close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

अगर आपकी पंच लाइन में है दम तो लोकपाल उसे बनाएगा अपना स्लोगन

जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष को देश का पहला लोकपाल नियुक्त किया गया है.न्यायमूर्ति घोष (66) मई 2017 में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश पद से सेवानिवृत्त हुए थे.

अगर आपकी पंच लाइन में है दम तो लोकपाल उसे बनाएगा अपना स्लोगन
जीतने वाले को 25 हजार कैश ईनाम भी दिया जाएगा. (देश के पहले लोकपाल जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष)

नई दिल्ली: नवगठित लोकपाल ने अपने प्रतीक चिह्न (लोगो) और ध्येय वाक्य (मोटो) के लिए एक प्रतियोगिता शुरू की है. इस संबंध में एक अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि प्रतियोगिता के संदर्भ में आधिकारिक घोषणा की गई है. लोगों से प्रविष्टियां मांगी गई हैं और 25 हजार रुपये के नकद पुरस्कार की पेशकश की गई है. बता दें, जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष को देश का पहला लोकपाल नियुक्त किया गया है.न्यायमूर्ति घोष (66) मई 2017 में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश पद से सेवानिवृत्त हुए थे. जब लोकपाल अध्यक्ष के पद के लिए उनके नाम की घोषणा हुई तो वह राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य थे.

लोकपाल और लोकायुक्त कानून 2013 के तहत गठित लोकपाल एक संवैधानिक निकाय है. इसका गठन कुछ खास श्रेणियों के नौकरशाहों/पदाधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए किया गया है. प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए लोग 13 जून तक अपनी प्रविष्टियां भेज सकते हैं. प्रविष्टि मांगने वाली आधिकारिक घोषणा के अनुसार मोटो और लोगो आकर्षक होना चाहिए और यह चार-पांच शब्दों से अधिक का नहीं होना चाहिए. इसमें कहा गया कि मोटो और लोगो की भाषा हिन्दी/संस्कृत/अंग्रेजी हो सकती है.

आधिकारिक घोषणा में कहा गया है कि तय तिथि के दायरे में मिलने वाली सभी प्रविष्टियों का मूल्यांकन लोकपाल द्वारा गठित एक चयन समिति करेगी. चयन समिति का निर्णय अंतिम और सभी प्रतिभागियों के लिए बाध्यकारी होगा. अधिकारियों ने बताया कि लोकपाल के ध्येय वाक्य के लिए अब तक 1,239 तथा प्रतीक चिह्न के लिए कम से कम 365 प्रविष्टियां मिल चुकी हैं. राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने 23 मार्च को लोकपाल के अध्यक्ष के रूप में न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष को शपथ दिलाई थी.