देश के सबसे पिछड़े 117 जिलों को आगे बढ़ाने में निजी क्षेत्र भागीदारी और बढ़ाएं: नीति आयोग

इन जिलों के आगे बढ़ने से वृद्धि दर में करीब 1 से 1.5 प्रतिशत की वृद्धि होगी. 

देश के सबसे पिछड़े 117 जिलों को आगे बढ़ाने में निजी क्षेत्र भागीदारी और बढ़ाएं: नीति आयोग
नीति आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अमिताभ कांत. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: नीति आयोग ने सरकार के पिछड़ा जिला कार्यक्रम की सफलता के लिए निजी क्षेत्र से और भागीदारी का मंगलवार को आह्वान किया. इस कार्यक्रम का मकसद देश के सर्वाधिक पिछड़े 117 जिलों में व्यापक बदलाव लाना है. नीति आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि विकास के लिहाज से इन जिलों के पटरी पर आने से देश की वृद्धि को भी गति मिलेगी.

भारत-अमेरिका चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा, तीन साल के भीतर ये 117 जिले भारत की तकदीर बदलने को प्रतिबद्ध हैं. और अगर इनमें रूपांतरण आता है तो भारत भी तेजी से स्वयं में बदलाव लाएगा क्योंकि वृद्धि दर में करीब 1 से 1.5 प्रतिशत की वृद्धि होगी. 

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ये जिले वृद्धि के प्रमुख चालक होंगे. कांत ने कहा कि लेकिन सरकार अकेले इतने बड़े स्तर पर बदलाव नहीं ला सकती तथा निजी कंपनियों को इस अभियान में जुड़ना चाहिए.

उन्होंने कहा, हमें निजी क्षेत्र से बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत है. सरकार के लिए अकेले इतने बड़े स्तर पर बदलाव की कोई संभावना है. हमें सरकार तथा निजी क्षेत्र के बीच बड़ी भागीदारी की जरूरत है और यही हमें सतत विकास की ओर ले जाएगा. 

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फिलहाल टाटा ट्रस्ट, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन, पीरामल, आईटीसी प्रमुख इकाइयां इस कार्यक्रम से जुड़ी हुई हैं. सरकार ने पिछड़े जिलों में विकास को रफ्तार देने के लिए इस साल की शुरुआत में कार्यक्रम की शुरुआत की. इसका मकसद 117 सर्वाधिक पिछड़े जिलों में तेजी से और तीव्रता से बदलाव लाना है. 

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