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विश्व बैंक रैकिंग: शेयर होल्डरों के हितों की रक्षा के मामले में भारत को 'पूरे 10' अंक, अमेरिका-ब्रिटेन को छोड़ा पीछे

'छोटे निवेशकों की सुरक्षा' से संबंधित अन्य क्षेत्र- कॉर्पोरेट पारदर्शिता, प्रकटीकरण और स्वामित्व तथा नियंत्रण, निदेशक देयता और शेयरधारक मुकदमा हैं.

विश्व बैंक रैकिंग: शेयर होल्डरों के हितों की रक्षा के मामले में भारत को 'पूरे 10' अंक, अमेरिका-ब्रिटेन को छोड़ा पीछे

नई दिल्ली: विश्व बैंक की कारोबार सुगमता के मामले में 30 अंक की छलांग लगाने वाले भारत ने शेयरधारकों के अधिकारों की रक्षा के मामले में ‘पूरे 10’ अंक हासिल किये हैं. यहां तक कि अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर और न्यूजीलैंड जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाएं भी विश्व बैंक की नई कोराबार सुगमता रपट में यह मुकाम पाने में नाकाम रही हैं. भारत को विश्व बैंक की सूची में 100 वां मिला है, जबकि छोटे निवेशकों की सुरक्षा के मामले में उसे कहीं ऊंचा चौथा स्थान मिला है. इस सफलता के लिये अधिकारियों ने पूंजी बाजार नियामक सेबी द्वारा उठाये गये सुधारवादी कदमों को अहम बताया है.

‘छोटे निवेशकों की सुरक्षा' के क्षेत्र में, भारत को शेयरधारकों के हितों की रक्षा के लिए 10 में से 10 अंक मिले हैं जबकि इसके मुकाबले अमेरिका को 10 में 4, ऑस्ट्रेलिया को 10 में 5 और ब्रिटेन, सिंगापुर तथा न्यूजीलैंड प्रत्येक को 10 में 7 अंक मिले हैं.

'छोटे निवेशकों की सुरक्षा' से संबंधित अन्य क्षेत्र- कॉर्पोरेट पारदर्शिता, प्रकटीकरण और स्वामित्व तथा नियंत्रण, निदेशक देयता और शेयरधारक मुकदमा हैं. इनमें कॉर्पोरेट पारदर्शिता, प्रकटीकरण और स्वामित्व तथा नियंत्रण में भारत को प्रत्येक में 8 अंक मिले हैं जबकि निदेशक देयता और शेयरधारक मुकदमा में सात अंक प्राप्त हुए हैं.

रपट में कहा गया है, “भारत ने इच्छुक पार्टियों के बीच प्रतिकूल लेनदेन के मामलों में उपलब्ध उपायों को बढ़ाकर छोटे निवेशकों के अधिकारों की सुरक्षा को मजबूत किया है. यह सुधार दिल्ली और मुंबई दोनों पर लागू होता है.” कारोबारी सुगमता सूचकांक में शीर्ष पांच स्थान हासिल करने वाले -न्यूजीलैंड, सिंगापुर, डेनमार्क, दक्षिण कोरिया और हांगकांग- को शेयरधारकों के अधिकारों की रक्षा के मामले में 6 से 7 के बीच अंक मिले हैं.

कारोबार सुगमता में भारत की लंबी छलांग, रैंकिंग में 142 से 100वें स्थान पर पहुंचा

भारत ने विश्वबैंक की कारोबार सुगमता रिपोर्ट रैंकिंग में लंबी छलांग लगायी है. देश की रैंकिंग 30 पायदान सुधरकर 100वें स्थान पर पहुंच गयी. इससे उत्साहित सरकार ने सुधारों को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया जिससे देश आने वाले वर्ष में कारोबार सुगमता के मामले में शीर्ष 50 देशों में शामिल हो सकता है. नरेंद्र मोदी सरकार के 2014 में सत्ता में आने के समय भारत की रैंकिंग 142 थी. पिछले साल यह 130 थी. इस साल भारत एकमात्र बड़ा देश है जिसने कराधान, निर्माण परमिट, निवेशक संरक्षण और ऋण शोधन के लिये उठाये गये कदम के दम पर यह बड़ी उपलब्धि हासिल की.

(इनपुट एजेंसी से भी)