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मेक इन इंडिया: भारत ने चीन के निवेशकों को दिया आमंत्रण

भारत ने आज चीन के निवेशकों को अनुकूल वातावरण का भरोसा दिलाते हुए उन्हें सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ और अन्य प्रमुख कार्यक्रमों में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया है। इससे द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

मेक इन इंडिया: भारत ने चीन के निवेशकों को दिया आमंत्रण

ग्वांगझू: भारत ने आज चीन के निवेशकों को अनुकूल वातावरण का भरोसा दिलाते हुए उन्हें सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ और अन्य प्रमुख कार्यक्रमों में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया है। इससे द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपनी चीन की चार दिवसीय यात्रा के दूसरे दिन भारत-चीन व्यापार मंच की बैठक को संबोधित करते हुए कहा, ‘हम भारत में आपके निवेश को मुनाफे वाला बनाने में मदद करेंगे। हमें निश्चित रूप से दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि से पैदा होने वाले अवसरों का लाभ उठाना चाहिए।’ इस बैठक में दोनों देशों के उद्योगपति तथा कारोबारी शामिल हुए। राष्ट्रपति ने कहा कि हम चीन के बाजार में भारतीय उत्पादों की अधिक पहुंच चाहते हैं जिससे द्विपक्षीय व्यापार में संतुलन लाया जा सके, जो अभी चीन के पक्ष में झुका हुआ है।

उन्होंने कहा कि यह विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जरूरी है जहां दोनों देश स्वाभाविक तरीके से एक-दूसरे के पूरक हैं। इन क्षेत्रों में फार्मा, आईटी और आईटी संबद्ध सेवाएं और कृषि उत्पाद शामिल हैं। मुखर्जी ने इस बात पर संतोष जताया कि दोतरफा निवेश प्रवाह पर ध्यान बढ़ाया जा रहा है। राष्ट्रपति मुखर्जी ने इस बात का जिक्र किया कि इस सदी की शुरुआत से ही भारत-चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2000 में जहां यह 2.91 अरब डॉलर था, वहीं पिछले साल यह 71 अरब डॉलर पर पहुंच गया। ग्वांगदोन प्रांत की 1,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था है जहां बड़े विनिर्माण और अन्य उद्योग स्थित हैं। इसे चीन का निर्यात का ‘पावर हाउस’ भी कहा जाता है। गुजरात और महाराष्ट्र के साथ इस प्रांत का करीबी रिश्ता है। पिछले साल शेन्जेन तथा गुजरात अंतरराष्ट्रीय वित्त टेक-सिटी-गुजरात के बीच पायलट स्मार्ट शहर सहयोग परियोजना की घोषणा की गई थी।

राष्ट्रपति ने ग्वांगदोन और कांचीपुरम के बीच ईस्वी सन से पहले, सीधे समुद्री मार्ग से दूसरी सदी के संपर्कों का जिक्र करते हुए कहा कि यह भारत और चीन के लिए अपने पुराने संपर्कों को मजबूत करने और नए रिश्तों के लिए हाथ मिलाने का एक शानदार समय है। मुखर्जी ने इस बात को रेखांकित किया कि भारत अब करीब एक दशक से प्रत्येक वर्ष 7.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कर रहा है। इसके साथ ही उन्होंने जोड़ा कि भारत का मानना है कि वह अकेले आगे नहीं बढ़ सकता।

उन्होंने कहा कि आज एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़ चुकी दुनिया में भारत विभिन्न देशों में प्रौद्योगिकी क्षेत्र में हुई प्रगति तथा सर्वश्रेष्ठ व्यवहार का लाभ लेना चाहता है। उन्होंने कहा, ‘हमारी अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में जो व्यापक सुधार आगे बढ़ाए गए हैं उनसे भारत में कारोबार करने की स्थिति सुगम हुई है। हमारी विदेशी निवेश व्यवस्था को उदार किया गया है। इसके लिए सरलीकृत प्रक्रियाओं को अपनाया गया है। विदेशी निवेश से अंकुश हटाया गया है।’ 

राष्ट्रपति मुखर्जी ने कहा कि सुधारों से भारत के प्रति विदेशी निवेशकों की रचि फिर जगी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में भारत में निवेश में 32 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं वर्ष 2015 में भारत सबसे बड़े वैश्विक निवेश गंतव्य के रूप में उभरा है। मुखर्जी ने कहा कि हम चीन का अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश चाहेंगे जो अब 100 अरब डालर के आंकड़े को पार कर चुका है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार औद्योगिक गलियारे, राष्ट्रीय निवेश एवं विनिर्माण क्षेत्र तथा प्रतिबद्ध मालढुलाई गलियारा स्थापित कर रही है, जिससे इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाया जा सके। मुखर्जी ने कहा कि ‘100 स्मार्ट शहरों’ की पहल से भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदला जा सकेगा।

मुखर्जी ने कहा, ‘भारत आपको इन कार्यक्रमों में भागीदारी का न्योता देता है। चीन की कंपनियां बुनियादी ढांचे तथा विनिर्माण की ताकत से भारत को अपनी ‘गोइंग ग्लोबल’ रणनीति के लिए महत्वपूर्ण गंतव्य के रूप में देख सकती हैं।’ उन्होंने कहा कि वहीं भारत अपनी ओर से चीन के उपक्रमों को नए डोमेन ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ में सहयोग दे सकता है। राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि भारत की बुनियादी ढांचा तथा औद्योगिक पार्क परियोजनाओं में निवेश करने वाली चीनी कंपनियों ने अच्छी शुरआत की है। भारत के रेल क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग भी बेहतर तरीके से आगे बढ़ रहा है। 

राष्ट्रपति मुखर्जी ने कहा कि बड़ी संख्या में प्रमुख भारतीय आईटी कंपनियां और अन्य विनिर्माताओं की चीन में मौजूदगी है। उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि भारतीय उद्यमी अब संयुक्त रूप से तीसरे देशों में संभावनाओं के दोहन के अवसर तलाश रहे हैं। अपनी बात को समाप्त करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत का मानना है कि दोनों देशों में आर्थिक और व्यावसायिक सहयोग के लिए काफी क्षमता है। एक साथ आने पर दोनों के लिए समान अवसर उपलब्ध होंगे।

उन्होंने कहा, ‘हमारी आर्थिक भागीदारी की पूरी क्षमता का लाभ उठाने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि हमारे व्यापारिक समुदाय के बीच सूचना की कमी को पाटा जाए। उन्होंने कहा, ‘हम चीन से अधिक निवेश के लिए एक अनुकूल माहौल उपलब्ध कराने को प्रतिबद्ध हैं। हम दोनांे देशों के उद्योगांे और कंपनियों को विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने में मदद को तैयार हैं। भारत चीन के निवेशकों को भारत की विकास की कहानी में भागीदार बनने का न्योता देता है।’

इस मौके पर भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष नौशाद फोर्ब्स ने कहा कि दोनों देशों में द्विपक्षीय निवेश और व्यापार के मामले में अभी बहुत कुछ अधिक किए जाने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि चीन के लिए भारत में बुनियादी ढांचा क्षेत्र में भागीदारी के लिए यह एक बड़ा मौका है। फोर्ब्स ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की शक्ति निजी क्षेत्र की सैकड़ों और हजारों कंपनियां हैं।

सीआईआई के अध्यक्ष ने कहा, ‘हम वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स सहित विभिन्न क्षेत्रों में चीन के निवेश का स्वागत करते हैं। इसी तरह चीन का फार्मा तथा आईटी क्षेत्र भारतीय कंपनियों को बेहतर अवसर उपलब्ध करा सकता है।’ चीन की अंतरराष्ट्रीय व्यापार संवर्धन परिषद (सीसीपीआईटी) के चेयरमैन च्यांग जेंगवेई ने अपने संबोधन में कहा कि चीन भारत के ‘मेक इन इंडिया’ तथा ‘स्मार्ट शहर’ कार्यक्रम में भाग लेने का इच्छुक है।

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