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तो क्या ऐसे 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेगा भारत, क्या ये है मोदी सरकार की पूरी प्लानिंग?

देश की राजधानी दिल्ली स्थित प्रगति मैदान में शुक्रवार को पहले भारत अंतर्राष्ट्रीय सहकारी व्यापार मेला (IICTF)-2019 का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेद्र सिंह तोमर (Narendra singh tomar) ने कहा कि किसानों की आमदनी दोगुनी करने और देश को 50 खरब की अर्थव्यवस्था बनाने में किसान सहकारिता की अहम भूमिका होगी. 

तो क्या ऐसे 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेगा भारत, क्या ये है मोदी सरकार की पूरी प्लानिंग?
अंतर्राष्ट्रीय सहकारी व्यापार मेला (आईआईसीटीएफ)-2019 दिल्ली में शुरू.

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली स्थित प्रगति मैदान में शुक्रवार को पहले भारत अंतर्राष्ट्रीय सहकारी व्यापार मेला (IICTF)-2019 का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेद्र सिंह तोमर (Narendra singh tomar) ने कहा कि किसानों की आमदनी दोगुनी करने और देश को 50 खरब की अर्थव्यवस्था बनाने में किसान सहकारिता की अहम भूमिका होगी. तीन दिवसीय इस मेले में देशभर के सहकारी संगठनों के साथ-साथ 35 देशों के सहकारी संगठनों ने अपने उत्पादों को प्रदर्शित किया है.

तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को 50 खरब की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है और इस लक्ष्य की प्राप्ति तभी होगी जब गांव, गरीब और किसान को केंद्र में रखकर काम किया जाएगा. भारत को 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में ग्रामीण क्षेत्र की भूमिका का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'गांव, गरीब और सहकारिता के योगदान के बिना देश 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था नहीं बन पाएगा.' तोमर ने कहा, 'प्रधानमंत्री कहते हैं कि गांवों की प्रगति होगी तो देश की प्रगति होगी, कृषि समृद्ध होगी तो देश समृद्ध होगा और किसान मजबूत होंगे तो देश मजबूत होगा.'

देश में आर्थिक समृद्धि लाने में सहकारी क्षेत्र की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कृषि मंत्री ने कहा, 'शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में केंद्र और राज्यों की सरकारों के अलावा निजी व सहकारी संगठनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, फिर भी इन दोनों क्षेत्रों में हम उतना नहीं कर पाए हैं जितना हमें करने की जरूरत है.'

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उन्होंने कहा, 'शिक्षा और स्वास्थ्य की तरह ही आजीविका और रोजगार अवसर पैदा करना बेहद जरूरी है, जिसमें सहकारी क्षेत्र की अहम भूमिका हो सकती है और आने वाले दिनों में यह क्षेत्र इस मामले में मील का पत्थर साबित होने वाला है.'

उन्होंने कहा कि देश के किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए कृषि उत्पादों का निर्यात आवश्यक है, जिसमें सहकारी क्षेत्र की अहम भूमिका होगी. कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि निर्यात नीति 2018 में कृषि उत्पादों का निर्यात 2022 तक बढ़ाकर दोगुना करने का लक्ष्य तय किया गया है. उन्होंने कहा कि 'कृषि उत्पादों के निर्यात का मूल्य इस समय करीब 30 अरब डॉलर है, जिसे बढ़ाकर 2022 तक 60 अरब डॉलर से ज्यादा करना है.'

इस मौके पर उन्होंने भारत सरकार की स्टार्टअप और स्टैंडअप कार्यक्रमों की तरह युवाओं को ध्यान में रखकर राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) द्वारा तैयार की गई 'युवा सहकार सहकारी उद्यम सहायता व नवाचारी योजना'-2019 का शुभारंभ किया. इस योजना का सालाना बजट 100 करोड़ रुपये है. मेले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहयोगी संगठन सहकार भारती ने अपने 'सिंप्लीदेसी' ब्रांड लांच किया. मेले का आयोजन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के सहयोग से राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम की अगुवाई विभिन्न संगठनों द्वारा किया गया है.