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अब आप किसे कहेंगे लखटकिया कार? जानिए क्यों ये शब्द हो सकता है विलुप्त

ताजा रिपोर्ट के मुताबिक टाटा नैनो कार बिलकुल नहीं बिक रही.

अब आप किसे कहेंगे लखटकिया कार? जानिए क्यों ये शब्द हो सकता है विलुप्त
टाटा नैनो (फाइल फोटो)

नई दिल्ली, लखटकिया कार यानि एक लाख की कार शब्द शायद आपके डिक्शनरी से गायब हो सकता है.  जिस Tata Nano - टाटा नैनो को आप लखटकिया कार कहते रहे हैं, वो अब अपने लगभग अंतिम सांस गिनने लगा है. ताजा रिपोर्ट के मुताबिक टाटा नैनो कार बिलकुल नहीं बिक रही. पिछले साल कंपनी ने इस ब्रांड की कोई कार तक नहीं बनाई. अफसोस इस बात की है कि पूरे 2019 में मात्र एक कार ही बिक पाई. दुनिया भर में अपने नाम की धूम मचाने वाली कार अब शायद इतिहास की बात ही हो जाए. 

रतन टाटा की ड्रीम प्रोजेक्ट रही है टाटा नैनो
टाटा संस - Tata Sons  के सबसे वरिष्ठ रतन टाटा - Ratan Tata ने मात्र एक लाख में कार का सपना साकार किया था. बताया जाता है कि टाटा नैनो रतन टाटा की ड्रीम प्रोजेक्ट रही. अफसोस इस बात का है कि लांच के समय जो कार इतनी सुर्खियां बटोर रही थी, प्रोडक्शन के बाद उतनी पॉपुलर नहीं हो पाई. आलम ये है कि पिछले साल टाटा नैनो प्लांट से एक भी कार का निर्माण नहीं हुआ. शेयर बाजारों को भेजी सूचना में कंपनी ने कहा कि दिसंबर, 2019 में टाटा मोटर्स ने नैनो की एक भी कार का उत्पादन नहीं किया. इससे भी दुर्भाग्यपूर्ण ये रहा कि कंपनी पूरे साल में एक भी कार बेच नहीं पाई.

बंद हो सकता है टाटा नैनो प्रोजेक्ट
अभी तक टाटा कंपनी ने नैनो प्रोजेक्ट को बंद करने पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. लेकिन कंपनी ने खुद माना है कि मौजूदा रूप में नैनो नए सुरक्षा नियमों और बीएस स्टैंडर्ड पर खरी नहीं उतर पाएगी. लगभग दस साल पहले 2008 में पहली बार टाटा नैनो को लांच किया गया था. लेकिन मात्र एक लाख की कार होने के बावजूद भारत में इसकी बहुत ज्यादा बिक्री नहीं हो पाई. 

2019 रहा है कार कंपनियों के लिए बेहद खराब
उल्लेखनीय है कि साल 2019 सभी कार कंपनियों के लिए बेहद खराब साबित हुआ है. बाजार की अनिश्चितता, फाइनेंस की परेशानी और आर्थिक मामलों में गिरावट के बीच पूरे भारतीय बाजार में मायूसी छाई रही. कार बाजार पिछले दो दशकों के सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज करके  -13 फिसदी की निचले स्तर पर पहुंच गई है.