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अर्थशास्त्र के डॉक्टर अभिजीत बनर्जी ने सरकारी बैंकों के लिए सुझाई ये दवाई, क्या इससे दूर होगी बीमारी?

अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी (Abhijit banerjee) ने कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) द्वारा डिफॉल्ट मामलों में जांच के डर ने बैंकिंग प्रणाली को पंगु बना दिया है और बैंकर उधार नहीं देना चाहते. उन्होंने कहा, 'सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सरकारी इक्विटी को 51 फीसदी से कम करने पर वे सीवीसी के दायरे से बाहर हो जाएंगे.'

अर्थशास्त्र के डॉक्टर अभिजीत बनर्जी ने सरकारी बैंकों के लिए सुझाई ये दवाई, क्या इससे दूर होगी बीमारी?
अभिजीत बनर्जी इन दिनों भारत आए हुए हैं.

नई दिल्ली: भारत के सरकारी बैंक भारी एनपीए (NPA) की समस्या से गुजर रहे हैं. सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लगातार इस कोशिश में जुटे हैं कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की समस्या को दूर किए जाएं. इस वक्त अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी (Abhijit banerjee) अपने देश आए हुए हैं. कहते हैं कि 'घर पर हो वैद्य तो चिंता क्यों करें', इसी बात को चरितार्थ करते हुए मीडियाकर्मियों ने अर्थशास्त्र के डॉक्टर अभिजीत बनर्जी (Abhijit banerjee) से पूछ लिया कि भारत के सरकारी बैंकों को मुश्किल से कैसे निकाला जाए. इसपर अर्थशास्त्र के डॉक्टर साहब ने झट से एक दवाई बता दी है.

नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी (Abhijit banerjee) ने मंगलवार को बैंकरों की आशंका को समाप्त करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से सरकारी इक्विटी को 51 फीसदी से कम करने का सुझाव दिया है. यहां एक संवाददाता सम्मेलन में अर्थशास्त्री ने कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) द्वारा डिफॉल्ट मामलों में जांच के डर ने बैंकिंग प्रणाली को पंगु बना दिया है और बैंकर उधार नहीं देना चाहते. उन्होंने कहा, 'सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सरकारी इक्विटी को 51 फीसदी से कम करने पर वे सीवीसी के दायरे से बाहर हो जाएंगे.'

यहां आपको बता दें कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की परेशानी को कम करने के लिए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 10 बैंकों का आपस में विलय कर 4 बैंक बनाने की घोषणा की थीं. इसके अलावा सरकार ने 10 बैंकों को कुल 55,250 करोड़ रुपये देने की घोषणा की थीं.

अर्थव्यवस्था या विवादास्पद मुद्दों पर कई सवालों से इनकार करते हुए बनर्जी ने कहा कि सुबह में प्रधानमंत्री के साथ अपनी मुलाकात में उन्होंने मजाक किया कि मीडिया उन्हें फंसाने की कोशिश कर रहा है और उनसे मोदी विरोधी टिप्पणी लेने का प्रयास कर रहा है.

प्रधानमंत्री ने कहा, अभिजीत बनर्जी (Abhijit banerjee) की उपलब्धियों पर गर्व है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी (Abhijit banerjee) से मुलाकात की. इस दौरान मोदी ने कहा, 'भारत को उनकी उपलब्धियों पर गर्व है.' मोदी ने ट्विटर पर अपनी और बनर्जी की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, 'नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी (Abhijit banerjee) के साथ उत्कृष्ट बैठक. मानव सशक्तीकरण के प्रति उनका जुनून स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है. हमने विभिन्न विषयों पर एक स्वस्थ और व्यापक बातचीत की. भारत को उनकी उपलब्धियों पर गर्व है. उन्हें उनके भावी प्रयासों के लिए शुभकामनाएं.'

बनर्जी अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में प्रोफेसर हैं. वह और उनकी पत्नी एस्थर डुफ्लो इस साल के अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार के विजेता रहे हैं. बनर्जी फिलहाल अपनी नई पुस्तक 'गुड इकोनॉमिक्स फॉर हार्ड टाइम्स : बेटर आंसर्स टू अवर बिग्स प्रॉब्लम' के प्रचार के लिए भारत दौरे पर हैं.

कुछ कैबिनेट मंत्री सहित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कई नेता हालांकि बनर्जी के काम के आलोचक रहे हैं. पिछले हफ्ते पुणे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए रेलवे और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि बनर्जी की वामपंथी झुकाव वाली मानसिकता है और उनके विचारों को भारत ने खारिज कर दिया है.

लोकसभा चुनाव से पहले बनर्जी ने कांग्रेस की न्यूनतम आय योजना (एनवाईएवाई) या न्यूनतम आय गारंटी योजना तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.