रुपये ने दिखाया दम, डॉलर के मुकाबले लगातार 8वें दिन भी जारी रही मजबूती

 सोमवार सुबह के कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 39 पैसे चढ़कर 70.30 पर खुला. यह पिछले तीन माह का उच्च स्तर है. 

रुपये ने दिखाया दम, डॉलर के मुकाबले लगातार 8वें दिन भी जारी रही मजबूती
अन्य विदेशी मुद्राओं के मुकाबले डॉलर के कमजोर पड़ने से रुपये को समर्थन मिला है...(फाइल फोटो)

मुंबई: डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार मजबूत हो रहा है. यह सिलसिला पिछले आठ दिन से जारी है. सोमवार सुबह के कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 39 पैसे चढ़कर 70.30 पर खुला. यह पिछले तीन माह का उच्च स्तर है. रुपये की मजबूती के पीछे अहम वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 60 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाना है. मुद्राकारोबारियों के अनुसार अन्य विदेशी मुद्राओं के मुकाबले डॉलर के कमजोर पड़ने और घरेलू शेयर बाजारों के अच्छे स्तर पर खुलने से भी रुपये को समर्थन मिला है.

इससे पहले, गुरुवार को विदेशी पूंजी का निवेश बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों के कमजोर होने के बीच रुपया 77 पैसे के उछाल के साथ 70.69 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था. शुक्रवार को बाजार बंद रहा था. पिछले आठ दिनों में रुपये में 259 पैसे की तेजी आई है. बाजार सूत्रों ने कहा कि निर्यातकों और बैंकों की डॉलर बिकवाली बढ़ने से रुपये को समर्थन प्राप्त हुआ. बुधवार को ईद-उल-मिलाद के मौके पर बाजार बंद था.

विदेशी निवेशकों हुए भारतीय पूंजी बाजार पर फिदा 
रुपये में मजबूती और कच्चे तेल में नरमी से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने अक्टूबर में भारी निकासी के बाद नवंबर में अब तक भारतीय पूंजी बाजारों में 6,310 करोड़ रुपये का निवेश किया है. डिपॉजिटरी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने सबसे ज्यादा पूंजी लोन मार्केट में लगाई है. 

इससे पहले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने अक्टूबर महीने में पूंजी बाजार से 38,900 करोड़ रुपये की निकासी की थी. यह दो साल की सबसे बड़ी निकासी रही. एफपीआई ने इससे पिछले माह सितंबर, 2018 में पूंजी बाजार (शेयर और ऋण) से 21,000 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की थी. जबकि जुलाई-अगस्त में उन्होंने कुल 7,500 करोड़ रुपये का निवेश किया था.

एफपीआई का रुख बदला
आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने 1 से 22 नवंबर के दौरान शेयर बाजार में 923 करोड़ रुपये और ऋण बाजार में 5,387 करोड़ रुपये डाले हैं. इस प्रकार पूंजी बाजार में उनका कुल निवेश 6,310 करोड़ रुपये (86.2 करोड़ डॉलर) हुआ है. विशेषज्ञों के मुताबिक, रुपये में तेजी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने भारत का वृहत आर्थिक परिदृश्य मजबूत किया है और उभरते बाजारों को लेकर एफपीआई के रुख को बदला है.

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