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एनसीआर में अधूरे प्रोजेक्ट पूरा कराने के लिए प्रधानमंत्री के नाम दिया ज्ञापन

नई दिल्ली : ग्रेटर नोएडा और नोएडा में लाखों फ्लैट बॉयर्स अपने जीवन भर की कमाई बिल्डरों को देकर 10 साल से अपने सपनों के घर का इंतजार कर रहे हैं.

एनसीआर में अधूरे प्रोजेक्ट पूरा कराने के लिए प्रधानमंत्री के नाम दिया ज्ञापन

नई दिल्ली : ग्रेटर नोएडा और नोएडा में लाखों फ्लैट बॉयर्स अपने जीवन भर की कमाई बिल्डरों को देकर 10 साल से अपने सपनों के घर का इंतजार कर रहे हैं, कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाकर फ्लैट बॉयर्स अपने आपको ठगा महसूस कर रहा है, आज फ्लैट बॉयर्स की संस्था नेफोमा ने खरीदारों की समस्याओं को निस्तारण कराने के लिए लिए पीएमओ में ज्ञापन देकर सुझव दिए जिससे लाखों फ्लैट बॉयर्स को घर मिलने का रास्ता साफ हो सके. नेफोमा की तरफ से कई बिन्दुओं पर प्रधानमंत्री को संज्ञान लेते हुए जल्द समाधान समिति गठित कर कार्यवाही करने का निवेदन किया गया है. ये बिन्दु निम्नलिखित हैं.

- लाखों फ्लैट बॉयर्स के 95 प्रतिशत पैसे लेकर बिल्डर फ्लैट नहीं बना रहे हैं. फ्लैट बनाने में पैसे न होने का हवाला देते है ज्यादातर पैसे बिल्डरों ने अपने रिश्तेदारों, दूसरे प्रोजेक्टो में ट्रांसफर कर दिए, बार बार शिकायत करने के बाद ग्रेटर नोएडा, नोएडा, यमुना एक्सप्रेस प्राधिकरण ने कोई जांच नहीं की, सभी बिल्डरों का फोरेसिंक ऑडिट कराकर वापस उसी प्रोजेक्ट में पैसे लगाया जाए, बिल्डरों ने जो बेनामी संपत्ति फ्लैट बॉयर्स के पैसे से इकट्ठी की है उसे तुरंत नीलामी कर फ्लैट बॉयर्स के फ्लैट का निर्माण पूरा कराया जाए.
- फंसे हुए आधे अधूरे प्रोजेक्टो के लाखों फ्लैट बॉयर्स जैसे आम्रपाली, जेपी, यूनीटेक, अंसल, अर्थ, शुभकामना, आरजी लग्जरी, जेनएसी, देविका गोल्ड होम्स, वेदान्तम, मिस्ट एवेन्यू भसीन ग्रुप, वेब सिटी सेंटर, सुपरटेक, मोरफेस आदि पर दोहरी मार पड़ रही है. एक तरफ बैंक की किश्त जा रही तो वही घर का किराया भी देना पड़ रहा है और फ्लैट मिलने की कोई उम्मीद नहीं है ऐसे में जब तक बॉयर्स को फ्लैट न मिल जाए तब तक बैंक की किश्त रोक दी जाए जिससे फ्लैट बॉयर्स को कुछ राहत मिल सके.
- बिल्डर बैंक से मिलीभगत कर फ्लैट बॉयर्स का पैसा हड़पने के लिए अपने आपको दिवालिया घोषित कराने के एनसीएलटी में केस करवा रहे हैं, जबकि अगर फ्लैट बॉयर्स न होता तो न प्रोजेक्ट होता न बिल्डर होते, ऐसे में फ्लैट बॉयर्स का पहला हक होता है प्रोजेक्टो पर.
- सरकार स्वयं फ्लैट बॉयर्स के फ्लैट बनवाएं, प्राधिकरण के पास फ्लैट बनाने के पर्याप्त साधन हैं जबकि प्राधिकरण स्वयं मालिक है जमीन का क्योंकि बिल्डरों को दी गयी जमीन लीज होल्ड प्रोपर्टी है, बिल्डरों ने अपने प्रॉफिट के लिए सैकड़ों एकड़ जमीन लेकर रखी हुई है प्राधिकरण चाहे तो वो जमीन बिल्डरों से वापिस ले सकती है जिससे बिल्डरों का बोझ कम हो और आज के रेट में बेचकर फ्लैट तैयार करवा सकती है, बिल्डरों पर लगाया गया चक्रवर्ती ब्याज माफ कर सकती है, प्राधिकरण को फ्लैट बॉयर्स के हितों की रक्षा करनी चाहिए.