अधर में लटक सकता है मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट

 सूत्रों के मुताबिक बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की राह में एक दो नहीं बल्कि 5 बड़े ऐसे रोड़े हैं, जिनके सरकार बुलेट ट्रेन को लेकर तय समसीमा को बदलाव कर आगे बढ़ा सकती है.

अधर में लटक सकता है मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट
बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में हो सकती है देरी.

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बेहद महत्वकांक्षी परियोजना बुलेट ट्रेन (Bullet train) अधर में लटक सकती है. सूत्रों के मुताबिक बुलेट ट्रेन (Bullet train) प्रोजेक्ट को 2024 तक पूरा करना और बुलेट ट्रेन (Bullet train) को चलाने का लक्ष्य मुश्किल ही नही अब असंभव सा नजर आ रहा है. सूत्रों के मुताबिक बुलेट ट्रेन (Bullet train) प्रोजेक्ट की राह में एक दो नहीं बल्कि 5 बड़े ऐसे रोड़े हैं, जिनके सरकार बुलेट ट्रेन (Bullet train) को लेकर तय समसीमा को बदलाव कर आगे बढ़ा सकती है.

क्यों लटक सकता है बुलेट ट्रेन (Bullet train) प्रोजेक्ट-:

1. सबसे पहले और बड़ा कारण है महाराष्ट्र में राजनैतिक बदलाव. चूंकि महाराष्ट्र में अब शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस की महागठबंधन सरकार है और शिवसेना ने पव्हले से ही साफ कर दिया है कि बुलेट ट्रेन (Bullet train) प्रोजेक्ट इस राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में नही है. लिहाजा ये साफ है कि मुंबई-अहमबदाबाद बुलेट ट्रेन (Bullet train) की राह आसान नही होगी.

2. बुलेट ट्रेन (Bullet train) प्रोजेक्ट से जुड़े वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक- बुलेट ट्रेन (Bullet train) प्रोजेक्ट के लिए महाराष्ट्र के हिस्से में 5000 करोड़ रुपए खर्च करने का या भार उठाने के ज़िम्मा आया था. अब मुंबई में BKC या बांद्रा कुर्ला काम्प्लेक्स में बुलेट ट्रेन (Bullet train) का स्टेशन बनाना है. तत्कालीन राज्य सरकार ने बीकेसी ज़मीन का लैंड वैल्यूएशन तकरीबन 3000 करोड़ लगाया था और केंद्र से कहा कि बीकेसी की ज़मीन बुलेट ट्रेन (Bullet train) के लिए देने के बाद वह सिर्फ 1500 करोड़ का ही अतिरिख भार इस प्रोजेक्ट के लिए उठाएंगे. इस बड़े अनसुलझे पेंच के चलते भी  प्रोजेक्ट लटकना तय माना जा रहा है.

3. तीसरा बड़ा मुद्दा ज़मीन अधिग्रहण का है. महाराष्ट्र के ही पालघर इलाके में 300 हेक्टेयर ज़मीन का अधिग्रहण किया जाना है. सूत्रों के मुताबिक अब तक सिर्फ 30 हेक्टेयर ज़मीन का ही अधिग्रहण हो पाया है. और ऐसे में अधिग्रहण एक बड़ा रोड़ा बन गया है.

4. महाराष्ट्र की नई सरकार ने भी इशारों में कहा है कि बुलेट ट्रेन (Bullet train) परियोजना क्वन्द्र की है और केंद्र ही इसमें पैसा लवाये जबकि राज्य सरकार अपने हिस्से का पैसा किसानों के लिए खर्च करेगी.

5. शिवसेना के अंदरखाते आदित्य ठाकरे को जनता के बीच सुपरहीरो की छवि के साथ पेश करने की है. हाल ही में आरे फारेस्ट मामले को लेके भी आदित्य ठाकरे ने अहम भूमिका निभाई थी. शिवसेना सूत्रों के मुताबिक पार्टी एक बाए फिर बुलेट ट्रेन (Bullet train) के लियव ठाणे इलाके में मैन्ग्रोव को खत्म किये जाने का विरोध कर सकती है.

ऐसे में केंद्र सरकार के लिए बुलेट ट्रेन (Bullet train) प्रोजेक्ट को 2024 तक पूरा कर पाना लगभग असम्भव है. सूत्रों के मुताबिक- केंद्र सरकार ने बुलेट ट्रेन (Bullet train) के लिए नई डेडलाइन तय कर सकती है. 2029 नई डेडलाइन घोषित की जा सकती है बुलेट ट्रेन (Bullet train) के लिए सरकार बुलेट ट्रेन (Bullet train) प्रोजेक्ट की समय सीमा को और 5 साल आगे बढ़ा सकती है.

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