धनतेरस पर जानें सोने-चांदी की धार्मिक महत्व, आज क्यों शुभ माना जाता है बर्तन खरीदना

आज धनतेरस है, आज सोने-चांदी की खरीदारी शुभ मानी जाती है. बर्तन भी खरीदना शुभ माना जाता है. जानें इन सबके पीछे का धार्मिक महत्व क्या है. 

धनतेरस पर जानें सोने-चांदी की धार्मिक महत्व, आज क्यों शुभ माना जाता है बर्तन खरीदना

नई दिल्ली: आज धनतेरस है. हमारे देश में सर्वाधिक धूमधाम से मनाए जाने वाले त्योहार दिवाली की शुरुआत धनतेरस से हो जाती है. धनतेरस छोटी दिवाली से एक दिन पहले मनाया जाता है. इस दिन कोई भी समान लेना बहुत ही शुभ माना जाता है. धनतेरस पूजा को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है. आज सोने-चांदी की खरीदारी शुभ मानी जाती है. बर्तन भी खरीदना शुभ माना जाता है. जानें इन सबके पीछे का धार्मिक महत्व क्या है. 

दरअसल, धनतेरस का दिन धन्वंतरि त्रयोदशी या धन्वंतरि जयंती भी कहलाता है. धन्वंतरि आयुर्वेद के देवता माने जाते हैं. इस दिन गणेश-लक्ष्मी को घर लाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन कोई किसी को उधार नहीं देता. है. इसलिए सभी वस्तुएं नगद में खरीदकर लाई जाती हैं. इस दिन लक्ष्मी और कुबेर की पूजा के साथ-साथ यमराज की भी पूजा की जाती है. पूरे वर्ष में एक मात्र यही वह दिन है, जब मृत्यु के देवता यमराज की पूजा की जाती है. यह पूजा दिन में नहीं की जाती, अपितु रात होते समय यमराज के निमित्त एक दीपक जलाया जाता है.

सोने का धार्मिक महत्व
सोना भारतीय संस्कृति में अहम स्थान रखता है. ऋग्वेद के हिरण्यगर्भ सूक्त में उल्लेख है कि सृष्टि हिरण्य गर्भ यानी स्वर्ण के गर्भ से आरंभ हुई थी. हिंदू सोने को दुनिया को चलाने वाली सबसे बड़ी शक्ति सूर्य का प्रतीक भी मानते हैं. एक और कथा इससे जुड़ी हुई है. हेम नाम के राजा के यहां पुत्र के जन्म के समय भविष्यवाणी हुई कि शादी के चार दिन बाद इसकी मृत्यु हो जाएगी. राजकुमार ने जब विवाह किया तो यमराज उसे लेने आ गए. उसकी पत्नी ने गहनों का ढेर लगाकर यमराज का रास्ता रोक दिया और यम राजकुमार को नहीं ले जा सके और इस तरह से राजकुमार की मृत्यु टल गई. मान्यता है कि इसलिए महिलाएं इतना स्वर्ण खरीदती हैं.

क्यों खरीदे जाते हैं बर्तन
वैसे तो धनतेरस के दिन चांदी खरीदने की भी प्रथा है. अगर संभव न हो तो कोई बर्तन खरीदें. इसका यह कारण माना जाता है कि चांदी चंद्रमा का प्रतीक है, जो शीतलता प्रदान करता है और मन में संतोष रूपी धन का वास होता है. संतोष को सबसे बड़ा धन कहा गया है. जिसके पास संतोष है, वह स्वस्थ है सुखी है और वही सबसे धनवान है. धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी इस दिन का विशेष महत्व है. शास्त्रों में इस बारे में कहा गया है कि जिन परिवारों में धनतेरस के दिन यमराज के निमित्त दीपदान किया जाता है, वहां अकाल मृत्यु नहीं होती. घरों में दीपावली की सजावट भी इसी दिन से प्रारंभ हो जाती है. इस दिन घरों को स्वच्छ कर, रंगोली बनाकर सांझ के समय दीपक जलाकर लक्ष्मी जी का आवाहन किया जाता है. इस दिन पुराने बर्तनों को बदलना व नए बर्तन खरीदना शुभ माना गया है. धनतेरस को चांदी के बर्तन खरीदने से तो अत्यधिक पुण्य लाभ होता है. इस दिन कार्तिक स्नान करके प्रदोष काल में घाट, गौशालाएं, कुआं, बावली, मंदिर आदि स्थानों पर तीन दिन तक दीपक जलाना चाहिए.

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ऐसे करें धनतेरस पूजा
धनतेरस को मृत्यु के देवता यमराज जी की पूजा करने के लिए संध्याकाल में एक वेदी (पट्टा) पर रोली से स्वास्तिक बनाइए. उस स्वास्तिक पर एक दीपक रखकर उसे प्रज्ज्वलित करें और उसमें एक छिद्रयुक्त कौड़ी डाल दें. अब इस दीपक के चारों ओर तीन बार गंगाजल छिड़कें. दीपक को रोली से तिलक लगाकर अक्षत और मिष्ठान आदि चढ़ाएं. इसके बाद इसमें कुछ दक्षिणा आदि रख दीजिए, जिसे बाद में किसी ब्राह्मण को दे दीजिए. अब दीपक पर पुष्पादि अर्पण करें. इसके बाद हाथ जोड़कर दीपक को प्रणाम करें और परिवार के प्रत्येक सदस्य को तिलक लगाएं. इसके बाद इस दीपक को अपने मुख्यद्वार के दाहिनी और रख दीजिए. यम पूजन करने के बाद अंत में धनवंतरि की पूजा करें.