‘मेक इन इंडिया’ फिलहाल सपना है: एसोचैम

उद्योग मण्डल ‘एसोचैम’ का मानना है कि केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार का ‘मेक इन इंडिया’ का मंसूबा फिलहाल सपने के रूप में है और इसे जमीन पर लाने के लिये सकारात्मक कदम उठाते हुए निवेश के लिये उपयुक्त माहौल बनाना होगा।

‘मेक इन इंडिया’ फिलहाल सपना है: एसोचैम

लखनऊ : उद्योग मण्डल ‘एसोचैम’ का मानना है कि केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार का ‘मेक इन इंडिया’ का मंसूबा फिलहाल सपने के रूप में है और इसे जमीन पर लाने के लिये सकारात्मक कदम उठाते हुए निवेश के लिये उपयुक्त माहौल बनाना होगा।

एसोचैम के राष्ट्रीय महासचिव डी. एस. रावत ने आज यहां संगठन द्वारा तैयार ‘उत्तर प्रदेशः दहाई अंक में वृद्धि की ओर अग्रसर’ विषयक रिपोर्ट जारी करते हुए संवाददाताओं से बातचीत में यह बात कही। उन्होंने कहा मेक इन इंडिया अभी सपने के रूप में हैं। इसके लिये भारी निवेश लाना होगा, निवेश तब आएगा जब उसकी खपत होगी। देश में फिलहाल निवेश का माहौल नहीं बन पाया है। अब सारी निगाहें आगामी बजट पर लगी हैं। उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ की परिकल्पना को मूर्त रूप देने के लिये केन्द्र सरकार को अग्रगामी कदम उठाने होंगे। उत्तर प्रदेश में ‘मेक इन इंडिया’ को साकार करने के लिये बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने की जरूरत है।

रावत ने अध्ययन रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के प्रोत्साहनपूर्ण और उत्साहवर्धक नेतृत्व की वजह से राज्य ने आर्थिक विकास, मूलभूत ढांचागत विकास, उद्योग, सेवा क्षेत्र वृद्धि तथा श्रम उत्पादकता के मामले में राष्ट्रीय औसत को पछाड़ना शुरू कर दिया है। अगर यह सिलसिला जारी रहा तो वर्ष 2016-17 तक उत्तर प्रदेश दोहरे अंक यानी 10 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि हासिल कर लेगा। उन्होंने कहा कि पिछले दो साल के दौरान प्रदेश सरकार ने काफी अच्छी तरीके से काम किया है और चालू वित्तीय वर्ष में प्रदेश की वृद्धि दर 9.3 प्रतिशत रहने की सम्भावना है।

रावत ने माना कि पिछले दो वर्षों से उत्तर प्रदेश के बारे में निवेशकों का नजरिया और रवैया बदला है। उन्होंने बताया कि एसोचैम के अध्ययन के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2004-05 से 2013-14 के बीच उत्तर प्रदेश 6.7 प्रतिशत की वाषिर्क वृद्धि दर (सीएजीआर) हासिल कर राष्ट्रीय स्तर से आगे निकल गया। इस अवधि में राष्ट्रीय स्तर पर 4.6 फीसद सालाना वृद्धि दर्ज की गई।

अध्ययन के मुताबिक उत्तर प्रदेश वर्ष 2013-14 में सेवा क्षेत्र में हासिल विकास दर के मामले में भी आगे रहा है। इस अवधि में सूबे ने सेवा क्षेत्र में 8.। प्रतिशत वृद्धि हासिल की जबकि इसी अवधि में राष्ट्रीय औसत 4.7 फीसद रहा।

हालांकि, अध्ययन में यह बात भी सामने आयी है कि सबसे बड़ा खाद्यान्न उत्पादक, सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक तथा तीसरा सबसे बड़ा औद्योगिक वस्तु उत्पादक होने के बावजूद उत्तर प्रदेश के कुल कृषि उत्पादन में कमी आयी है। कृषि तथा उससे सम्बन्धित गतिविधियों के मामले में उत्तर प्रदेश ने 4.7 प्रतिशत सकल वाषिर्क वृद्धि दर के राष्ट्रीय औसत के मुकाबले अपेक्षाकृत काफी धीमी यानी 2.6 प्रतिशत की दर हासिल की है।

रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश ने सड़क, उर्जा, शिक्षा तथा श्रम उत्पादकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। हालांकि नये उद्यमों के मामले में सूबा आशानुरूप प्रदर्शन नहीं कर सका है। साथ ही कुटीर, लघु तथा मंझोले उद्योग क्षेत्र (एमएसएमई) पर भी ध्यान दिये जाने की जरूरत है।

उद्योग मण्डल ने प्रदेश सरकार को यह भी सुझाव दिया है कि वह एमएसएमई क्षेत्र की वित्त, प्रौद्योगिकी, कौशल विकास, नीति तथा उसके क्रियान्वयन एवं अन्य चीजों से जुड़ी समस्याओं को सुलझाकर प्रदेश में उद्यमिता को बढ़ावा दे।

 

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