चीन और पाकिस्तान को करारा झटका, भारत ने डाला प्रायर रेफरेंस कंट्री की लिस्ट में

Prior Reference Countries की श्रेणी में उन्हें रखा जाता है जिनसे भारत को खतरा है या खतरे की आशंका है. मुख्य रूप से इसमें वे देश हैं जिनकी सीमाएं भारतीय सीमा से लगती हैं. इसमें मुख्य रूप से पाकिस्तान और चीन हैं.

चीन और पाकिस्तान को करारा झटका, भारत ने डाला प्रायर रेफरेंस कंट्री की लिस्ट में

नई दिल्ली: सीमा विवाद के बाद चीन को आर्थिक क्षेत्र में लगातार झटके मिलने शुरू हो गए हैं. इस बीच बिजली उपकरणों के मामले में भारत ने चीन और पाकिस्तान को प्रायर रेफरेंस कंट्री लिस्ट में डालने का फैसला किया है. साथ ही सरकार ने साफ कर दिया है कि अब अब चीन जैसे देशों से विद्युत उपकरणों का आयात नहीं करेगा. 

सरकार ने उठाए कड़े कदम
बिजली मंत्री आर के सिंह ने शुक्रवार के कहा कि भारत अब चीन जैसे देशों से विद्युत उपकरणों का आयात नहीं करेगा. उन्होंने यह भी कहा कि वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को आर्थिक दृष्टि से मजबूत बनाना जरूरी है क्योंकि ऐसा नहीं होने पर क्षेत्र व्यावहारिक नहीं होगा. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बिजली और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रियों के सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही.

चीन और पाकिस्तान प्रायर रेफरेंस कंट्री के लिस्ट में शामिल
वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिये आयोजित इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, प्रायर रेफरेंस कंट्री (Prior Reference Countries) से उपकरणों की आयात की अनुमति नहीं होगी. इसके तहत हम देशों की सूची तैयार कर रहे हैं लेकिन इसमें मुख्य रूप से चीन और पाकिस्तान शामिल हैं.' ‘प्रायर रेफरेंस कंट्री’ (Prior Reference Countries) की श्रेणी में उन्हें रखा जाता है जिनसे भारत को खतरा है या खतरे की आशंका है. मुख्य रूप से इसमें वे देश हैं जिनकी सीमाएं भारतीय सीमा से लगती हैं. इसमें मुख्य रूप से पाकिस्तान और चीन हैं.

सिंह ने यह बात ऐसे समय कही जब हाल में लद्दाख में सीमा विवाद के बीच भारत और चीन की सेना के बीच हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गये.

21,000 करोड़ रुपये का सामान आया था चीन से 
उन्होंने कहा, 'काफी कुछ हमारे देश में बनता है लेकिन उसके बावजूद हम भारी मात्रा में बिजली उपकरणों का आयात कर रहे हैं. यह अब नहीं चलेगा. देश में 2018-19 में 71,000 करोड़ रुपये का बिजली उपकरणों का आयात हुआ जिसमें चीन की हिस्सेदारी 21,000 करोड़ रुपये है.'

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मंत्री ने यह भी कहा, 'दूसरे देशों से भी उपकरण आयात होंगे, उनका देश की प्रयोगशालाओं में गहन परीक्षण होगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं उसमें ‘मालवेयर’ और ‘ट्रोजन होर्स’ का उपयोग तो नहीं हुआ है. उसी के बाद उसके उपयोग की अनुमति होगी.'

 

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