'मनमोहन सिंह से डांट खानी पड़ी थी तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा को'

खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख तेल उत्पादक एवं निर्यातक देशों द्वारा भारत जैसे एशियायी देशों को कच्चा तेल यूरोप और अमेरिकी ग्राहकों की तुलना में उंचे दाम पर बेचने का मुद्दा सउदी अरब के सामने उठाने पर तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा को उस समय के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ‘डांट’ खानी पड़ी थी जबकि ‘पेट्रोलियम नस्लभेद’ का यह मुद्दा उससे पहले के भारतीय मंत्री खुले मंचों पर उठा चुके थे। यह बात एक नयी पुस्तक में कही गयी है।

'मनमोहन सिंह से डांट खानी पड़ी थी तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा को'

नई दिल्ली: खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख तेल उत्पादक एवं निर्यातक देशों द्वारा भारत जैसे एशियायी देशों को कच्चा तेल यूरोप और अमेरिकी ग्राहकों की तुलना में उंचे दाम पर बेचने का मुद्दा सउदी अरब के सामने उठाने पर तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा को उस समय के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ‘डांट’ खानी पड़ी थी जबकि ‘पेट्रोलियम नस्लभेद’ का यह मुद्दा उससे पहले के भारतीय मंत्री खुले मंचों पर उठा चुके थे। यह बात एक नयी पुस्तक में कही गयी है।

पुस्तक के अनुसार पश्चिम एशिया के तेल निर्यातक देश भारत जैसे एशियायी देशों से प्रति बैरल 6 डालर तक उंचा दाम वसूलते रहे थे। इसे ‘एशियन प्रीमियम’ कहा जाता है। यह सबको अच्छी तरह पता था पर इसको द्विपक्षीय मंचों पर कभी भी स्पष्ट तौर पर नहीं उठाया गया था। सर्वविदित था और इसका कोई औपचारिक हिसाब किताब नहीं रखा जाता। बावजूद इसके सउदी अरब जैसे खाड़ी के प्रमुख तेल उत्पादक देश ऐसी किसी बात के होने से सार्वजनिक तौर पर इनकार करते थे।

पत्रकार राजीव जयसवाल की पुस्तक ‘दी लाबिस्ट: अन टोल्ड स्टोरी ऑफ ऑयल, गैस एण्ड एनर्जी’ के अनुसार देवड़ा 27 फरवरी से एक मार्च 2010 तक मनमोहन सिंह की सउदी अरब यात्रा में भारत के सरकारी प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे। उन्होंने तत्कालीन सउदी शाह अब्दुल्ला बिन अब्दुलअजीज अल सउद के समक्ष पेट्रोलिमय रंगभेद यानी कीमत भेद का यह मुद्दा उठाया था।

किताब के अनुसार सउदी शाह ने कह दिया कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है पर देवड़ा को ‘बातचीत के एजेंडा से हट कर यह अप्रिय बात उठाने के लिए डांट खानी पड़ी।’ किताब में कहा गया है कि देवड़ा ने इस घटना की पुष्टि की थी और यह भी कहा था कि वह प्रधानमंत्री सिंह के रवैऐ से क्षुब्ध थे। इसमें देवड़ा के हवाले से कहा गया है, ‘हम कोई खाने पीने और मौज लेने के लिए सउदी अरब नहीं गए थे। पेट्रोलियम मंत्री के नाते यह मेरा कर्तव्य था कि मैं यह मुद्दा उठाउं। उन्हें वहां (मनमोहन सिंह) चाहिए था कि वे मेरा समर्थन करते।’ कीमत भेदभाव का मुद्दा पहले भी भारत के पेट्रोलियम मंत्रियों को सालता रहा है। पुस्तक के अनुसार देवड़ा के पूर्ववर्ती मणिशंकर अय्यर ने सितंबर 2004 में वियना में हुई एक संगोष्ठी में यूरोपीय और अमेरिकी रिफायनरियों के मुकाबले एशियायी खरीदारों के साथ भेदभाव का मुद्दा उठाया था। देवड़ा का 24 नवंबर 2014 को मुंबई में निधन हो गया।

मोदी सरकार ने भी इस मुद्दे को उठाया है। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 3 जून 2015 को ओपेक की एक संगोष्ठी में यह मुद्दा उठाया था। भारतीय तेलशोधन कंपनियों का मानना है कि यदि उन्हें अमेरिका और यूरोप की कंपनियों के भाव पर कच्चा तेल मिले तो उनकी रिफायनरी मार्जिन :लाभ: प्रति बैरल दो डालर तक सुधर जाएगा। जयसवाल इस समय हिंदी अखबार अमर उजाला के बिजनेस एडिटर है। उनकी यह किताब सत्ता के गलियारों में पेट्रोलियम क्षेत्र में हित रखने वाले विभिन्न समूहों के बीच खींच-तान और लुका छिपी के खेल पर एक टिप्पणी जैसी है।