20 महीने बाद रतन टाटा के सामने 'हारे' सायरस मिस्त्री, NCLT में याचिका खारिज

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने टाटा संस के खिलाफ साइरस मिस्त्री की याचिका को खारिज कर दिया है. मिस्त्री के लिए ये बहुत बड़ा झटका है.

20 महीने बाद रतन टाटा के सामने 'हारे' सायरस मिस्त्री, NCLT में याचिका खारिज
फाइल फोटो

नई दिल्ली: टाटा संस के पूर्व चेयरमैन सायरस मिस्त्री को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) से बड़ा झटका लगा है. नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने टाटा संस के खिलाफ सायरस मिस्त्री की याचिका को खारिज कर दिया. सायरस मिस्त्री ने चेयरमैन पद से हटाए जाने के खिलाफ याचिका दायर की थी. यह विवाद करीब 20 महीने से चल रहा था. सायरस मिस्त्री पर जानकारी लीक करने का आरोप था. ट्रिब्यूनल ने कहा कि टाटा संस के निदेशक मंडल और उसके सदस्यों को साइरस मिस्त्री पर भरोसा नहीं रह गया था.

4 साल में ही हटाए गए मिस्त्री
आपको बता दें, सायरस मिस्त्री को 30 साल के लिए टाटा संस का चेयरमैन बनाया गया था, लेकिन उन्हें चार साल बाद ही पद से हटा दिया गया. सायरस मिस्त्री पर जानकारी लीक करने का आरोप था. साथ ही समूह का मुनाफा लगातार गिर रहा था. इसके लिए पहले भी कई बार सायरस मिस्त्री को बोर्ड की तरफ से तलब किया गया था. सायरस मिस्त्री के कार्यकाल में सिर्फ टीसीएस को छोड़कर सभी कंपनियां लगातार घाटे में थीं. टाटा मोटर्स और टाटा स्टील का मुनाफा लगातार तीन तिमाही में रिकॉर्ड गिरावट आई थी.

ये थी निकाले जाने की वजह
रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाटा संस में 66 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट को समूह कंपनियों की ओर से मिलने वाले लाभांश में कमी आई थी, यही वजह थी कि मिस्त्री को अचानक बाहर कर दिया गया. मिस्त्री के बाद एक बार फिर रतन टाटा ने अंतरिम चेयरमैन के रूप में समूह की बागडोर संभाली. इसके बाद टीसीएस के प्रमुख रहे एन चंद्रशेखर को टाटा समूह की जिम्मेदारी सौंपी गई.

20 महीने बाद आया फैसला
एनसीएलटी का यह फैसला टाटा संस और सायरस मिस्त्री के बीच 20 महीने तक कड़वे कानूनी जंग के बाद आया है. मिस्त्री की ओर से दिसंबर 2016 में दायर याचिका में टाटा ग्रुप की ऑपरेटिंग कंपनियों में रतन टाटा और टाटा ट्रस्ट के एन ए सूनावाला के हस्तक्षेप के कारण टाटा संस में गवर्नेंस कमजोर होने और बिजनेस को लेकर गलत फैसले किए जाने का भी आरोप लगाया था. हालांकि, अब भी मिस्त्री नेशनल कंपनी लॉ अपेलिट ट्रिब्यूनल में जा सकते हैं. 

बोर्ड के पास पद से हटाने का अधिकार
एनसीएलटी ने अपने आदेश में कहा कि बोर्ड के पास पद से हटाने का अधिकार है. एनसीएलटी ने रतन टाटा के खिलाफ लगाए गए आरोप को खारिज किया है. एनसीएलटी ने कहा कि टाटा ग्रुप मैनेजमेंट में कोई गड़बड़ी नहीं है.