भी बेहतर रहा है, जिसका इस पर सकारात्मक असर पड़ा है.

पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के दौरान भारत की जीडीपी विकास दर में 7.4 फीसदी की गिरावट आई थी. क्रमिक आधार पर, वित्त वर्ष 2022 की दूसरी तिमाही के दौरान GDP की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही में 20.1 प्रतिशत दर्ज की गई थी. 2021-22 में जीडीपी ऐट कॉन्स्टैंट प्राइसेज 35.73 लाख करोड़ रुपये रहा है. इससे पहले 2020-21 की दूसरी तिमाही में यह आंकड़ा 32.97 करोड़ रुपये पर रहा था.

दूसरी तिमाही के आंकड़े

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने अपने वित्त वर्ष 2022 की दूसरी तिमाही के जीडीपी अनुमान में यह जानकारी दी है. बयान के अनुसार, देश की जीडीपी दूसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर) में 8.4 फीसदी दर्ज की गई है. अधिकतर विशेषज्ञों और व्यावसायिक जगत से जुड़ी एजेंसियों ने दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.5 प्रतिशत और 8.5 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान जताया था.

कोरोना काल के बाद अच्छी रिकवरी

सरकार ने पिछले साल कोरोना महामारी की रोकथाम के लिये देशव्यापी लॉकडाउन लगाया था. इसका आर्थिक गतिविधियों पर गहरा असर देखा गया था. इस साल भी अप्रैल के मध्य में विनाशकारी महामारी की दूसरी लहर को देखते हुए राज्यों ने इसके रोकथाम के लिये कई तरह की पाबंदियां लगाई थीं.

हालांकि अब आर्थिक वृद्धि दर कोविड पूर्व स्तर को पार कर गई है. मूल्य के संदर्भ में जीडीपी जुलाई-सितंबर तिमाही में 35,73,451 करोड़ रुपये रही. यह वित्त वर्ष 2019-20 की इसी तिमाही के 35,61,530 करोड़ रुपये के साइज के मुकाबले ज्यादा है.

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