अपने पहले बजट की तैयारी में कमलनाथ, शोपीस योजनाओं पर चलेंगी कैंची

8 फरवरी से शुरू होने वाले विधानसभा के सत्र में जो अंतरिम बजट पेश होगा उसमें चार महीने के लिए ही खर्च के प्रावधान होंगे.

अपने पहले बजट की तैयारी में कमलनाथ, शोपीस योजनाओं पर चलेंगी कैंची
कांग्रेस ने बीजेपी सरकार पर चुनावी साल में अंधाधुंध खर्च का आरोप लगाया. (फाइल)

संदीप भम्मरकर, भोपाल:  कमलनाथ सरकार ने खाली खजाने से निपटने के लिए नए रास्ते तलाश लिए हैं. फरवरी में पेश होने वाले अंतरिम बजट में गैर जरूरी और दीर्घकालिक निर्माण परियोजनाओं के बजट में कटौती करने पर तेजी से विचार हो रहा है. इसी के साथ ही केवल शोपीस और प्रदेश की इमेज बिल्डिंग वाली योजनाओं के बजट में भी कटौती करने पर विचार शुरू हो गया है. वित्त विभाग ने फरवरी में पेश होने वाले अंतरिम बजट की जो तैयारी की है उसमें सबसे खास ध्यान कटौती पर है. केवल जरूरी खर्च और सरकार की प्राथमिकताएं पूरी करने वाली योजनाओं पर ही बजट प्रावधान किए जा रहे हैं. 8 फरवरी से शुरू होने वाले विधानसभा के सत्र में जो अंतरिम बजट पेश होगा उसमें चार महीने के लिए ही खर्च के प्रावधान होंगे. इन चार महीने में केवल अहम ज़रूरतें पूरी करने के लिए ही बजट आवंटित किया जाएगा. वित्त विभाग के अफसर जो चार महीनों के लिए जो बजट तैयार कर रहे हैं उसमें इन्हें गैरजरूरी समझा जा रहा है.

इस नीति से केवल तनख्वाह, जरूरी रूटीन खर्च और जनता को सहूलियत देने वाली और सरकार की प्राथमिकताओं वाली योजनाओं पर ही खर्च करने के लिए ही बजट आवंटित किया जाएगा. सरकार को लोकसभा चुनाव तक ये संदेश भी देना है कि उसने कर्जमाफी की है, इसलिए खजाने का एक बड़ा हिस्सा खर्च करने के लिए भी बजट चाहिए. जून के बाद जब मुख्य बजट आएगा तब पूरे वित्तीय वर्ष का बजट तैयार करके आगे की रणनीति तैयार होगी.

ऐसी नौबत क्यों ?
सरकार का तर्क है कि बीजेपी सरकार ने चुनावी साल में अंधाधुंध खर्च किया और लोगों को फौरी राहत देने के लिए सरकार का खजाना खाली होने की फिक्र भी नहीं की. वैसे, आमतौर पर ऐसा हर चुनावी साल में होता है. लेकिन इस बार इसका ढिंढोरा इसलिए पीटा जा रहा है क्योंकि कांग्रेस सरकार को बीजेपी सरकार पर फाइनेंशियल मिस मैनेजमेंट का आरोप भी लगाकर कठघरे में खड़ा करने का मौका मिल रहा है.

बीजेपी सरकार पर खजाना खाली करने का आरोप
कांग्रेस सरकार का तर्क है कि बीजेपी सरकार ने चुनावी साल में खजाना खाली कर दिया. वोट हासिल करने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया गया. यहां तक कि खजाना खाली हो जाने पर कर्ज लेने से भी परहेज नहीं किया गया. कर्जामाफी का वायदा पूरा करने में ही भारी भरकम खर्च है और कर्ज लेने की लिमिट भी खत्म हो चुकी है.

सरकार पर कर्ज का बोझ 
फायनेंस एक्सपर्ट मनोज शर्मा कहते हैं कि सरकार बाजार से कर्ज ले रही है, यानी वित्तीय अनुशासन का पालन नहीं हो रहा है. यदि सरकार खाली खजाने से जूझ रही है तो उसके पास लंबी अवधि की परियोजनाओं को कुछ दिनों के लिए बंद करने का उपाय करना ही होगा. लेकिन इस दौरान वित्तीय अनुशासन का पालन करने के लिए गैर जरूरी खर्च पर भी लगाम कसनी होगी. मनोज शर्मा साफगोई से कहते हैं कि मौजूदा हालत की वजह फायनेंशल मिस मैनेजमेंट ही है.

बीजेपी ने लगाया कांग्रेस पर बहानेबाजी का आरोप
उधर, बीजेपी नेता हितेष बाजपेयी आरोप लगाते हैं कि सरकार केवल खाली खजाने का बहाना बनाकर रो रही है. सरकार में आने के बाद उपाय अपनाने पर विचार होनी चाहिए. कुछ परियोजनाओं का बजट रोककर सरकार केवल बहानेबाजी कर रही है. कांग्रेस नेता माणक अग्रवाल कहते हैं कि खजाने की बिगड़ी हालत की जिम्मेदार शिवराज सरकार है. कमलनाथ ने इसके सुधार की कवायद शुरू कर दी है और फायनेंशियल कंट्रोल शुरू कर दिए गए हैं और जल्द ही उसके परिणाम सामने आएंगे.

इस मुद्दे पर राज्य सरकार के वाणिज्यिक कर मंत्री बृजेंद्र सिंह राठौर कहते हैं कि सरकार जनहितैषी योजनाओं को बंद नहीं करेगी और उनके बजट में कटौती नहीं करेगी. लेकिन जो गैरज़रूरी योजनाएं हैं और केवल जनता को फायदा देने की बजाय लग्जरी खर्च की वजह बनती है, उनपर विचार ज़रूर किया जाएगा.