बढ़ती अर्थव्यवस्था के बाद भी कई लोग गरीबी रेखा से नीचे रह रहे हैं: NGT अध्यक्ष

न्यायमूर्ति गोयल ने कहा, ‘‘हमारी अर्थव्यवस्था बेहद तेजी से बढ़ रही है. लेकिन अब भी काफी तादाद में ऐसे लोग हैं जो गरीबी रेखा के नीचे रह रहे हैं.

बढ़ती अर्थव्यवस्था के बाद भी कई लोग गरीबी रेखा से नीचे रह रहे हैं: NGT अध्यक्ष
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल.(फाइल फोटो)

गुवाहाटी: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल ने रविवार को कहा कि ‘‘बेहद तेजी’’ से बढ़ती अपनी अर्थव्यवस्था के साथ भारत ने दुनिया में गौरव हासिल किया है. हालांकि अब भी देश में काफी तादाद में लोग गरीबी रेखा से नीचे रह रहे हैं. एनजीटी अध्यक्ष ने संविधान दिवस की पूर्व संध्या पर यहां राजभवन में आयोजित कार्यक्रम में खेद जताते हुए कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि देश विकास कर रहा है, लेकिन यह संविधान निर्माता रहे स्वतंत्रता सेनानियों की उम्मीदों को पूरा करने के लिये ‘‘काफी’’ नहीं है.

न्यायमूर्ति गोयल ने कहा, ‘‘हमारी अर्थव्यवस्था बेहद तेजी से बढ़ रही है. एक राष्ट्र के तौर पर दुनिया में हमारा गौरव बढ़ा है. लेकिन अब भी काफी तादाद में ऐसे लोग हैं जो गरीबी रेखा के नीचे रह रहे हैं.  हमारे यहां ऐसे भी लोग हैं जो भोजन आश्रय और कपड़े से वंचित हैं. ’’ उन्होंने कहा कि ओडिशा के कई जिलों में ऐसे लोग हैं जिनके पास अपना तन ढंकने के लिये पर्याप्त कपड़े नहीं हैं.

आजादी के 70 साल बाद भी अपना तन ढंकने के लिये वे एकमात्र कपड़े का इस्तेमाल करते हैं. उन्होंने कहा कि कानून निर्माता, प्रशासक, नेता, न्यायाधीश और वकील न्याय सुनिश्चित करने के लिये प्रतिबद्ध हैं.  उन्होंने कहा, ‘‘न्याय से मतलब है, हमें निश्चित तौर पर सभी को न्यूनतम जरूरत की गारंटी देनी चाहिए. ’’

असम के राज्यपाल जगदीश मुखी ने कहा कि भारत का संविधान लोगों के मौलिक अधिकारों के संरक्षण और नीति निर्देशक तत्वों से लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने का एक सही मेल है. उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पास एक ऐसा संविधान है जो मजबूत, व्यापक, सुदृढ़ और क्रियाशील है. ’’ राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय एवं न्यायिक अकादमी, असम के कुलपति डॉ. जे एस पाटिल ने संविधान के इतिहास पर कहा कि संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को भारत का संविधान पारित किया और 26 जनवरी 1950 को यह लागू हुआ. 

इनपुट भाषा से भी