#MadeInIndia: इस तरह से होगा चीन की दुकान का शटर डाउन

भारत में चीन की दुकान का शटर डाउन करने की शुरुआत हो चुकी है. 

#MadeInIndia: इस तरह से होगा चीन की दुकान का शटर डाउन
चीन की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर

नई दिल्लीः भारत में चीन की दुकान का शटर डाउन करने की शुरुआत हो चुकी है. भारत सरकार ने सोमवार को 59 चीनी ऐप्स को बैन करके चीन को ये कड़ा संदेश दे दिया है कि अब वो चुप बैठने वाला नहीं है. अकेले टिकटॉक के बैन करने से चीन की अर्थव्यवस्था पर इसका खराब असर पड़ने की संभावना है. ऐसे में अब चीनी कंपनियों को अपने देश में भी काफी आर्थिक नुकसान होने वाला है. 

IPO को पड़ेगा टालना
टिकटॉक की पैरेंट कंपनी बाइटडांस जल्द ही चीन के शेयर मार्केट में अपना आईपीओ लेकर के आने वाली थी. ऐप्स पर बैन लगने के बाद अब बाइटडांस को अपना आईपीओ आगे के लिए टालना पड़ेगा. बाइटडांस को अकेले भारत से ही वैश्विक हिस्सेदारी का 30 फीसदी ट्रैफिक मिलता था. ये चीन के कुल यूजर्स से भी बड़ा बेस है. इससे बाइटडांस की वैलूएशन पर भी असर पड़ेगा. 

इन कंपनियों पर भी पड़ेगा असर
बाइटडांस के अलावा Baidu, Alibaba और Tencent ऐसी कंपनियां हैं जो चीन की अर्थव्यवस्था को चलाने में अपना बड़ा अहम योगदान देती हैं. इन कंपनियों के ऐप्स भारत में काफी लोकप्रिय हैं. इस वजह से चीनी कंपनियों को काफी कारोबार मिलता है. अब चीन की इकोनॉमी जो पहले से ही कोरोना वायरस के चलते डांवाडोल हो चुकी है, उस पर और असर पड़ेगा. चीन द्वारा तैयार हो रहे एक बड़े प्रोजेक्ट को अरबों डॉलर का घाटा हो सकता है.

चीनी आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग को भारी नुकसान
साइबर एक्सपर्ट पवन दुग्गल का कहना है कि चीन ने 2030 तक दुनिया का सबसे एडवांस आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) और मशीन लर्निंग (Machine Learning) तैयार करने का लक्ष्य रखा है. देश में मौजूद चीनी ऐप्स से मिलने वाले डेटा (Data) से ही इनकी सबसे उन्नत तकनीक (Advance Techlonogy) तैयार करने का काम चल रहा है. अगर भारत से इकट्ठा किए जा रहे डेटा का प्रवाह तोड़ दिया जाए तो इनके आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस प्रोजेक्ट का काम बुरी तरह प्रभावित होगा. इस प्रोजेक्ट से चीनी सरकार अरबों डॉलर कमाने का सपना संजोए बैठी है. भारत के नए फैसले से इस भारी-भरकम बजट वाले प्रोजेक्ट की हवा निकल सकती है.

आखिर क्यों चीनी ऐप्स देश में उड़ाती है इतना पैसा
मामले से जुड़े एक अन्य जानकार बताते हैं कि चीनी ऐप्स जैसे TikTok, Helo, UC News और Likee आम लोगों को मुफ्त में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. दिखने में तो ये सिर्फ डांस, फोटो शेयरिंग, एक्टिंग और मनोरंजन वाले ऐप्स दिखते हैं. लेकिन वास्तव में ये ऐप्स हर यूजर के फोन से एक-एक हरकत को रिकॉर्ड करते हैं. मसलन, मोबाइल में बातचीत, टाइपिंग, वीडियो और लोकेशन सब कुछ इन ऐप्स के जरिए रिकॉर्ड किए जाते हैं. इसी डेटा को चीन के महा प्रोजेक्ट आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग में डाला जाता है ताकि इसे सबसे एडवांस बनाया जा सके. यही वजह है कि ये ऐप्स वीडियो बनाने के लिए यूजर्स को हजारो-लाखो रुपये तक देते हैं.

GEM पर लागू किया ये नियम
कॉमर्स मिनिस्ट्री यानी वाणिज्य मंत्रालय ने अपने E-Marketplace यानी GEM के लिए नया नियम बना दिया है. किसी भी विक्रेता को अब इस पोर्टल पर सामान बेचने के लिए उस सामान का कंट्री ऑफ ओरिजिन (Country of Origin) बताना होगा. यानी अब इस पोर्टल पर बिकने वाले हर प्रोडक्ट की इमेज के साथ ये बताया जाएगा कि ये प्रोडक्ट किस देश में बना है. इसके अलावा इस पोर्टल पर मेक इन इंडिया फिल्टर भी लगाया गया है. जिसके तहत अब विक्रेता को ये बताना होगा कि जो सामान वो बेच रहा है उसमें से कितना पूरी तरह से भारत में बना है. जिस सामान में 50 प्रतिशत से ज्यादा स्वदेशी कच्चे माल का उपयोग किया गया होगा, उसे ही प्राथमिकता दी जाएगी.

अब आप सोच रहे होंगे कि इससे चीन का क्या लेना-देना? इससे चीन का क्या बिगड़ जाएगा, तो आपको समझना चाहिए कि जैसे ही किसी सामान के बारे में ये बताया जाएगा कि वो किस देश में बना है और जैसे ही ये पता चलेगा कि ये प्रोडक्ट चीन का है, तो कोई भी खरीदार अपने आप ही चीन के सामान को खरीदने के लिए आगे नहीं आएगा. अभी समस्या ये है कि ज्यादातर उत्पादों के बारे में ये पता ही नहीं चलता है कि ये चाइनीज हैं या नहीं. यानी चीन का नाम लिए बिना भारत के बाजार में उसके खिलाफ माहौल बनाने की तैयारी कर ली गई है.

इस E-Market Place पर सरकारी विभागों से जुड़े करीब 40 हजार खरीदार हैं. ये ठीक वैसे ही काम करता है जैसे कुछ मशहूर Online Platforms करते हैं. इस E-Market Place को सरकार ने इसलिए शुरू किया था ताकि कोई भी व्यक्ति या समूह जो अपने हुनर से कोई उत्पाद तैयार करता है, उसे ये चिंता ना हो कि उसे खरीदार नहीं मिल पाएंगे. इस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के जरिए आप अपने प्रोडक्ट को लिस्ट कर सकते हैं, और सरकारी विभागों में सामान की सप्लाई के लिए बोली भी लगा सकते हैं. इस पर करीब 3 लाख 93 हजार सप्लायर रजिस्टर्ड हैं. और इस पर करीब 17 लाख प्रोडक्ट्स और सर्विसेज मौजूद हैं. पिछले वर्ष ही इसके जरिए करीब 25 हजार करोड़ रुपये की कीमत के उत्पाद बेचे गए थे.

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