मेक इन इंडिया: अरुण जेटली ने उद्योग धंधा करने वालों की राह की सभी बाधाएं दूर करने का किया वादा

सरकार ने देश में उद्योग धंधा करने वालों की राह की बाधाएं दूर करने और प्रतिस्पर्धात्मक कर प्रणाली सुनिश्चित करने का आज वायदा किया ताकि देश को विनिर्माण क्षेत्र का एक प्रमुख केंद्र बनाने के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को बढ़ावा दिया जा सके। हालांकि उसने आर्थिक नरमी के लिए उच्च ब्याज दर को जिम्मेदार ठहराया।

मेक इन इंडिया: अरुण जेटली ने उद्योग धंधा करने वालों की राह की सभी बाधाएं दूर करने का किया वादा

नई दिल्ली : सरकार ने देश में उद्योग धंधा करने वालों की राह की बाधाएं दूर करने और प्रतिस्पर्धात्मक कर प्रणाली सुनिश्चित करने का आज वायदा किया ताकि देश को विनिर्माण क्षेत्र का एक प्रमुख केंद्र बनाने के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को बढ़ावा दिया जा सके। हालांकि उसने आर्थिक नरमी के लिए उच्च ब्याज दर को जिम्मेदार ठहराया।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यहां मेक इन इंडिया पर एक दिवसीय कार्यशाला में कहा कि इस अभियान का लक्ष्य है घरेलू और निर्यात बाजार के लिए कम लागत में अच्छी गुणवत्ता वाले विनिर्माण करना। आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन की मौद्रिक नीति की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि उंची ब्याज दर वह ‘अकेला कारण’ है जिसके कारण विनिर्माण क्षेत्र में नरमी है।

उन्होंने कहा, विनिर्माण क्षेत्र में प्रवेश को आसान करना होगा। हमारे यहां की आरंभिक बाधाएं कम होनी चाहिए और हो सके तो इन्हें खत्म कर दिया जाए। यदि हम दरवाजे बंद करते हैं तो निवेश नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि बाजार में नकदी सुनिश्चित करने की जरूरत है।

जेटली ने कहा, हमें पूंजी उपलब्ध कराने की जरूरत है, हमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि ऐसे उद्योगों को पर्याप्त पूंजी प्रदान करने की स्थिति में हैं जो नकदी संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस सप्ताह बैंकों की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली बैठक और मेक इन इंडिया अभियान से विनिर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा।

जेटली ने राजन की मोदी के प्रिय कार्यक्रम ‘मेक इन इंडिया’ की आलोचना को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह कार्यक्रम भारत में कम लागत पर अच्छी गुणवत्ता वाले उत्पादों के विनिर्माण की क्षमता से जुड़ा है। इसका इस बात से कोई लेना-देना नहीं है कि इन उत्पादों की बिक्री भारत में होगी या विदेश में।

जेटली ने कहा, मेक इन इंडिया के तहत उत्पाद भारतीय उपभोक्ताओं के लिए बनें या बाहर के उपभोक्ताओं के लिए, यह प्रासंगिक नहीं है। आज का सिद्धांत यह कहता है कि विश्व भर के उपभोक्ता ऐसे उत्पाद खरीदना चाहते हैं जो सस्ते हों और अच्छी गुणवत्ता वाले हों। वे ऐसी सेवाएं लेते हैं जो सस्ती और अच्छी गुणवत्ता वाली हों। इससे पहले इस महीने राजन ने नयी सरकार के मेक इन इंडिया अभियान के संबंध में आगाह करते हुए कहा था कि इसी भूमिका चीन के निर्यातोन्मुख आर्थिक वृद्धि के माडल जैसी दिखती है जबकि भारत का अभियान ‘भारत के लिए बनाओ’ (मेक फॉर इंडिया) होना चाहिए जो घरेलू बाजार पर केंद्रित हो।

राजन ने कहा था कि वह इस बात को लेकर आगाह करना चाहते है केवल विनिर्माण जैसे क्षेत्र को केवल इस लिए नहीं चुन लिया जाना चाहिए कि वह चीन में सफल रहा। उन्होंने कहा, भारत अलग है और अलग दौर में विकास कर रहा है। क्या सफल होगा, इसके बारे में हमें सावधानी से विचार करना चाहिए। घरेलू विनिर्माण के महत्व पर जोर देते हुए जेटली ने कहा, यदि में लागत और गुणवत्ता में मात खाते हैं तो हमारे सामने ऐसी स्थिति का खतरा होगा कि विनिर्माता देश के बजाय व्यापारी बन जाएंगे।

कराधान कानूनों में स्थिरता पर जोर देते हुए जेटली ने कहा कि भारत में, ऐसी नीतियां हीं चल सकती जो बारी बारी से बदली हो और हम अपने कारोबार की आधी अवधि में पायें कि जिस नीति के आधार पर कारोबार की योजना बनायी गयी थी वह बदल गयी है। उन्होंने कहा, यही वजह है कि पिछली तारीख से कर लगाना नीतिगत स्थिरता का अभाव बन गया और वैश्विक स्तर पर भारत के लिए एक नयी स्थिति पैदा करने वाली घड़ी बन गया। उच्च ब्याज दर व्यवस्था के बारे मे उन्होंने कहा, पिछले कुछ महीनों या साल में (पूंजी की लागत) इकलौती वजह रहा है जिसने विनिर्माण वृद्धि में नरमी आयी है। रिण कम लिया गया, बुनियादी ढांचे का निर्माण धीमा रहा। उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न मंत्रालयों, राज्यों, नियामकीय प्रणालियों में परियोजनाओं का कार्यान्वयन तेज करने जरूरत है।

वृद्धि को प्रोत्साहित करने के लिए साझा राष्ट्रीय दृष्टि का आह्वान करते हुए जेटली ने कहा, यह सिर्फ राजनीतिक दलों के बीच का ममला नहीं है। यह सिर्फ केंद्र और राज्य सरकारों के बीच की बात नहीं है यह उन अन्य संस्थानों के बीच की भी बात है जो शासन व्यवस्था की बेदी बन चुके हैं। उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया है कि आज न्यायिक संस्थान न्याय करने के साथ साथ कुछ ऐसे क्षेत्रों शासन व्यवस्था का हिस्सा बन गये हैं।

वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि चालू वित्त वर्ष में तेज होगी और 2015-16 में काफी बेहतर होगी। उन्होंने यहां कहा, पिछला दो साल आर्थिक नरमी का दौर रहा। यह साल थोड़ा बेहतर रहेगा और अगले साल काफी बेहतर होगा। सरकार को उम्मीद है कि 2014-15 में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 5.5 प्रतिशत रहेगी जो पिछले साल की 4.7 प्रतिशत की वृद्धि से अधिक है।

कारोबार करने में आसानी के संबंध में जेटली में कहा, पिछले कुछ सालों में क्या हुआ जिससे कारोबार :भारत में: करने में जटिलता बढ़ी है? क्या यह कराधान प्रणाली से जुड़ी अनिश्चितता थी जिससे निवेशक भयभीत हुए? क्या इसके कारण ऐसे संयंत्र बंद नहीं हुए जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक थे। सख्त भूमि अधिग्रहण कानून का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अपने-आप में यह कानून ही निवेशकों के लिए जटिलताएं पैदा करेगा। जेटली ने कहा, खतरा तब पैदा होगा यदि हम लागत के मामले में मात खा जाएं यदि गुणवत्ता में पिछड़ जाएं, तो हम ऐसी स्थिति में होंगे जबकि हम विनिर्माता देश के बजाय व्यापारी देश बन जाएंगे।’

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