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ज्यादा टैक्स कलेक्शन के लिए IT डिपार्टमेंट जोड़ेगा नए टैक्सपेयर्स, बनाया ये मास्टर प्लान

इसमें पंजाब, हरियाणा, हिमाचल जैसे राज्यों के लिए सबसे ज्यादा टारगेट है. इसके लिए शहरों में पुणे के लिए एक बड़ा लक्ष्य रखा गया है. 

ज्यादा टैक्स कलेक्शन के लिए IT डिपार्टमेंट जोड़ेगा नए टैक्सपेयर्स, बनाया ये मास्टर प्लान
फाइल फोटो.

नई दिल्ली: इनकम टैक्स डिपार्टमेंट दिल्ली और मुंबई के अलावा अब छोटे शहरों से टैक्सपेयर्स जोड़ने की कोशिश करेगा. IT डिपार्मटेंट के इस साल के एक्शन प्लान में कुल 1 करोड़ 30 लाख नए टैक्सपेयर जोड़ने का लक्ष्य है. इसके लिए इलाके के हिसाब से टैक्स पेयर टारगेट तय किया गया है. इसमें पंजाब, हरियाणा, हिमाचल जैसे राज्यों के लिए सबसे ज्यादा टारगेट है. इसके लिए शहरों में पुणे के लिए एक बड़ा लक्ष्य रखा गया है. इस साल के एक्शन प्लान में अपील के मामलों का तेजी से निपटारा, हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन में गलत पैन पर सख्ती और बेनामी संपत्तियों के मामले में और ज्यादा एक्शन का भी प्लान है. अचल संपत्तियों के मामलों में भी NRIs से कम टीडीएस काटे जाने को लेकर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का रवैया सख्त होगा.

इनकम टैक्स का इस साल का एक्शन प्लान

1. 1.30 करोड़ नए टैक्सपेयर्स की पहचान का लक्ष्य.
2. TDS के आंकड़ों का मिलान कर भी होगी पहचान.
3. आर्थिक गतिविधि के साथ नए टैक्सपेयर्स की गुंजाइश.
4. अपील के मामलों को तेजी से निपटाने की कोशिश.
5. हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन में गलत PAN को लेकर सख्ती.
6. बेनामी संपत्तियों के मामले में और ज्यादा एक्शन.
7. अचल संपत्तियों में कम TDS काटने के केस में सख्ती होगी.

कहां से खोजे जाएंगे नए टैक्स पेयर्स?

रीजन टारगेट
पंजाब, हरियाणा, कश्मीर, हिमाचल  12.50 लाख
पुणे  12.22 लाख
गुजरात     11.96 लाख
तमिलनाडु    9.35 लाख
आंध्र प्रदेश-तेलंगाना  9.22 लाख
कर्नाटक-गोवा     8.26 लाख
पश्चिम बंगाल-सिक्किम   8.25 लाख
उत्तर प्रदेश वेस्ट      6.83 लाख
उत्तर प्रदेश ईस्ट     5.83 लाख
दिल्ली      7.52 लाख
मुंबई रीजन      7.27 लाख

अपील के मामलों को निपटाने पर फोकस

1. 10 लाख रु से कम डिमांड के अपील के कुल 192435 केस.
2. 50 करोड़ से अधिक डिमांड के सभी केस का निपटारा हो.
3. 10 लाख से अधिक और 50 करोड़ रुपये तक के मिनिमम 40 फीसदी केस.
4. 2 लाख से अधिक पर 10 लाख रुपये तक के कम से कम 90 फीसदी केस.
5. 2 लाख रुपये से कम के कम से कम 90 फीसदी केस का निपटारा.
6. 5 साल से पुराने कम से कम 90 फीसदी केस को खत्म करना.