अब 65 साल की उम्र में भी कर सकेंगे NPS में प्रवेश, 70 की उम्र तक रख सकेंगे जारी

पीएफआरडीए ने एनपीएस में प्रवेश की आयु को 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष किए जाने का प्रस्ताव रखा है.

अब 65 साल की उम्र में भी कर सकेंगे NPS में प्रवेश, 70 की उम्र तक रख सकेंगे जारी
एनपीएस आज विश्व की सबसे कम लागत की पेंशन योजना है. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) में प्रवेश की उम्र सीमा बढ़ाकर 65 वर्ष किए जाने का प्रस्ताव किया है. इसे वह 70 वर्ष की आयु तक जारी रख सकते हैं. वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार (15 सितंबर) को एक बयान जारी कर कहा कि पीएफआरडीए ने एनपीएस में प्रवेश की आयु को 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष किए जाने का प्रस्ताव रखा है. इसे 70 वर्ष की आयु तक जारी रखने का विकल्प होगा.

पीएफआरडीए के चेयरमैन हेमंत कॉन्ट्रैक्टर ने कहा कि कंपनियों को एनपीएस को एक अतिरिक्त सेवानिवृत्ति लाभ के रूप में इस्तेमाल करने की संभावना पर विचार करना चाहिए. खासकर के उन स्थानों पर जहां सेवानिवृत्ति निधि का लाभ उपलब्ध नहीं है और उनके कर्मचारी केवल अनिवार्य कर्मचारी भविष्य निधि की योजनाओं के तहत ही लाभांवित होते हैं.

नेशनल पेंशन स्कीम में शामिल होने की उम्र सीमा 65 वर्ष तक बढ़ी

पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने सोमवार (11 सितंबर) को राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) में जुड़ने की ऊपरी आयु सीमा को मौजूदा 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष करने की घोषणा की. पीएफआरडीए के अध्यक्ष हेमंत कांट्रेक्टर ने 'वृद्धावस्था फंड को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली में स्थांतरित करने' के कार्यक्रम के दौरान कहा, "पेंशन नियामक बोर्ड ने पहले ही इस बदलाव को हरी झंडी दे दी है और जल्द ही इस संबंध में अधिसूचना जारी की जाएगी."

उन्होंने कहा, "एनपीएस में अभी 18 से 60 वर्ष के उम्र के लोग शामिल हो सकते हैं और हमारे बोर्ड ने उम्रसीमा बढ़ाकर 65 वर्ष तक करने को मंजूरी दे दी है." उन्होंने कहा कि इस योजना में उम्रसीमा बढ़ाए जाने का विकल्प है और उम्रसीमा बढ़ाकर 70 वर्ष तक करने की योजना है. पेंशन में रिफॉर्म करने के सरकार के निर्णय के पीछे तर्क देते हुए उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य पोर्टेबिलिटी को बढ़ाना या एनपीएस में वृद्धावस्था फंड को स्थानांतरित कर इसे ज्यादा आकर्षक और ग्राहकों के लिए आसान बनाना है.

कांट्रेक्टर ने कहा, "हमारा उद्देश्य ऐसे सेक्टर के लिए पेंशन योजना शुरू करना है जहां यह उपलब्ध नहीं है. केवल 15 से 16 प्रतिशत कर्मचारियों को पेंशन का लाभ मिल रहा है, क्योंकि भारत में लगभग 85 प्रतिशत कर्मचारी असंगठित और अनियमित क्षेत्रों में काम करते हैं."

एनपीएस के फायदे के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि यह आज विश्व की सबसे कम लागत की पेंशन योजना है. लागत बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि लगातार 25 से 30 वर्षों तक एक प्रतिशत के भी फर्क से कम से कम 15 से 16 प्रतिशत का फर्क पैदा हो सकता है. उन्होंने कहा, "हमारा फंड प्रबंधन खर्च सबसे कम 0.01 प्रतिशत है. जबकि दूसरे के 0.4 या 0.5 प्रतिशत हैं."