कच्चे तेल के दाम में गिरावट भारत के लिये वरदान : रिजर्व बैंक

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में गिरावट भारत के लिये काफी उत्साहवर्धक है। इससे देश के सालाना तेल आयात बिल में 50 अरब डॉलर तक कमी आ सकती है। रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर उर्जित पटेल ने यह कहा।

मुंबई : अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में गिरावट भारत के लिये काफी उत्साहवर्धक है। इससे देश के सालाना तेल आयात बिल में 50 अरब डॉलर तक कमी आ सकती है। रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर उर्जित पटेल ने यह कहा।

पटेल ने कहा, ‘‘कच्चे तेल के दाम में आ रही नाटकीय गिरावट हमारे लिये वरदान है। इससे सालाना आधार पर करीब 50 अरब डॉलर की बचत हो सकती है। मोटे तौर पर यह हमारे सालाना तेल आयात बिल 160 अरब डॉलर का एक तिहाई है।’’ पटेल सोमवार रात यहां बिजनेस स्टैण्डर्ड-वलिंगकर इंस्टीट्यूट के बेस्ट बी-स्कूल प्रोजैक्ट पुरस्कार समारोह में बोल रहे थे।

पटेल ने कहा, ‘‘इस अनुकूल घटनाक्रम से हमारी खर्च करने लायक आय बढ़ेगी, जिससे दूसरे सामान और सेवाओं के लिये उपभोक्ता मांग बढ़ेगी, काम धंधों की लागत कम होगी परिणामस्वरूप उनका मार्जिन बढ़ेगा और निवेश मांग को बढ़ावा मिलेगा। इससे सरकार की राजकोषीय स्थिति में भी सुधार होगा और बजट में उर्जा सब्सिडी बोझ कम होगा।’’ इसी बीच रिजर्व बैंक के एक अन्य डिप्टी गवर्नर एच. आर. खान ने भी अपने वरिष्ठ साथी के विचारों को आगे बढ़ाते हुये कहा कि कच्चे तेल के कम दाम से हमारी अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ा है।

खान ने कहा कि जून के बाद कच्चे तेल के दाम में 58 प्रतिशत से अधिक गिरावट आ चुकी है यह मुद्रास्फीति के लिहाज से भी बेहतर है।

फरवरी डिलीवरी के लिये ब्रेंट क्रुड का दाम घटकर 45.50 डॉलर प्रति बैरल रह गया है। यह अप्रैल 2009 के बाद सबसे कम दाम है। उधर ओपेक के प्रमुख सदस्य यूएई ने कहा है कि कच्चे तेल के दाम में गिरावट को थामने में असमर्थता जताई है और अमेरिका में शेल गैस उत्पादन में कटौती की अपील की है।

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